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प्रेम कहानीः वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है

पिछले एक साल में ये भी तुमसे नहीं पूछा कि मेरी याद इतने दिनों बाद क्यूं आयी? या अब क्यूं वापस आयी हो?

प्रतीकात्मक चित्र [ Getty Images ] प्रतीकात्मक चित्र [ Getty Images ]

तुम्हारा फोन आने के बाद जैसे चैन ही खत्म हो गया. इसलिये नहीं कि तुमने फोन किया. फोन तो तुम्हारा लगातार आता ही रहता है. लंबी-लंबी बात भी तुम करती हो. हमेशा की तरह मैं चुपचाप सुनता हूं. 20 साल पहले भी यही होता था. और पिछले एक साल से यही हो रहा है. हमेशा ही मैं तुम्हारे कंट्रोल में रहा. जो तुमने कहा वो किया. जैसे चाहा वैसे ज़िंदगी जी. इस रिश्ते में मैंने कभी खुद को ऊपर रखा ही नहीं था.
तुम्हें देखते और सुनते हुए मैं किसी ख्वाबगाह में होता था. तुम्हारी आवाज़ जैसे कभी मैं भूला ही नहीं था. उस दिन भी तो एक ही बार में पहचान गया था, जब 20 साल बाद तुमने फोन किया था. ये अलग बात है कि शॉक में कुछ सेकंड के लिये खामोश ही रह गया था. लेकिन तुम्हारे सामने कभी बोल भी कहां पाया था मैं.  
पिछले एक साल में ये भी तुमसे नहीं पूछा कि मेरी याद इतने दिनों बाद क्यूं आयी? या अब क्यूं वापस आयी हो? इसी तरह इस बातचीत में तुमने अपने और अपने पति के बीच किसी दिक्कत को ज़ाहिर भी नहीं किया. बल्कि तुमने तो हमेशा यही कहा कि तुम्हारा रिश्ता अपने पति से बहुत बेहतर है. तुम इस रिश्ते में खुश भी हो.  
मैंने भी तुमसे कभी नहीं कहा कि इस एक फोन कॉल का कितना इंतज़ार किया है मैंने. दरअसल तुम्हारा कितना इंतज़ार किया है मैंने! जब तुम मुझसे कह कर गई थीं कि अब हमारा साथ रहना मुमकिन नहीं है. वो दिन मैं आज तक नहीं भूला. वो तारीख 21 साल बाद भी मेरे दिमाग पर चस्पां है. तुम्हारी आवाज मेरे कानों में वैसे ही सुनाई देती है, जब तुमने कहा था कि हमारा मिलना यहीं तक था. इससे आगे का सफर मुमकिन नहीं है.
नौकरी थी मेरे पास. ये अलग बात है कि बहुत फैंसी नहीं थी. लेकिन गुज़ारा तो चल ही जाता था. रिश्ता लेकर मैं तुम्हारे माता-पिता के पास जा सकता था. कह सकता था उनसे कि आपकी बेटी से प्यार करता हूं. मुझे उससे शादी करनी है. नहीं जानता कि वो मानते या नहीं मानते. लेकिन मैं तुम्हें लेकर भाग जाने की हिम्मत रखता था. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मैं शादी करने के लिये भी तैयार था. पर तुम्हारे माता-पिता की ख्वाहिश बड़ा घर थी. तुमने खुद कहा भी था.

जब तुम्हारी शादी हुई तब तुम्हारी ससुराल के बारे में कुछ नहीं जानता था, न ही यह जानता था कि किस घर में तुम्हारी शादी हुई है. आज जानता हूं. बिज़नेसमैन परिवार है. बहुत बड़ा घर है.
तुम घबरा रही थीं कि तुम्हारा परिवार हमारी शादी को मंज़ूर नहीं करेगा. तुम बगावत के लिये भी तैयार थीं लेकिन एक दिन अचानक तुमने फैसला कर लिया मेरी ज़िंदगी से दूर जाने का. तुमने मुझसे कभी ना मिलने का वादा भी ले लिया. मैं बेवकूफ कुछ कह नहीं पाया तुमसे. हमेशा की तरह तुम्हारी हां में हां मिला दी...और भूलने की कोशिश में जुट गया.
हालांकि, इतना आसान भी नहीं था भूलना. तुम्हें भूलने के लिये एक नयीं ज़िंदगी की ज़रूरत थी. क्या इलज़ाम देता तुमको. साहिर के लफ्ज़ो में कहूं तो-
तुम मेरे लिये अब कोई इल्ज़ाम ना ढूढों
चाहा था तुम्हें एक यही इल्ज़ाम बहुत है
एक दिन सड़क पर चक्कर खाकर गिरा. डॉक्टर को दिखाया तो ब्लड प्रेशर बेतहाशा बढ़ा हुआ था. डॉक्टर ने पूछा कि जवान लड़के हो क्या बात है. क्या हुआ है. कोई लड़की है? डॉक्टर से क्या कहता, फिर साहिर ही याद आये..
वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सिर जाये तो अच्छा...
चुपचाप दवा लेकर चला आया और हमेशा के लिये शहर छोड़ दिया. कभी ना लौटने के लिये. जब लौटा तो तुम जा चुकी थीं.
...इसके बाद थोड़ा वक्त लगा, पर धीरे-धीरे मेरी ज़िंदगी भी पटरी पर आ ही गयी. शादी हो गयी. एक बेटी है. खुश हूं. ये अलग बात है कि कभी तुम्हें भूल नहीं पाया.
फिर साल भर पहले तुम्हारा फोन आ गया. हैरान था कि तुम्हारी बातों में कोई झिझक या संकोच नहीं था. आवाज़ में वही अधिकार था जो तब था जब हम हम जीने मरने के लिये तैयार थे. हां, इससे याद आया कि मैंने तुम्हारे प्यार में या जुदाई में मरने के बारे में भी सोचा था. जीना नहीं चाहता था. लेकिन मरने का कोई इरादा नहीं था. बस एक ख्याल आया था, उसे तुरंत ही निकाल कर बाहर कर दिया था.
तुमसे नफरत थी. बहुत ज़्यादा नफरत थी. बहुत ख्याल आते थे. तुम्हें कत्ल करने का भी ख्याल आया था. लेकिन उसे भी तुरंत दिमाग निकाल दिया था. शायद ही ऐसा कोई ख्याल बचा होगा जो कोई प्रेमी अपनी बेवफा प्रेमिका की जुदाई के गम में ना सोचता होगा. तुम्हारे पति को कत्ल करने का ख्याल भी आया था. ये भी सोचता था कि अगर उसकी अचानक मौत हो जाये. तो फिर मैं तुमसे दूसरी शादी करके हीरो बन जाऊंगा. आशिक बहुत सेल्फिश होते हैं. ये भी तुमने ही सिखाया.
ज़िंदगी भी कितनी अजीब है. तिकड़म में लगी रहती है. बेहद मुश्किल था इन सब बेहूदा ख्यालों को अपने दिमाग से निकाल कर ज़िंदगी को नये सिर से खड़ा करना. लेकिन किया. अपनी ज़िद से. तुमसे बदला लेने के लिये. कुछ बनना चाहता था. कर लिया. आज ये बताना ज़रूरी नहीं है कि मैं कौन हूं क्या हूं. तुम्हें मेरा नंबर आसानी से मिल गया था. ये इसलिये क्योंकि मैं अब एक मशहूर इनसान हूं.
मैं हैरान हूं. खुद से हैरान हूं. क्या मैंने तुम्हें माफ कर दिया. मैं क्यूं तुमसे ऐसे बात करता हूं जैसे हमारे बीच कुछ खत्म ही नहीं हुआ था. क्यूं तुम मुझे अपने घर की हर बात बताती हो. क्यूं अपने पति की तमाम शिकायतें मुझसे करती हो. क्यूं बच्चों के फ्यूचर की बातें मुझसे डिस्कस करती हो. क्यूं तुम ये जानना चाहती हो कि मेरी दिनचर्या क्या रहती है. हर रोज़ मेरे पल पल का हिसाब तुम रखना चाहती हो. मेरी पत्नी क्या करती है. तुम उसके बारे में जानना चाहती हो.
क्यूं. ये बातें मैं आज तक समझ नहीं पाया. तुमने मुझसे बहुत कुछ कहा है. लेकिन एक बात आज तक नहीं कही. इस बात को मैं कबसे सुनना चाहता हूं. जानना चाहता हूं कि तुम क्या सोचती हो. आई लव यू... तुम मुझसे हर बातचीत में कई बार कहती हो. मैं चुपचाप सुनता रहता हूं. लेकिन वो नहीं कहतीं जो मैं सुनना चाहता हूं. एक वाक्य 21 साल से सुनने के लिये मैं तरस रहा हूं.
आई एम सॉरी. ये वाक्य ना तुमने उस दिन जाने से पहले कहा था, ना अब जब हम बात करने लगे हैं, तब कहा.
लेकिन मेरी आज की बैचेनी इस वाक्य के लिये नहीं है. आज तुम शहर में हो. मुझसे मिलना चाहती हो. तुमने मुझे फोन किया. मुझे बुलाया है. ये सारी हलचल तुम्हारे इंतज़ार की है. इतने साल के बाद तुमसे मिलना कैसा होगा. कैसे रियेक्ट करूंगा मैं. क्या तुम्हें गले लगाऊंगा. कैसे पुकारुंगा. क्या उसी नाम से जो सिर्फ मेरा था. जो मैंने बरसों से तुमसे नहीं कहा है. तुम्हारे बार-बार कहने के बावजूद. क्या आज भी मैं तुमसे उतना ही प्यार करता हूं जितना उस वक्त करता था. तुम मेरे लिये क्या हो. इस सवाल का जवाब मुझे जानना बेहद ज़रूरी है चीकू. अब से एक घंटे के बाद मेरी तुमसे मुलाकात होनी है. मैंने अपना फोन निकाला और एक मैसेज टाइप किया. और वो लिखने लगा जिसे सुनने के लिये मेरे कान तरस रहे थे.
आई एम सॉरी... एक ज़रूरी काम आ गया है, इसलिये आज मिलना नहीं हो पायेगा. फिर कभी... चीयर्स.
मैसेज भेज कर मैंने अपना फोन साइलेंट मोड पर कर दिया.  

 

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