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जमीन का विवाद या सम्मान का डर, क्या हैं महंत की मृत्यु के कारण, देखें दस्तक

जमीन का विवाद या सम्मान का डर, क्या हैं महंत की मृत्यु के कारण, देखें दस्तक

संन्यासी जीवन बेहद कठिन है, जिसमें कठिन तप से गुजरना पड़ता है. सभी इंद्रियों सहित काम, क्रोध, लोभ, मोह, माया, अहंकार और तृष्णा को खत्म करके जो चित्त को ईष्ट की आराधना में तल्लीन करता है वो संन्यासी, संत होता है. लेकिन इन्हीं भावों को समेटकर धर्म के सर्वोच्च पदों में से एक पर बैठे महंत नरेंद्र गिरि को क्यों सुसाइड करना पड़ गया? क्यों दूसरों को शांत चित्त और जीवन का रास्ता दिखाने वाले महंत ने फांसी के फंदे से लटककर उन्हीं प्रवचन-उपदेशों का पालन नहीं किया, जो दूसरों को देते आए? देखें दस्तक.

Mahant Narendra Giri's disciple Anand Giri, whose name was found on a suicide note recovered from the seer's room, has alleged that the 72-year-old president of the Akhil Bharatiya Akhara Parishad was murdered. Narendra Giri claimed in his suicide note that he was being blackmailed by his disciple Anand Giri. Watch what are the reasons of Mahant Narendra Giri's death.

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