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एक प्रधानमंत्री की संदिग्ध मौत पर सरकारों की चुप्पी का मतलब?

एक प्रधानमंत्री की संदिग्ध मौत पर सरकारों की चुप्पी क्या कहती है

ये शीत युद्ध का दौर था. 1965 की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को पटखनी दी थी. इसके बाद भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एक शांति समझौते पर दस्तख़त करने ताशकंद पहुंचे. लंबी बातचीत के बाद आख़िरकार भारत और पाकिस्तान के बीच  रूसी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में समझौता हो गया.

इसके कुछ घंटों बाद देर रात 1.32 बजे लाल बहादुर शास्त्री की मौत हो गई. क्या इस मौत के पीछे कोई रहस्य था, जो हमेशा के लिए दबकर रह गया?

फिल्ममेकर और लेखक विवेक अग्निहोत्री ने इसी विषय पर एक किताब लिखी है, जिसका नाम है- हू किल्ड शास्त्री. 

इस किताब में उन्होंने शास्त्री की मौत से जुड़े कई सवाल उठाए हैं. मसलन क्या उन्हें वाकई हार्ट अटैक आया था या उन्हें ज़हर दिया गया था? कहीं ये अमेरिकी या रूसी ख़ुफिया एजेंसी का काम तो नहीं था?

इस पॉड ख़ास में आज तक रेडियो के नितिन ठाकुर ने विवेक अग्निहोत्री से बातचीत की है, सुनिए.