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आंसूओं से भी नहीं धुल पाई गंदी मानसिकता

गैंगरेप के विरोध में उठी आवाज तो नहीं थमी है, लेकिन दरिंदों के कानों पर उस गुस्से और आक्रोश की चोट नहीं पड़ रही है. 16 दिसंबर की रात हिंदुस्तान की एक बेटी के साथ जो कुछ हुआ, उसके बाद भी दरिंदगी रुकी नहीं. देश के अलग-अलग हिस्सों में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के बाद यही दर्द उभरता है कि हे भगवान, कितने हैवान.

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