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समझदार या जख्मी- यह आपका चुनाव है

इंसान अप्रसन्न स्थितियों से जितना ज्यादा गुजरता है, सीमाओं से निकलकर विकास करने की संभावना उनती बढ़ जाती है. अप्रसन्न स्थितियां आने पर हमें विकास और तेजी से करना चाहिए! आम तौर पर, तकलीफदेह अनुभव गहन असर के अनुभव भी होते हैं. जब गहनता आपके मार्ग में आए तो उसे बर्बाद बिल्कुल मत जाने दीजिए. वही आपको परिपक्व करती है.

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फिलहाल, बहुत से लोग इस नतीजे पर पहुंच गए हैं कि खुश रहने का सवाल ही नहीं है, क्योंकि उनके समाज या संस्कृति ने उन पर चीजें थोप दी हैं, उन्हें नियंत्रित किया हुआ है, या कुछ चीजें करने को मजबूर किया हुआ है. अगर आप यह यह बात समझते हैं, तब आप उससे आगे क्यों नहीं जा सकते?

खासकर पश्चिम में, शिकायत की एक विशाल संस्कृति है. लोग कहते हैं, ‘आपको पता है मैं ऐसा क्यों हूं? क्योंकि जब मैं पांच साल का था, तब मेरे पिता ने मुझे चांटा मारा था.’ इसका मतलब है कि आप जिस स्थिति को बदल नहीं सकते उसे आप, जो आज आप हैं, उसके लिए एक कारण के रूप में बता रहे हैं. दस साल पहले या बीस साल पहले जो हुआ उसे कोई नहीं बदल सकता. अगर आप कहते हैं, ‘मेरी वर्तमान हालत सिर्फ उसकी वजह से है’ तो आप पक्का कर ले रहे हैं कि आप बदल नहीं सकते.

आप अप्रसन्न स्थितियों से जितना ज्यादा गुजरते हैं, आपके लिए अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर विकास करने की संभावना उनती ही ज्यादा होती है. खासकर, अगर अप्रसन्न स्थितियां आई हैं, तो आपको विकास और तेजी से करना चाहिए! आम तौर पर, तकलीफदेह अनुभव गहन असर के अनुभव भी होते हैं. जब गहनता आपके मार्ग में आती है, वह चाहे जिस रूप में भी हो, उसे बरबाद मत जाने दीजिए. वही आपको संभावनाओं के एक दूसरे आयाम में परिपक्व करती है. अगर अतीत में अप्रसन्नता में आपके साथ गहन अनुभव हुए हैं, तो उसे अपने अंदर एक जख्म में मत बदलिए. यही समय है कि आप उसे समझदारी में बदल दें.

आपके पास आने वाली हर परिस्थिति को आप, या तो खुद को आजाद करने के लिए, या फिर खुद को बांधने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. आप जिस तरह से हैं वैसे आप, आपके द्वारा झेली गई स्थितियों के कारण नहीं हैं. आप जिस तरह से हैं वैसे आप इसलिए हैं क्योंकि आपने उन स्थितियों को वह करने दिया जो उन्होंने आपके साथ किया है. अगर आप इच्छुक हैं, आप उसे अभी के अभी बदल सकते हैं. 

मैं जानता हूं कि परिस्थितियां आप पर छाप छोड़ती हैं. जिसे आप ‘मेरा मन’ कहते हैं, वह वाकई आपका मन नहीं है - वह बस समाज का कूड़ादान है. हर कोई जो इधर से गुजरता है, वह आपके सिर में कुछ न कुछ ठूंस देगा. आप अपने मन में क्या प्राप्त करते हैं, उसके बारे में आपके पास कोई विकल्प नहीं होता, लेकिन आपके पास यह विकल्प जरूर होता है कि आप उसे कैसे आत्मसात करते हैं और उसे आप अपने जीवन में कैसे उपयोग करते हैं. उसी प्रदत्त स्थिति के लिए, एक व्यक्ति जख्मी हो जाता है, जबकि एक दूसरा व्यक्ति समझदार बन जाता है - वे उसे कैसे आत्मसात करते हैं, यह उस पर निर्भर करता है. 

हमारे अनुभव में आने वाली सबसे खराब और सबसे अच्छी चीजों के लिए, हो सकता है कि कोई बाहरी उत्तेजक मौजूद हो, लेकिन मुख्य रूप से वह अनुभव हमारे भीतर ही पैदा होता है. खुशी और दुःख, हमें होने वाले सबसे सुंदर और सबसे भयानक अनुभव, सभी हमारे भीतर से ही पैदा होते हैं.

समस्या यह है कि हमने अपने अनुभवों के आधार को अपने हाथ में नहीं लिया है. हम बस विभिन्न उत्तेजकों के प्रति एक विवशतापूर्ण प्रतिक्रिया के रूप में चलते जा रहे हैं. आपको अपने अनुभव के आधार को मनमुताबिक बनाना होगा. आपके साथ जो होता है, वह आपके अंदर क्या बनता है, उसे रूपांतरित करना आपकी क्षमता में है. 

भारतीय आध्यात्मिकता के लिए हमेशा एक कमल के फूल को प्रतीक के रूप में लिया गया है. कमल का फूल सबसे अच्छे से वहां बढ़ता है जहां कीचड़ मोटी होती है. इसकी जड़ें कीचड़ में होती हैं, लेकिन वह बहुत सुंदर खिलता है और अत्यंत शानदार सुगंध छोड़ता है. 

अब, जब आप दुनिया में रहते हैं, तो आप किसी न किसी गंदगी में जरूर कदम रख देंगे - आप उससे बच नहीं सकते. सिर्फ दुनिया में ही नहीं, आपके अपने मन में भी यह हर समय होती है. अब कुछ लोग ऐसे हैं, जो गंदगी से एलर्जी विकसित कर लेते हैं और दूर भागने की कोशिश करते हैं, लेकिन आप चाहे अपना घर छोड़ें, या अपना शहर छोड़ें, और किसी गुफा या पहाड़ पर चले जाएं, फिर भी आपका मन आपके पीछे आता है. आप उसे वाकई दूर नहीं कर सकते. एक और तरह के लोग सोचते हैं, ‘वैसे भी, हर जगह गंदगी है. तो चलो मैं भी गंदगी बन जाता हूं.’ लेकिन एक दूसरी संभावना भी है. गंदगी अच्छी खाद होती है; आप इस गंदगी को इस्तेमाल कर सकते हैं और अपने शानदार खिलने को बांट सकते हैं और अपनी सुगंध को दुनिया में चारों ओर फैला सकते हैं. 

गंदगी को सुगंध में बदलने की टेक्नॉलजी को हम योग कह रहे हैं. दुनिया आप पर जो फेंकती है, वह हमेशा आपका चुनाव नहीं होता. लेकिन उससे आप क्या बनाते हैं, वह सौ प्रतिशत आपका चुनाव होता है. इस चुनाव को मत गंवाइए. मेरी कामना है कि आप अपनी नियति के मालिक हों.

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