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'65 की उम्र में 30 हजार KM मोटरसाइकिल यात्रा कोई जॉयराइड नहीं'

लोगों की एक पीढ़ी के रूप में हमने इस धरती से सबसे बड़ा निवाला खा लिया है. अभी, हम उस बच्चे की मिट्टी को खत्म कर दे रहे हैं, जिसे जन्म लेना बाकी है. मेरे लिए, एक अजन्मे बच्चे के भोजन को खाना, मानवता के प्रति अपराध जैसा महसूस होता है. हमें इसे पलटना होगा.

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सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन

जागरूक धरती- मिट्टी बचाओ अभियान के एक हिस्से के रूप में मैं अकेला मोटरसाइकिल से यात्रा कर रहा हूं. ये 21 मार्च को लंदन से शुरू हुई और 100 दिन में 30 हजार किलोमीटर चलकर भारत में कावेरी नदी की घाटी में खत्म होगी. हम मई के महीने में अरब देशों से गुजरेंगे जहां तापमान 36-40 डिग्री सेल्सियस होगा. हम मॉनसून के ठीक बीच में भारत पहुंचेंगे तो मुझे अपने जीवन की मार मिलने वाली है.

हर दिन मैं औसतन करीब 500 किमी मोटरसाइकिल चला रहा हूं. इसके अलावा तीन से पांच कार्यक्रम भी होते हैं, जैसे- मीडिया से इंटरव्यू, सोशल मीडिया के इंटरव्यू और प्रभावशाली लोगों और सांसदों के साथ मीटिंग. जब मैं मोटरसाइकिल चला रहा होता हूं तब भी मैं ये इंटरव्यू देता रहता हूं. भोर 1:30-2:00 पर हर दिन खत्म होता है. मैं नहीं जानता कि दिन कैसे निकल जाता है. ऐसा लगता है कि दस मिनट में ही दिन खत्म हो गया.

सद्गुरु
सद्गुरु

बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं, "सद्गुरु, आप अपने जीवन के इस चरण में यह सब क्यों कर रहे हैं?" 65 साल की उम्र में 30 हजार किमी मोटरसाइकिल चलाना कोई मजे लेने वाली चीज नहीं है. हो सकता है कि यह मुझे खत्म कर डाले, लेकिन मुझे लगा कि इससे पहले कि मैं बहुत बूढ़ा हो जाऊं और किसी लायक न रहूं, मुझे यह जरूर करना चाहिए. क्योंकि अगर हम मिट्टी को अगले 20 साल में नहीं बचाते तो हम एक बहुत अफसोसजनक पीढ़ी होंगे. मैं चाहता हूं कि लोग यह समझें कि कोई इंसान इसमें अपना पूरा जीवन लगा देने को तैयार है और यह कि मिट्टी को बचाना इतना जरूरी है.

सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन
सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन

अभी, संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में खेती योग्य मिट्टी सिर्फ 80-100 फसलों के लिए ही बची है. इसका मतलब है कि 45-60 साल बाद गंभीर खाद्य समस्या आ सकती है और समृद्ध मिट्टी का मिलना इस धरती पर युद्ध का कारण बन सकता है. अगर हम ठोस कदम अभी उठाते हैं, तब अगले 25-30 साल में, हम मिट्टी की सेहत को काफी हद तक सुधार सकते हैं लेकिन अगर हम कार्रवाई करने के लिए 50 साल और इंतजार करते हैं तो फिर मिट्टी को बहाल करने में 100-200 साल लगेंगे. इसका मतलब है कि मिट्टी की कमजोर हालत के कारण, चार या पांच पीढ़ियों का जीवन भयंकर स्थिति से गुजरेगा.

मिट्टी हमारी संपत्ति नहीं, विरासत है

लोगों की एक पीढ़ी के रूप में हमने इस धरती से सबसे बड़ा निवाला खा लिया है. अभी, हम उस बच्चे की मिट्टी को खत्म कर दे रहे हैं, जिसे जन्म लेना बाकी है. मेरे लिए, एक अजन्मे बच्चे के भोजन को खाना, मानवता के प्रति अपराध जैसा महसूस होता है. हमें इसे पलटना होगा. मिट्टी हमारी संपत्ति नहीं है बल्कि एक विरासत है जो हमने पिछली पीढ़ियों से प्राप्त की है. अब यह देखना हमारा काम है कि अगली पीढ़ियों के पास जीवंत मिट्टी हो.

कर रहे नीति में बदलाव लाने की कोशिश

इसी वजह से हमने जागरूक धरती- मिट्टी बचाओ अभियान शुरू किया है. अभियान के एक हिस्से के रूप में, हम 3.5 अरब लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सारी राजनीतिक पार्टियों और सरकारों को, मिट्टी को पुनर्जीवित करने के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनाने के लिए समझाया जा सके. हम नीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर आपके पास कृषि-भूमि है तो आपकी मिट्टी में कम से कम 3-6 प्रतिशत जैविक तत्व जरूर होने चाहिए. सिर्फ तभी मिट्टी जीवित रहेगी वरना मिट्टी रेत बन जाएगी.

हर किसी को कुछ न कुछ कहना चाहिए

बाकी के इन सौ दिनों में हर किसी को मिट्टी के बारे में कुछ न कुछ कहना चाहिए, हर दिन कम से कम 5 से 10 मिनट. सोशल मीडिया का इस्तेमाल कीजिए - ट्विटर, फेसबुक, टेलीग्राम, या जो भी आपके पास हो. पूरी दुनिया को मिट्टी की बात करनी चाहिए. आपमें से हर किसी को, जितने ज्यादा से ज्यादा संभव हो, उतने लोगों तक पहुंचना चाहिए. क्योंकि जब लोग आवाज उठाते हैं, तभी सरकारें नीतियों में आवश्यक बदलाव करेंगी. इसका एक हिस्सा बनिए और आइए हम इसे कर दिखाएं!

 

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