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काका हाथरसी, हिंदी के ऐसे व्यंग्यकार जिनकी अंतिम यात्रा में लोग ठहाके मारकर हंस रहे थे: नामी गिरामी, Ep 114

'काका हाथरसी' ऐसे जनकवि हैं,जो व्यवस्था और उसे चलाने वालों पर कविता की चाशनी में लिपटे ऐसे तीखे व्यंग्य बाण छोड़ते थे कि जिस पर निशाना साधा जा रहा था, उसको भी मुस्कुराना ही पड़ता था. आम से लेकर ख़ास आदमी किसी को वो नहीं छोड़ते थे. काका हिंदी विधा में व्यंग को लाने वाले पहले कवि माने जाते हैं. इस नामी गिरामी में अमन गुप्ता लेकर आए हैं उन्हीं का सफ़रनामा.

प्रोड्यूसर: शुभम तिवारी

साउंड मिक्सिंग: अमृत रेगी

 

Kaka Hathrasi | Naami Giraami | Hindi Podcast 

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