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साहित्य अकादमी के अनुवाद पुरस्कार 2019 घोषित, लेखकों ने उठाए सवाल

साहित्य अकादमी ने वर्ष 2019 के लिए अपने अनुवाद पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. पर इस बार के पुरस्कारों में काफी सवाल उठ रहे हैं.

साहित्य अकादमी का लोगो [फाइल फोटो ] साहित्य अकादमी का लोगो [फाइल फोटो ]

नई दिल्लीः साहित्य अकादमी ने वर्ष 2019 के लिए अपने अनुवाद पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. पर इस बार के पुरस्कारों में काफी सवाल उठ रहे हैं. कुछ लेखकों का कहना है कि इस बार ऐसी किताबों के अनुवादकों का चयन किया गया है, जो कई मामलों में मूल पुस्तक थीं ही नहीं. यहां तक कि एक भाषा में कई लेखकों का चयनित संकलन पर संकलनकर्ता का नाम तक नहीं है. इसी तरह से मराठी में नसीरूद्दीन शाह की जीवनी के अनुवाद के लिए जिस लेखक को पुरस्कार दिया गया उसने हिंदी से पुस्तक अनुवाद की, जबकि शाह की जीवनी अंग्रेजी में लिखी गई है.

हालांकि अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव की विज्ञप्ति के अनुसार के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में नई दिल्ली के रवींद्र भवन में हुई अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में 23 पुस्तकों को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2019 के लिए अनुमोदित किया गया. पुस्तकों का चयन नियमानुसार गठित संबंधित भाषाओं की त्रिसदस्यीय निर्णायक समिति की संस्तुतियों के आधार पर किया गया.

यह पुरस्कार घोषित साल के पहले के पांच वर्षों यानी 1 जनवरी, 2013 से 31 दिसंबर, 2017 के दौरान प्रकाशित अनुवाद पुस्तक के प्रथम संस्करण को प्रदान किए जाते हैं. घोषित पुस्तकों के अनुवादकों को पुरस्कार के रूप में 50,000/- रुपए की राशि और उत्कीर्ण ताम्रफलक इसी वर्ष आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे.
   
साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2019 के अंतर्गत असमिया में 'राजतरंगिणी' के अनुवादक नवकुमार हंदिकै को कल्हण के ऐतिहासिक इतिवृत्त राजतरंगिणी के संस्कृत से अनुवाद के लिए, बाङ्ला में 'भारतवर्ष' के अनुवादक तपन बंद्योपाध्याय को सीताकांत महापात्र के कविता संग्रह के ओड़िआ से अनुवाद के लिए, बोडो में 'अबंलावरिनि फाव' के अनुवादक गोपीनाथ ब्रह्म को एम. मुकुंदन के उपन्यास दैवत्तिंटे विकृतिकळ के मलयाळम् से अनुवाद के लिए, डोगरी में 'सतीसरै दी कहानी' के अनुवादक रत्न लाल बसोत्रा को चंद्रकांता के उपन्यास कथा सतीसर के हिंदी से अनुवाद के लिए.
   
अंग्रेज़ी में 'कुसुमाबले' की अनुवादक सुसैन डैनियल को देवनूर महादेव के इसी नाम से छपे उपन्यास के कन्नड़ से अनुवाद के लिए, गुजराती में 'अंतर्नाद' के अनुवादक     बकुला घासवाला  को मृणालिनी साराभाई की आत्मकथा 'द वॉइस ऑफ़ द हर्ट' के अंग्रेज़ी से अनुवाद के लिए, हिंदी में सरस्वतीचंद्र (खंड 1 और 4) (भाग- 1 और 2) के अनुवादक आलोक गुप्त को गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी के इसी नाम से छपे उपन्यास के गुजराती से अनुवाद के लिए, कश्मीरी में 'गोरा' के अनुवादक रतन लाल जौहर    को रवींद्रनाथ ठाकुर के इसी नाम से  छपे उपन्यास के बाङ्ला/उर्दू से अनुवाद के लिए.

कोंकणी में 'जिंदगीनामा-जिवो रुख' की अनुवादक जयंती नायक को कृष्णा सोबती के उपन्यास ज़िंदगीनामा के हिंदी से अनुवाद के लिए, मैथिली में 'अकाल में सारस' के लिए केदार कानन को केदारनाथ सिंह के इसी नाम से प्रकाशित कविता संग्रह के हिंदी से अनुवाद के लिए, मलयाळम् में 'श्रीरामचरितमानसम (तुलसीदासरामायनम)' के लिए सीजी राजगोपाल को तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस के हिंदी से अनुवाद के लिए, मणिपुरी में 'लालहौबा अमसुङ अतै शैरेङशिङ' के लिए ख. प्रकाश सिंह को क़ाज़ी नजरुल इस्लाम के कविता संग्रह विद्रोही ओ अन्यान्य कविता के बाङ्ला से अनुवाद के लिए.
 
मराठी में 'आणि मग एक दिवस...' के लिए सई परांजपे को नसीरुद्दीन शाह की आत्मकथा एंड देन वन डे के हिंदी से अनुवाद के लिए, नेपाली में 'बोज्यूले भनेको कथा' के लिए सचेन राई ‘दुमी’ को आर.के. नारायण के उपन्यास ग्रेंडमदर्स टेल के अंग्रेज़ी से अनुवाद के लिए, ओड़िआ में 'श्रेष्ठ हिंदी गल्प' के लिए अजय कुमार पट्ट्नायक को विभिन्न लेखकों के चयनित कहानी-संग्रह के हिंदी से अनुवाद के लिए.
 
पंजाबी में 'देश वंद दे लहू दे रंग' के लिए प्रेम प्रकाश को सआदत हसन मंटो के चयनित कहानियों के उर्दू से अनुवाद पर, राजस्थानी में 'चारु वसंता' के लिए देव कोठारी को नाडोज ह.प. नागराजय्या के इसी नाम से छपे कविता संकलन के कन्नड से अनुवाद पर, संस्कृत में  'रश्मिरथी' के लिए अनुवादक प्रेमशंकर शर्मा को रामधारी सिंह दिनकर के इसी नाम से छपे हिंदी कविता संग्रह के अनुवाद पर, संताली में 'आईकाउ' के लिए खेरवाल सोरेन को दिव्येंदु पालित के उपन्यास अनुभव के बाङ्ला से अनुवाद पर, सिंधी में 'मीठो पानी खारो पानी'  के लिए ढोलन राही को जया जादवानी के उपन्यास मीठा पानी खारा पानी के हिंदी से अनुवाद पर
 
तमिऴ में 'निलम पूत्तु मलर्दं नाल' के लिए केवी जयश्री को मनोज कुरूर के उपन्यास निलम पूत्तु मलन्र्न नाल के मळयालम् से अनुवाद पर, तेलुगु में 'ओका हिजड़ा आत्मकथा' के लिए पी सत्यवती को ए. रेवती की आत्मकथा द ट्रुथ अबाउट मी: ए हिजड़ा लाइफ़ स्टोरी के अंग्रेजी से अनुवाद पर, उर्दू में 'मोर पंख' के लिए असलम मिर्ज़ा को प्रशांत असनारे को कविता संग्रह मीच माझा मोर के मराठी से अनुवाद पर. अकादमी कन्नड भाषा का पुरस्कार बाद में घोषित करेगी.

साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2019 निर्णायक समिति के सदस्य, जिनकी संस्तुतियों के आधार पर अनुवाद पुरस्कार घोषित किए गए निम्नलिखित हैं. असमिया के लिए डॉ अनिल भराली, दो पूर्ण भट्टाचार्य, प्रो राजेन शइकीया, मराठी के लिए भारत सासणे, जयंत पवार, निशिकांत ठकार, बाङ्ला के लिए अमिताभ देव चौधुरी, कमल चक्रवर्ती, शुभ्र बंद्योपाध्याय, नेपाली के लिए अप्सरा दहाल शर्मा, नव सापकोटा, प्रेम प्रधान, बोडो के लिए जितुमनी बसुमतारी, डॉ रोईरूब ब्रह्म, डॉ स्वर्ण प्रभा चैनारी, ओड़िआ के लिए अमियबाला पटनायक, रवींद्र कुमार प्रहराज, डॉ सूर्यमणि खूंटिया, डोगरी के लिए चमन अरोड़ा, प्रो ओम गोस्वामी,  राज कुमार शर्मा 'राज राही' सदस्य थे.

पंजाबी के लिए निर्णायक मंडल में बलबीर माधोपुरी, चरणजीत भुल्लर, प्रो. जोगा सिंह, अंग्रेज़ी के लिए डॉ सी टी इंद्रा, प्रो. प्रमोद के. नायर, डॉ रीता कोठारी; राजस्थानी के लिए डॉ मदन सैनी, विनीता शर्मा, प्रो. कल्याण सिंह शेखावत; गुजराती के लिए डॉ चंद्रकांत टोपीवाला, नीला शाह, सुषमा लेले; संस्कृत के लिए डॉ एच आर विश्वास, प्रो. उमा शंकर शर्मा ‘ऋषि’,  डॉ राजलक्ष्मी वर्मा; हिंदी के लिए डॉ मालचंद तिवाड़ी, डॉ लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, प्रो. रामेश्वर मिश्र; संताली के लिए चैतन्य प्रसाद माझी, कालीचरण हेम्ब्रम, लक्ष्मण बास्के; कश्मीरी के लिए डॉ रफ़ीक़ मसूदी, सतीश विमल, शाहिद बड़गामी; सिंधी के लिए गोपी कमल, डॉ हूंदराज बलवाणी, हीरो शेवकाणी सदस्य थे.

कोंकणी के लिए नागेश करमाली, गावडे पांडुरंग काशीनाथ, डॉ तानाजी हलरंकर; तमिऴ के लिए आर. वेंकटेश, डॉ प्रेमा नंदकुमार, एस. देवादोस; मैथिली के लिए आशा मिश्रा, बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ शिव प्रसाद यादव; तेलुगु के लिए आर. शांता सुंदरी, स्वाती श्रीपाद, डॉ वेन्ना वल्लभराव; मलयाळम् के लिए प्रो. एस. आर. जयश्री, प्रो. पी. माधवन पिल्लै, डॉ पीके. चंद्रन; उर्दू के लिए आज़िम गुरविंदर सिंह कोहली, फे. शीन एजाज़, डॉ मनाज़िर आशिक़ हरगानवी; मणिपुरी के लिए एल. बीरेंद्रकुमार शर्मा, प्रो. नाओरेम खगेंद्र सिंह,  सोरोक्खैबम गंभिनी देवी शामिल हैं.

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