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मिल जुल कर आवाज लगाएं दशहतगर्दी मुर्दाबाद, हिंदू-मुस्लिम जिंदाबादः हाशिम फिरोजाबादी

मिल जुल कर आवाज लगाएं दशहतगर्दी मुर्दाबाद, हिंदू-मुस्लिम जिंदाबादः हाशिम फिरोजाबादी

मिल जुल कर आवाज लगाएं दशहतगर्दी मुर्दाबाद, हिंदू-मुस्लिम जिंदाबाद, वतन की आन है सेना, वतन की जान है सेना, वतन की फख्र है सेना....वतन के वास्ते फिर कुर्बान है सेना....भारतीय सेना के जिंदाबाद होने और देश की मजहबी एकता को उजागर करती हाशिम फिरोजाबादी की शायरी

Vatan ki aan hai sena, Vatan ki jaan hai sena..Shayar Hashim Firozabadi praises Indian Army and religious harmony of India, a Urdu poem

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