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जियो सुष! तुम लड़कियों के लिए आइडल थीं और हमेशा रहोगी

सुष्मिता सेन को 'गोल्ड डिगर' बोला जा रहा है. ये बोलते वक्त लोग इस महिला की उपलब्धियों और संघर्षों को भूल गए, याद रहा तो सिर्फ ललित मोदी का बैंक बैलेंस. जिसके वजन से सुष्मिता की शख्सियत को तोला जा रहा है.

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बेबाक लड़कियों की खासियत होती है उनका पानी की तरह साफ होना. कुछ छिपाती नहीं, किसी से डरती नहीं, जो करती हैं, ताल ठोक के करती हैं और जो कर चुकीं उसपर अफसोस नहीं करतीं. उनकी यही बेबाकी, समाज की आंख में खटकती है. अब ये बेबाक लड़की भले ही समाज के लिए आइडियल हो, लेकिन समाज जजमेंटल होने का एक भी मौका नहीं छोड़ता. फिर सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) क्या चीज हैं.   

सुष्मिता किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. लेकिन आज उनके पूरे अस्तित्व को दरकिनार करके, सिर्फ एक नजर से देखा जा रहा है. और समाज की ये नजर हर उस लड़की पर एक जैसी पड़ती है, जो किसी रईस शख्स से संबंध रखती है या शादी करती है. सुष्मिता सेन को 'गोल्ड डिगर' (Gold Digger) बोला जा रहा है. ये बोलते वक्त लोग इस महिला की उपलब्धियों और संघर्षों को भूल गए, याद रहा तो सिर्फ ललित मोदी का बैंक बैलेंस. जिसके वजन से सुष्मिता सेन की शख्सियत को तोला जा रहा है.

मोदी के साथ रिश्ता पचा क्यों नहीं पा रहा समाज?

आज ललित मोदी और सुष्मिता के संबंधों का जो पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है, उसे देखकर अफसोस होता है कि हमारे देश के लोग इतने फुरसतिये कैसे हैं कि किसी की पर्सनल लाइफ पर ज्ञान बांट रहे हैं और जम के बांट रहे हैं. दरअसल हम जिस समाज में रहते हैं, ये समाज हर किसी के लिए एक दायरा तय कर देता है. दायरा ये कि अगर ये महिला आइडल है तो उसे ऐसा कोई काम करना नहीं चाहिए जो समाज की नजर में अच्छा न हो. वो समाज के हिसाब से चले, तो ही आइडल है, वरना नहीं.

ये समाज आज सुष्मिता सेन के संबंधों को एक रईस आदमी के साथ पचा नहीं पा रहा है. आज सुष्मिता को पैसे के पीछे भागने वाली औरत कहा गया, ये वही समाज है जो कुछ साल पहले सुष्मिता के फैसलों की दाद दिया करता था. उनका अपनी मर्जी से शादी करना बर्दाश्त नहीं हो पा रहा, लेकिन बिना शादी किए दो बच्चियों को गोद लेना एक्सेप्टेबल था. समाज में एक सिंगल मदर का बेटियों को पालना एक्सेप्टेबल है, लेकिन मर्जी से संबंध रखना, प्रेम करना या शादी करना एक्सेप्टेबल नहीं.

बात यहां सिर्फ शादी की नहीं है, एक रईस शख्स के साथ घर बसाने की है. जो समाज के मुताबिक, सुष्मिता सेन जैसी खूबसूरत महिला के संग जंचता भी नहीं है, दो साल बाद 60 साल का होने वाला है और जिसपर कई अप्रिय मामलों के आरोप हैं. लोग कहते हैं सुष्मिता ने ये सब नहीं देखा, सिर्फ पैसा देखा. ऐश्वर्या राय भी जब बच्चन परिवार की बहू बनीं, तो उनके लिए भी यही बोला गया के वे खुशकिस्मत हैं. ये तब था जबकि ऐश्वर्या, अभिषेक की तुलना में ज्यादा सफल थीं. लेकिन यहां भी उनकी काबिलियत को दरकिनार किया गया. 

मोदी की दौलत दिखी, सुष्मिता की काबिलियत नहीं?

ललित मोदी भले ही सुष्मिता से ज्यादा दौलत रखते हों, लेकिन सुष्मिता खुद उनसे कहीं ज्यादा अमीर हैं. उनके पास जो उपलब्धि है, वह किसी और में है ही नहीं. वे भारत की पहली महिला हैं जिन्होंने ब्रह्मांड सुंदरी का खिताब जीतकर हमारे देश को गौरव दिलाया था. इसके बाद ही देश में सौंदर्य प्रसाधनों का जो बाजार जमा, वह किसी से नहीं छिपा. वो इस मुकाम तक सिर्फ अपनी हाइट और सौंदर्य की वजह से नहीं पहुंची थीं, उनकी बुद्धिमानी और काबिलियत से ही उनके सिर Miss Universe का ताज सजा था. वो कई लोगों के साथ रिश्ते में तो रहीं, लेकिन शायद घर बसाने लायक उन्हें कोई नहीं जंचा. लेकिन उन्हें पता था कि वो एक अच्छी मां जरूर बन सकती हैं. इसलिए दो बेटियों को गोद लिया और उनका जीवन संवारा. अच्छाइयां गिनने के बजाए लोग उनके अब तक के संबंधों को गिन रहे हैं.

'गोल्ड डिगर' कौन?

दौलत के मामले में भले ही ललित मोदी सुष्मिता से ज्यादा हों, लेकिन सुष्मिता हर लिहाज से मोदी से इक्कीस ही हैं. एक सेल्फ मेड विमेन से ज्यादा सफल और ताकतवर मेरी नजर में कोई नहीं. तो, 'गोल्ड डिगर' ललित मोदी ही हो सकते हैं, सुष्मिता नहीं. लकी हैं मोदी कि सुष्मिता जैसी महिला उनके साथ हैं.

अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाली सुष्मिता सेन ने, न पहले लोगों की परवाह की और न आज करने वाली हैं. वे बेबाक थीं, हैं, और रहेंगी. अगर वे ललित मोदी के साथ जीवन बिताने का फैसला करती हैं, तो यह भी सुष्मिता के बाकी सभी फैसलों की तरह स्वागत योग्य होगा. ललित मोदी के साथ डेटिंग के फैसले से, उन लड़कियों का नजरिया जरा भी नहीं बदला, जो उन्हें आइडल मानती रही हैं. क्योंकि हमें पता है कि एक बुद्धिमान महिला अच्छी तरह जानती है कि वो क्या कर रही है. जियो सुष !


 

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