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समावेशी भावना- नेतृत्व के लिए पहली आवश्यकता

कोई भी नेता, अगर अपने आस-पास के लोगों के साथ एकत्व और समावेश की भावना महसूस नहीं करते, तो वे सच्चे नेता नहीं हो सकते.

सदगुरु के विचार सदगुरु के विचार

आजकल नेतृत्व को लेकर और नेता बनने के बारे में बहुत बातें हो रही हैं. मुझे नहीं लगता कि किसी को नेता बनने की कोशिश करनी चाहिए. नेतृत्व नेता बनने के बारे में नहीं है. 

आम तौर पर, लोग नेतृत्व को सत्ता के पद के रूप में समझते हैं. लेकिन जो नेता सचमुच सफल थे और जिन्हें लोग प्रेम करते थे, वे निरंतर एक त्याग की अवस्था में रहते थे, क्योंकि एक नेता होने का मतलब है कि आपका जीवन और आपके कार्य खुद के बारे में नहीं रह गए हैं. आपके अंदर पैदा होने वाला हर विचार और भावना, आपके द्वारा किया जाने वाले हर कार्य का असर लाखों लोगों पर पड़ रहा है. यह एक विशेष सौभाग्य और जिम्मेदारी है कि आप अपने आस-पास के लोगों के जीवन को कई तरीकों से छू सकते हैं. 

जब मैं ‘नेता’ कहता हूं, तो मैं बस किसी देश या लोगों के एक बड़े समूह के नेता की ही बात नहीं कर रहा हूं. हम जिस भी क्षेत्र में हैं, चाहे वह आध्यात्मिक हो, राजनीतिक हो, आर्थिक या सामाजिक हो, या परिवार के भीतर भी, हर कोई किसी न किसी क्षमता में एक नेता या अग्रणी है; यह सिर्फ पैमाने की बात है. आप जिस भी चीज को संभाल रहे हैं और दो लोगों का या एक अरब लोगों का नेतृत्व कर रहे हैं, हर कोई एक तरह का नेता है. कोई भी नेता, अगर समावेश की गहरी भावना महसूस नहीं करते, अगर वे अपने आस-पास के लोगों को अपने एक हिस्से के रूप में महसूस नहीं करते, और लोग जो हैं, उसके मूल तत्व को नहीं समझते, बस एक बौद्धिक प्रक्रिया के रूप में समझना नहीं, बल्कि अनुभव के आधार पर अगर वे अपने आस-पास के लोगों के साथ एकत्व और समावेश की भावना महसूस नहीं करते, तो वे सच्चे नेता नहीं हो सकते. वे परिस्थितियों में सिर्फ थोड़ी बेहतरी करने या बिगाड़ने के लिए हेरफेर कर सकते हैं.  

सर्वश्रेष्ठ को बाहर लाना

मैं एक बड़ी कंपनी में प्रबंधकों के लिए एक कार्यक्रम संचालित कर रहा था. हमारे पास स्वयंसेवी थे जो चीजों को करते हुए घूम रहे थे. इन प्रबंधकों ने देखा कि किस तरह से हमारे लोग काम कर रहे हैं और उन्होंने पूछा, ‘सद्गुरु आपको ऐसे लोग कहां मिलते हैं?’ मैंने जवाब दिया, ‘वे मिलते नहीं हैं, आपको उन्हें बनाना होता है.’ 
‘आप उन्हें कैसे बनाते हैं?’ उन्होंने पूछा. 
‘आपको यह करना होता है कि वे आपके साथ प्रेम करने लगें. ’ 
तब उन्होंने पूछा, ‘ठीक है, हम यह कैसे करें कि वे हमसे प्रेम करने लगें?’ 
मैंने कहा, ‘पहले आपको उनसे प्रेम करना होगा. ’
उन्होंने जवाब दिया, ‘ओह! वे उसके लिए हमें पैसे नहीं देते.’ 

अगर आप किसी समूह का नेतृत्व करना चाहते हैं और चाहते हैं कि हर कोई अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर काम करे, तो पहले आपको सुनिश्चित करना होगा कि वे सभी आपसे प्रेम करते हों. अगर आप चाहते हैं कि हर कोई आपसे प्रेम करे, तो पहले आपको उन सबसे प्रेम करना होगा. यह कोई चाल नहीं है - ‘अगर मैं तुमसे प्रेम करने लगूं, तो आप मुझसे प्रेम करने लगेंगे, तब आप मेरे लिए बेहतर काम करेंगे.’ जिस पल आप वैसा करते हैं, कोई भी सहयोग नहीं करेगा. अगर आप अपने आस-पास हर किसी से ईमानदारी से प्रेम करते हैं, तो धीरे-धीरे हर कोई आपसे प्रेम करने लगता है. अलग-अलग लोगों को अलग-अलग समय लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे वे प्रेम करने लगेंगे. एक बार जब वे आपके साथ प्रेम में होते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ करेंगे. 

यह दूसरों में से सर्वश्रेष्ठ बाहर लाने की क्षमता है जो आपको एक नेता या अग्रणी बनाता है. नेतृत्व का असल में मतलब है कि आप आवश्यक वातावरण पैदा करने में काबिल हैं, जहां लोग खुद के लिए निर्धारित सीमाओं से परे जा सकते हैं. नेता की मौजूदगी में, लोग ऐसी चीजें कर पाते हैं जो उन्होंने खुद से नहीं की होतीं, जिनको कर पाने की कल्पना उन्होंने नहीं की थी.  

लोग अपना जीवन आपके हाथों में सौंपने को तैयार हैं क्योंकि उन्हें यकीन है कि आप उन्हें कुछ ऐसा हासिल करा सकते हैं जो वे खुद हासिल नहीं कर पाते. आप उनके लिए एक ऐसा आयाम खोल देते हैं जो उन्होंने खुद से कभी नहीं खोला होता. सिर्फ तभी लोग एक नेता के पीछे इकट्ठा होते हैं. 

आपको कभी नेता बनने की आकांक्षा नहीं करनी चाहिए. अपने जीवन के लिए हमने काम की जो भी प्रकृति चुनी है, अगर हम उन स्थितियों में अग्रणी होना चाहते हैं, तो पहली चीज है कि हमें अपनी मिसाल से नेतृत्व कर पाना चाहिए. शब्दों से नहीं, चालबाजी या चालाकी से नहीं, बल्कि मिसाल से. 

अगर आप खुद को प्रतिबद्ध बना लें, समर्पित कर दें, किसी ऐसे मकसद के लिए अर्पित कर दें, जो समावेशी प्रकृति का है, या दूसरे शब्दों में, अगर आप मानवीय खुशहाली को देखते हैं, बस अपनी खुशहाली को ही नहीं, तो आपके समर्पण और आपकी निष्ठा के आधार पर, लोग आपको एक नेता के रूप में पहचानेंगे. आप जिन लोगों का नेतृत्व करना चाहते हैं, उनको अगर आपने अपने एक हिस्से के रूप में शामिल नहीं किया है, तो आप गुलाम हांकने वाले बन जाएंगे. गुलाम हांकने से, हो सकता है कि आप थोड़ा काम करा लें, लेकिन आप धरती पर सबसे ज्यादा घृणा किए जाने वाले जीव होंगे. 

पूर्णतः समावेशी हुए बिना, जिनका आप नेतृत्व करते हैं, उन्हें पूरी तरह से गले लगाए बिना, आप वाकई उनका नेतृत्व नहीं कर सकते. अगर आप सचमुच समावेशी हैं, सिर्फ तभी आप नेतृत्व कर सकते हैं. 

(भारत में पचास सर्वाधिक प्रभावशाली गिने जाने वाले लोगों में, सद्गुरु एक योगी, दिव्यदर्शी, और युगदृष्टा हैं और बहुचर्चित लेखक हैं.साल 2017 में भारत सरकार ने सद्गुरु को उनके अनूठे और विशिष्ट कार्यों के लिए पद्मविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है.) 

 

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