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70 के बाद भारत में चीतों की वापसी, अफ्रीकी देश से एमपी के इस पार्क में आएंगे चीते

भारत से 70 साल पहले विलुप्त हो चुके चीते एक बार फिर से देश की धरती पर दौड़ते नजर आएंगे. अब इन्हें श्योपुर के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में बसाने की तैयारियां शुरू हो गई है. कूनो पालपुर नेशनल पार्क 750 वर्ग किलोमीटर में फैला है जो कि 6,800 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले खुले वन क्षेत्र का हिस्सा है. 

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कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीकन चीतों को बसाने की तैयारी कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीकन चीतों को बसाने की तैयारी

भारत से 70 साल पहले विलुप्त हो चुके चीते एक बार फिर से देश की धरती पर दौड़ते नजर आएंगे. अफ्रीकी देश नामीबिया मध्य प्रदेश को चीते देगा, जिन्हें श्योपुर के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में बसाने की तैयारियां शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसकी जानकारी दी है. चीता लाए जाने के लिए भारत और नामीबिया सरकार के बीच करार होने के बाद श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में सरगर्मी बढ़ गई है. यहां चीतों को बसाने की तैयारियां पिछले दो साल से चल रही  हैं. 

चीतों को यहां लाए जाने के बाद उन्हें सॉफ्ट रिलीज किया जाएगा. यानी करीब एक महीने तक चीतों को विशेष तौर पर बनाए गए एनक्लोजर के अंदर एकांतवास में रखा जाएगा. इससे चीते आसानी से यहां के वातावरण के अनुसार ढल सकेंगे. निर्धारित क्षेत्र (बाड़े) में रहने से उनकी सुरक्षा और निगरानी भी सुनिश्चित हो सकेगी. श्योपुर का कूनो पालपुर अभयारण्य लंबे समय से नये मेहमानों का इंतजार कर रहा था. लेकिन योजना अब तक परवान नहीं चढ़ सकी अब अफ्रीका और नामीबिया से चीते लाने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. पिछले दिनों दोनों देशों के विशेषज्ञों की टीम यहां आई और पूरे अभयारण्य का दौरा करके लौटी. टीम ने चीतों के बाड़े में कुछ छोटे-मोटे काम और कराने के लिए कहा है, जिन्हें तेजी के साथ कराया जा रहा है.

चीतों के लिए 5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का बाड़ा बनाया गया है. इसके चारों तरफ करीब नौ फीट ऊंची जालीदार फेंस बनाई गई है और ऊपरी हिस्से में बिजली के तार गए हैं. बाड़े में सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी. बता दें कि कूनो पालपुर नेशनल पार्क 750 वर्ग किमी में फैला है जो कि 6,800 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले खुले वन क्षेत्र का हिस्सा है. 

मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, जसबीर सिंह चौहान ने 'आजतक' से बात करते हुए बताया कि यह एक ऐतिहासिक पल है जब चीतों को दोबारा भारत लाया जा रहा है. पहले एशियन चीतों को ही कूनो में बसाने की योजना थी लेकिन ईरान में उनकी सीमित संख्या को देखते हुए अफ्रीका के चीतों को अब कूनो लाया जा रहा है. जहां तक बात तेंदुओं की है तो अफ्रीका में भी चीते उनकी ही बिल्ली प्रजाति के अन्य जीवों जैसे तेंदुआ, अफ्रीकन शेर, हाइना के साथ रहते आए हैं इसलिए उनके टकराव होगा इसकी गुंजाइश कम है. 

कुनो में चीतों को तो अफ्रीका से लाकर बसाया जा रहा है लेकिन वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स अजय दुबे को चिंता इस बात की है कि कूनो नेशनल पार्क में काफी पहले एशियाटिक लायन को बसाने के लिए स्थानीय दो दर्जन गांवों के सहरिया आदिवासियों को विस्थापित किया गया उनका जीवन स्तर अभी तक सुधरा नहीं है. सहरिया जनजाति के लोग वनों से मिलने वाले उत्पादों से ही गुजर बसर करते आए हैं लेकिन अब विस्थापित होने के बाद उनके लिए रोजगार के इंतज़ाम किए जाएं जिससे नेशनल पार्क के सीमावर्ती क्षेत्रों में सहरिया आदिवासी समुदाय के लोग चीता परियोजना से लाभ ले सकें.

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