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देहाती दुष्टई के क़िस्से, गणित का ख़ौफ़ और खखारने वाले पड़ोसी : तीन ताल Ep 40

तीन ताल के 40वें एपिसोड में पाणिनि ‘बाबा’, कुलदीप ‘सरदार’, 'पढ़ाकू' नितिन और प्रतीक्षा 'पीपी' से सुनिए:

- ताऊ की गैरमौजूदगी से उपजा खालीपन भरने के लिए आये दो मेहमान.

-  'जय हो' तीन ताल का सर्वमान्य अभिवादन कैसे बना और इसके उच्चारण से क्या महसूस होता है. 

- आज तक रेडियो के नए पॉडकास्ट 'पढ़ाकू नितिन' का प्रोमो लॉन्च और पहले एपिसोड पर कुछ मज़ेदार जानकारी.

- गाँव से गाँव कैसे ग़ायब होता जा रहा है और ऐसा होने में समस्या क्या है? गाँव को गाँव बनाये रखकर भी क्या मिलेगा?

- दो तरह के गाँवों का ज़िक्र, एक जिसे मर जाना चाहिए था लेकिन वो मरा नहीं जबकि दूसरा वो जो मर गया जिसे ज़िंदा रहना चाहिए था. 

- गाँव के सभी लोग भोले होते हैं, ये कितना बड़ा झूठ है, कुछ क़िस्से और आपबीती. 

- गाँधी और आम्बेडकर का गाँवों पर विज़न कितना अलग था. औरतों के लिए गाँव ज़्यादा कष्टदायक क्यों हैं. 

- स्कूल के उन विषयों पर बतकही जो सबसे कंटाल और सबसे बेकार लगते थे. बाबा और सरदार को बैंक जाने से क्यों डर लगता है और उसका तोड़ उन्होंने क्या निकाला? 

- अलग-अलग विषयों के टीचर्स कैसे मारते थे और कैसे मार सकते हैं, कुछ रचनात्मक आइडियाज़. 

- बिज़ार ख़बर में, वो महिला जो अपने घर में गाती थी पर वॉल्यूम ज़्यादा था इसलिए जेल पहुँच गई. अजीबोगरीब तरह से खखारने और छींकने वाले लोगों के क़िस्से?

- बीड़ी का विज्ञापन करते हुए वायरल हुई फुटबॉलर लियोनल मेसी की तस्वीर और इस बहाने माचिस की डिब्बियों और पटाखों को फ़िल्मी तस्वीरों के सहारे बेचने का चलन. गन्ना रस विक्रेता अब भी 'तेरे नाम' के हैंगओवर से क्यों नहीं निकल पाए?


प्रड्यूसर : शुभम तिवारी
साउंड मिक्सिंग : सचिन द्विवेदी

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