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उद्धव ठाकरे की सेहत और राजनीति

आदित्य ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उद्धव मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. लेकिन मुख्यमंत्री का डेढ़ महीने से किसी खुले कार्यक्रम में ना दिखना अटकलों का बाजार गर्म कर रहा है. अगर समय पर हुए तो फरवरी 2022 में महाराष्ट्र में मुंबई समेत 12 महानगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं.

उद्धव ठाकरे की सेहत और राजनीति उद्धव ठाकरे की सेहत और राजनीति

राजनीति में नेता और नेता पर निर्भर पार्टी का भविष्य चुनाव से तो आंका ही जाता है, नेता के स्वास्थ्य से भी ये सीधा जुड़ा होता है. इसीलिए कई बार किसी नेता की तबीयत ठीक ना हो तो उसपर अटकलों का बाजार गर्म हो जाता है. यही वजह है कि पार्टी की तरफ से पुरजोर कोशिश होती है कि जहां तक हो सके मामला छुपाया जाए, नहीं तो, ‘सब ठीक है’ का माहौल बनाए रखा जाए. लेकिन अगर नेता मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री हो तो ऐसा करना काफी मुश्किल हो जाता है. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे का मामला इसका प्रमाण है.

एकबार फिर विपक्ष के निशाने पर उद्धव

वैसे भी उद्धव ठाकरे बाकी मुख्यमंत्रियों की तरह मुंबई में मुख्यमंत्री दफ्तर में आकर काम करने के बजाय अपने मुख्यमंत्री आवास पर रह कर काम करना पसंद करते हैं. कोविड के समय ये चल पाया जब पूरी दुनिया वर्चुअली काम पर जोर दे रही थी. लेकिन स्थिति सुधरने के बाद भी उद्धव अपने तरीके से काम करते रहे. विपक्षी भाजपा ने इसे मुद्दा भी बनाया. लेकिन किसी संवैधानिक पद पर काम कर रहे पहले ‘ ठाकरे’ ने अपने तरीके से ही काम जारी रखा. हाल-फिलहाल में उनकी हुई सर्जरी की वजह से उद्धव एकबार फिर विपक्ष के निशाने पर हैं. लेकिन इसबार सिर्फ उनकी सेहत या उनके काम करने के तरीके पर नहीं बल्कि उनकी सेहत की आड़ में महाराष्ट्र की महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार की सेहत पर सवाल खड़ा किया जा रहा है.

उद्धव की सेहत महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य को संभालने के लिए साथ नहीं दे रही तो...

दरअसल, 10 नवंबर को उद्धव ठाकरे की गर्दन में दर्द की शिकायत के बाद उनका ऑपरेशन किया गया था. इसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है. 2 दिसंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली लेकिन उनके चलने-फिरने या सामान्य रूप से काम करने पर काफी अटकलें लगीं. इस तरह के ऑपरेशन के बाद सामान्य रूप से चलने-फिरने में कई महीनों का समय लगता है. कई दिनों तक शांत रहने के बाद विपक्ष ने इस मामले को तूल देना शुरू किया कि अगर उद्धव ठाकरे की सेहत महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य को संभालने के लिए साथ नहीं दे रही तो उन्हें अपने पद का प्रभार किसी और को दे देना चाहिये. भाजपा ने कटाक्ष भी किया कि कांग्रेस एनसीपी के किसी नेता को उद्धव अगर चार्ज नहीं देना चाहते तो अपनी पत्नी या बेटे आदित्य ठाकरे जो उनकी ही सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं उन्हें दे दें. दरअसल भाजपा की ये कोशिश थी कि सरकार की राजनीतिक मजबूरी को वो उजागर करे और साथ ही दबाव बनाए कि कैसे सरकार मुख्यमंत्री की सेहत की वजह से सक्षम नहीं है.

उद्धव एक विशिष्ट स्थिति में मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने बेटे आदित्य की तरह खुद चुनाव लड़कर विधानसभा की राजनीति में आने का फैसला नहीं लिया था. लेकिन महाराष्ट्र में चुनाव के नतीजों के बाद जो स्थिति बनी उसकी वजह से अपनी ‘रिमोट कंट्रोल’ राजनीति छोड़ उनको मैदान में उतरना पड़ा. शिवसेना के किसी और नेता के नेतृत्व में कांग्रेस एनसीपी के वरिष्ठ नेता काम करने को तैयार नहीं थे. ऐसे में उद्धव ठाकरे को खुद मुख्यमंत्री बनना पड़ा ताकि शिवसेना के नेतृत्व में सरकार बन सके, अब किसी वजह से उद्धव मुख्यमंत्री नहीं रह सकते तो इस सरकार के चलने पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. कांग्रेस और एनसीपी के नेता जो पूर्व मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या सालों तक मंत्री रह चुके हैं वो किसी ‘जूनियर’ शिवसेना नेता को मंजूर नहीं करेंगे.

आदित्य पहली बार मंत्री बने हैं और उम्र के हिसाब से भी काफी छोटे हैं. ऐसे में सरकार को टिकाना है तो जो स्थिति है उसी में उद्धव ठाकरे के नाम पर सरकार चलाना शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी तीनों की मजबूरी है. भाजपा को ये पता है और इसीलिये उद्धव की सेहत पर अटकलों का बाजार गर्म रखना उनके लिए फायदे का सौदा है. ऐसे में उद्धव वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कैबिनेट और बाकी अहम मीटिंग ले रहे हैं. इस तरह की तस्वीरें और वीडियो अनौपचारिक तौर पर जारी कर दिए गए. खुद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भरोसा दिलाया कि उद्धव विधानसभा सेशन में आएंगे. 
 



शिवसेना के कब्जे में पिछले 25 साल से BMC

आदित्य ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उद्धव मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. लेकिन मुख्यमंत्री का डेढ़ महीने से किसी खुले कार्यक्रम में ना दिखना अटकलों का बाजार गर्म कर रहा है. अगर समय पर हुए तो फरवरी 2022 में महाराष्ट्र में मुंबई समेत 12 महानगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं. मुंबई महानगर पालिका शिवसेना के कब्जे में पिछले 25 साल से है, उसपर कब्जा बनाए रखना सरकार से ज्यादा पार्टी के लिये जीने मरने का सवाल है. और अगर किसी वजह से उद्धव ठाकरे चुनाव प्रचार में नहीं दिखे तो शिवसेना के लिये अच्छा नहीं होगा. सरकार की स्थिरता पर दोबारा सवाल उठना शुरू हो सकता है इसीलिए कोशिश ये हो रही है कि जितना हो सके सब ठीक है का नारा बरकरार रहे.

ऐसा नहीं है कि सेहत खराब रहना किसी मुख्यमंत्री के लिए चुनाव में खतरा ही साबित हुआ हो. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री  एम जी रामचंद्रन अमेरिका में कैंसर का इलाज कराते हुए भी चुनाव जीते थे. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एनटी रामाराव भी जब विदेश में इलाज करा रहे थे तभी उनकी सरकार गिराई गई थी लेकिन लोक दबाव के चलते उन्हें दोबारा अपना पद मिल गया था. कई बार सेहत का ठीक ना होना सहानुभूति भी पैदा कर सकता है. लेकिन महाराष्ट्र की सरकार अकेले शिवसेना की नहीं है, ये तीन पार्टियों की मिली जुली सरकार है और ऐसे में उद्धव ठाकरे का सेहतमंद रहना सरकार चलाने के लिये जरूरी बन गया है. तीनों पार्टियों की आपसी सूझबूझ कितनी बेहतर है ये जांचने की भी ये एक और परीक्षा है. क्योंकि भाजपा ये मौका भुनाने से नहीं चूकेगी.

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