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वतन के नाम पर जीना, वतन के नाम मर जाना, शहादत से बड़ी कोई इबादत हो नहीं सकतीः कविता तिवारी

वतन के नाम पर जीना, वतन के नाम मर जाना, शहादत से बड़ी कोई इबादत हो नहीं सकतीः कविता तिवारी

जिसे सींचा लहू से है वह खो नहीं सकती, सियासत चाहकर भी विष बो नहीं सकती, वतन के नाम पर जीना, वतन के नाम मर जाना, शहादत से बड़ी कोई इबादत हो नहीं सकती... सीमा पर देश के तनावपूर्ण माहौल के बीच  कवयित्री कविता तिवारी का देशभक्ति में पगा और जवानों, शहीदों के सम्मान में पढ़ा गया गीत.

Jise seencha se wah kho nahi sakti, siyasat chah kar bhi vish beej bo nahi sakati, a patriotic poem by Kavita Tiwari

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