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No Stags Allowed Review: 'कभी-कभी बुरा होना ही ठीक है', सिखाती है रिश्तों के ताने बाने की ये कहानी

नॉवेल को पढ़ते हुए महसूस होता है कि बदलते जमाने में कार्पोरेट या निजी कंप‍नियों की नौकरियों और बदले शहरी रंग-ढंग ने एक चीज जिसे ब‍िल्कुल नहीं बदला है, वो है प्रेम. कहानी का शीर्षक (No Stags Allowed-कुंआरों के लिए अनुमत‍ि नहीं) कनॉट प्लेस की पब या डिस्को थेक की कल्चर का एक ह‍िस्सा भर नहीं बल्क‍ि पूरी कहानी का भी एक हिस्सा है.

No Stags Allowed, Novel Cover page No Stags Allowed, Novel Cover page

ऐसा अक्सर होता है कि हम और आप अपनी कहानी को जीते हुए उसे चाहकर भी नया मोड़ नहीं दे पाते. हम जब अपने आसपास के क‍िरदारों के साथ जी रहे होते हैं तो उनसे पूर्ण संवाद में होते हैं. उनसे हर तरह से कनविंस्ड होते हैं, उनसे हमारे इमोशंस इस कदर जुड़ जाते हैं कि हम चाहकर भी कड़े फैसले नहीं ले पाते. कई बार सबकुछ शीशे की तरह साफ होते हुए भी कुछ फैसले हम अपने दिल और जज्बातों की हिफाजत के लिए ले रहे होते हैं. उसमें हम सही या गलत नहीं देख पाते. हमारे हिस्से की जो कहानी हमसे जुड़े लोगों को साफ नजर आ रही होती है, वो हमें ही नजर आना बंद हो जाती है.
 
युवा लेखक रविराज वर्मा की डेब्यू नॉवेल "नो स्टैग्स एलाउड" के नायक रजत के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. पहली बार किसी लड़की से इमोशनल तौर पर जुड़ा 28-29 साल का युवा रजत तमाम उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए दूसरों के साथ साथ खुद के सपनों, जज्बातों की हिफाजत में भी लगा नजर आता है.  

नॉवेल को पढ़ते हुए महसूस होता है कि बदलते जमाने में कार्पोरेट या निजी कंप‍नियों की नौकरियों और बदले शहरी रंग-ढंग ने एक चीज जिसे ब‍िल्कुल नहीं बदला है, वो है प्रेम. कहानी का शीर्षक (No Stags Allowed-कुंआरों के लिए अनुमत‍ि नहीं) कनॉट प्लेस की पब या डिस्को थेक की कल्चर का एक ह‍िस्सा भर नहीं बल्क‍ि पूरी कहानी का भी एक हिस्सा है. काम और सपनों की जेद्दोजेहद के बीच परिवार और पूरा समाज कैसे युवाओं पर शादी का प्रेशर बनाता है. रजत भी उससे अछूता नहीं है. उत्तर प्रदेश के बहराइच में रह रहे रजत के पेरेंट्स का भी एक ही कंसर्न है कि वो अब सेटल हो जाए. उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां लड़कों के सेटल होने का मतलब आज भी नौकरी और शादी ही माना जाता है. ऐसे में रजत अपने लिए नई राह तलाशने में जुटा है. 

कहानी कुछ यूं है कि छोटे शहर से बड़े सपने लेकर मेट्रो सिटी में आया रजत कुछ ही दिनों में साक्षी नाम की लड़की के साथ भावनात्मक रिश्ते से जुड़ जाता है. यह भावनात्मक रिश्ता धीरे-धीरे उसके दिल की गहराइयों तक जगह बनाने लगता है. उधर, साक्षी की तरफ से कुछ ऐसा ही सिग्नल मिलता है. लेकिन जल्द ही उसे पता चल जाता है कि साक्षी का एक अतीत भी है जो उसके नये नये पनपे प्यार के अंकुर को वहीं कुचल देता है. पहली बार में ही चोट खाकर रजत संभल पाता, इससे पहले साक्षी फिर से उसकी ओर पलट जाती है. अब रजत को मानो फिर से नया जीवन मिल जाता है. उसके टूटते दिल को फिर से थामने के लिए बढ़ा साक्षी का हाथ उसके प्रेम की नाव में पतवार का काम करता है. 

लेकिन कहते हैं न कि प्रेम की नाव में तीन लोग एक साथ सवारी नहीं कर सकते. रजत और साक्षी की कहानी में यही हो रहा है. जिस तरह रजत के लिए साक्षी का होना उसकी कमजोरी बन गया है, कहीं न कहीं साक्षी के लिए उसका पूर्व प्रेमी भी उसकी कमजोरी है जिसे वो पूरी तरह दिल से निकाल नहीं पा रही. तभी फिर से साक्षी रजत से शादी का प्लान बनाने तक बात ले जाती है, लेकिन पुराना प्रेमी जैसे सामने आ जाता है, साक्षी उसके लिए फिर से सख्त फैसला नहीं ले पाती. रजत पर फिर से मानो आसमान टूट पड़ता है. भावनाओं के ज्वार-भाटे में डूबते उतराते रजत की जिंदगी में अंधेरा छा जाता है. लेकिन साक्षी को परेशानी में फंसा जानकर वो फिर भागा-भागा उस तक पहुंच जाता है.

प्रेमी से ठोकर खाकर अब एक बार फिर वो फिर इस वादे के साथ रजत का हाथ पकड़ती है कि वो अब कभी उसे नहीं छोड़ेगी लेकिन फिर... कहानी में साफ नजर आ रहा है कि सिर्फ रजत ही साक्षी को दिल में बसाकर अपने जज्बातों और दिल की हिफाजत नहीं कर रहा बल्क‍ि साक्षी भी कहीं न कहीं रजत जैसी ही स्थ‍िति में है. वो भी अपने पुराने प्रेमी के तमाम तानों, उलाहनों और बुरे बर्ताव को सहकर भी उसके लिए अपने इमोशंस से किनारा नहीं कर पाती. उसका पूर्व प्रेमी उसे अक्सर ही चरित्रहीनता के तमगे पकड़ाकर छोड़कर चला जाता है, वहीं रजत में उसे उसके उलट ऐसा साथी नजर आता है जो औरतों की इज्जत करता है, उसका सम्मान बनावटी नहीं है, बल्क‍ि यह रजत की जिंदगी की दूसरी घटनाओं में भी नजर आता है. एक बार जब उसका बेस्ट फ्रेंड निक्की साक्षी के लिए अपशब्द बोलता है, रजत उसे भी बुरा-भला सुनाकर रिश्ता लगभग खत्म कर देता है. 

रजत नये जमाने की प्रगतिशील सोच का लड़का है जो अपने ऑफ‍िस की एक पार्टी में पब्ल‍िकली यह बता देता है कि वो नास्त‍िक है. वो ऑफ‍िस में दीवाली सेलिब्रेशन की गैद‍रिंग में एक प्रोग्राम का हिस्सा बनता है. जहां उससे सवाल पूछा जाता है कि अगर भगवान प्रकट हुए तो वो क्या वरदान मांगेगा, इसके जवाब में वो कहता है कि वो भगवान पर यकीन नहीं करता. 'किसी ने आज तक गॉड को नहीं देखा. यह सवाल ही काल्पनिक है. अगर फिर भी कोई गॉड सामने आ भी गया तो वो पूछेगा कि आप कैसे ईश्वर हैं, कैसे छोटे बच्चों को भूख से मरता हुआ देखते हैं. कैसे छोटी बच्च‍ियों का रेप करके मार दिया जाता है और कोई इंसाफ नहीं होता.' इस जवाब से वो प्रतियोग‍िता भले ही नहीं जीत पाता, लेकिन इसे अपनी सोच के प्रति ईमानदारी मानकर वो अपने जवाब से संतुष्ट हो जाता है. शायद रजत की यही नेकद‍िली हर बार साक्षी को उसकी तरफ खींचकर उसके करीब ले आती है. लेकिन दूसरा बड़ा सच यह है कि साक्षी और रजत के इस प्यार में हर बार कोई सबसे ज्यादा टूटता है, तो वो है रजत... 

आख‍िर में एक दिन रजत को जिंदगी ऐसे मोड़ पर ले जाती है जहां से वो अपनी ही कहानी को स्पष्ट देख पाता है. एक घटना के बाद हर किरदार के साथ वो जस्ट‍िस में जुट जाता है, फिर वो चाहे साक्षी हो, उसका दोस्त हो, मां हो या खुद वो.... बाकी पूरी कहानी में लगातार कई ट्विस्ट बार-बार आते हैं जो आपको अंत तक बांधे रहते हैं. कहानी की शुरुआत रजत की शादी के ठीक एक दिन पहले की रात से की गई है. जब रजत का घर रिश्तेदारों से भरा है. रजत के कजिन और र‍िश्तेदार सब जश्न में डूबे हैं तभी घर में आया एक कुरियर रजत के दिल में तूफान उठा देता है. 

वो किसी भी तरह अब घर से निकलकर अपनी भावी जीवनसाथी अंजलि से मिलना चाहता है. अपने बेस्ट फ्रेंड निक्की को अपने बेड पर अपनी जगह सुलाकर वो अंजलि के घर पहुंचता है और नाटकीय घटनाक्रम में अंजलि के साथ उसके स्टोर रूम में लॉक हो जाता है. उसी स्टोर रूम में रजत अपनी पूरी कहानी बता रहा है जिस पर पूरी नॉवेल आधारित है. यहां वो पूरी रात अंजलि को हरेक बात और अपना हरेक बीता पल हूबहू बताने में लगा है. उसने कब-कब साक्षी के साथ भावुक पल जिया. कहानी पर्त दर पर्त जिस तरह खुलती है, वो पाठक को भी बांधे रखती है. पाठक के मन में बार बार यह सवाल आता है कि यह पूरी कहानी सुनकर क्या अंजलि किसी दूसरी लड़की के प्रेम में डूबे रहे रजत को स्वीकार कर लेगी. सबेरा होते होते रजत बहुत कुछ बयां कर चुका होता है. जैसे तैसे वो अपने घर पहुंचता है लेकिन तभी अंजलि अपनी कार लेकर उसके घर पहुंच जाती है और रजत से अपने साथ जाने को कहती है. यही वो पल है जब अंजलि रजत को लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचती है जहां साक्षी रजत का इंतजार कर रही है. 

रजत का संक्ष‍िप्त परिचय
रजत का संक्ष‍िप्त परिचय

कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. रजत एक बार फिर से साक्षी को अपने सामने देखता है. एक तरफ अंजलि है, उसका दोस्त निक्की है, शादी का माहौल है, तो वहीं दूसरी तरफ उसके लिए दिल्ली से बहराइच पहुंची वो लड़की है जो उसे अपनाना चाहती है. अब रजत क्या करेगा. वो साक्षी के लिए अपनी मोहब्बत को कैसे भुला सकता है, वहीं अंजलि के मन में क्या चल रहा है, क्या वो अपने होने वाले पति को साक्षी को सौंपकर वापस लौट जाएगी. क्या वो रजत की जिंदगी में जाने के लिए तैयार है, क्या साक्षी रजत को ब्लैकमेल कर रही है, ऐसे तमाम सवालों के जवाबों के लिए आपको नो स्टैग्स एलाउड को पढ़ना होगा. 

नॉवेल को पढ़ने के बाद मैं दावे से यह कह सकती हूं इस कहानी का तानाबाना जिस तरह बुना गया है, वो सिर्फ नई पीढ़ी की ही कहानी नहीं है. इसे पढ़ते हुए आप इन किरदारों को खुद में या आसपास महसूस किए बिना नहीं रह सकते. फिर चाहे वो रजत हो या उसका बेस्ट फ्रेंड निक्की या साक्षी की दोस्त संध्या, रजत या साक्षी के पैरेंट्स या कहानी में थोड़ी ही देर के लिए आए ऑफिस के कुछ किरदार... हर किरदार आपको अपने आसपास का लगेगा. पूरी कहानी को कुछ इस तरह बुना गया है कि एक पाठक के तौर पर आप कभी खुद को रजत के करीब पाएंगे तो कभी साक्षी से खुद को जुड़ा हुआ देखेंगे.

30 चैप्टर में संजोई गई यह कहानी हर मोड़ पर आपके जेहन में तमाम सवाल छोड़ेगी, फिर अगले ही पल उनके जवाब भी देती चलेगी. इस तरह कहानी किसी फिल्म की तरह बहुत रोमांचक ढंग से आगे बढ़ती है. अगर लेखन की बात करें तो कहानी में प्रयोग की गई  शब्दावली से लेखक रविराज ने लेखन को कई जगइ ताजातरीन फ्लेवर दिए हैं. कई वाक्यों में मन के भीतर हो रहे बदलाव को हार्मोंस से साथ जोड़कर कहा गया है, ये नई पीढ़ी की अभ‍िव्यक्त‍ि के अंदाज से सीधे जुड़ते हैं. कहानी में बताए गए ठ‍िकाने, जगहों के नाम कहानी को वास्तविकता से सीधे जोड़ते हैं. 

लेखक : रविराज वर्मा
प्रकाशक का नाम : RedGrab Books
आई एस बी एन नंबर : 978-9390944-18-7
पुस्तक की कीमत : 225/-
कहां मिलेगी:
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लेखक का प‍रिचय 

लेखक रविराज वर्मा (Raviraj Verma) पेशे से पत्रकार हैं. वो बीते 5 वर्षों से मीडिया जगत से जुड़े हैं. रविराज का जन्‍म और पढ़ाई लिखाई उत्‍तर प्रदेश के कानपुर शहर से हुई है. इससे पहले तक उन्‍होंने कई ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म्स पर लिखने का काम किया है जिसके लिए उन्‍हें सराहा जाता रहा है, और No Stags Allowed उनकी पहली पहली नॉवेल है. रविराज अमर उजाला और Indian Express ग्रुप के साथ काम कर चुके हैं और वर्तमान में AajTak मीडिया समूह में सीनियर सब-एडिटर हैं.

 

 

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