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लुईस ग्लिक जैसी कवयित्री के नोबेल पुरस्कार जीतने के मायने

साहित्‍य के सर्वोच्‍च पुरस्‍कार के केंद्र में एक अरसे बाद कोई कवयित्री थी, वह भी अमेरिकी कवयित्री लुईस ग्‍लिक. ग्‍लिक के पुरस्‍कृत होने के मायने शब्दों की दुनिया के लिए क्या है? पढ़ें यह विश्लेषण

लुईस ग्लिक, साहित्य की नोबेल पुरस्कार विजेता 2020 लुईस ग्लिक, साहित्य की नोबेल पुरस्कार विजेता 2020

जब दुनिया कोरोना के कारण तबाही की कगार पर है, पूरी मनुष्यता इस व्याधि से कराह रही है, तब साहित्य की दुनिया में एक स्त्री कवि को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया. हाल के वर्षों में जिस तरह स्त्री प्रजाति अपने विमर्श और समस्याओं के साथ सामने आई है, उसकी अभिव्यक्ति उत्‍तरोत्‍तर मुखर और प्रखर हुई है, ऐसे दौर में एक कवयित्री का पुरस्कृत होना काफी मायने रखता है. किन्तु क्या लुईस ग्लिक की आवाज़ में आधी आबादी की आवाज़ सुन पड़ती है? क्या पौरुषेय सत्ता वाले समाजों में आज भी स्त्री दोयम दर्जे की नागरिक नहीं है? या स्त्री होने के कारण वह प्रताड़ना का शिकार नहीं बनती? भारत जैसे मुल्क में या पिछड़े देशों में जहां संस्कृति के ताने-बाने अधिक मजबूत हैं, वहां स्त्रियों की दशा बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे वक्त एक कवयित्री को स्वीडिश अकादेमी द्वारा पुरस्कृत किया जाना इस बात का सबूत है कि कविता में स्त्री की स्‍थिति न केवल मजूबत हुई है बल्कि आधुनिक विश्व कविता में स्त्री आवाजें उत्तरोत्तर मुखर हो रही हैं.

अमेरिका में भी इस बात को लेकर काफी खुशी है कि 27 वर्षों बाद यह पुरस्कार किसी अमेरिकी रचनाकार को मिला तो वह भी एक स्त्री को ही. वजह इससे पहले लेखिका टोनी मॉरिसन को 1993 में नोबेल पुरस्कार मिला था. मॉरिसन उपन्यास विधा की धुरंधर थीं और अफ्रीकन अमेरिकन साहित्य का एक जाना माना नाम थी. बिलव्ड, सांग ऑफ सोलोमन और द ब्लूएस्ट आई जैसे उनके उपन्यासों की पूरी दुनिया में धूम थी. इस कदर कि 1988 में गल्प का पुलित्ज़र पुरस्कार उन्हें मिल चुका था. नोबेल पुरस्कार में ज्या‍दातर औपन्यासिक और गद्यकृतियों का बोलबाला रहा है. तोमास त्रांसतोमर के 2011 में पुरस्कृत होने के 9 वर्ष बाद कविता का फिर नंबर आया है. इसलिए लुईस इलिसाबेथ ग्लिक को सम्मानित किए जाने की घोषणा की पूरे विश्व में अनुकूल प्रतिक्रिया हुई है.  

सार्वभौम संवेदना
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लुईस ग्लिक की कविताएं सार्वभौम संवेदना और संबंधों के गहन तानेबाने का निर्वचन हैं. उनके गीतात्म‍क आवेग को लक्ष्य करते हुए ही कवि राबर्ट हास ने उन्हें कुशल गीतकार कह कर सराहा है. उनके अब तक बारह कविता संग्रह छप चुके हैं. इसके अलावा कुछ निबंध संग्रह भी छपे हैं. नोबेल से पहले भी उन्हें राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय पहचान के कई महत्त्वपूर्ण पुरस्कार मिल चुके हैं. उनके यहां जीवन, मृत्यु, संबंधहीनता और हताशा की आवाजें ज्यादा मुखर दिखती हैं. ग्लिक अस्तित्ववादी दर्शन से प्रेरित और प्रभावित लगती हैं. माना जाता है कि उनकी कविता में जो हताशा व भय की लकीरें दिखती हैं, उनके पीछे बचपन में हुई उनकी बीमारी एनारेक्सिया नर्वोसा एक खास वजह रही है. उनकी एक कविता में मनोचिकित्सक से इलाज कराने का जिक्र भी है. जाहिर है कि इस बीमारी ने उन्हें काफी पस्त कर दिया था, जिससे उबरने में उन्हें पांच साल का वक्त लगा. उनके इस मनोभाव की व्यं‍जना उनकी कविता 'अविश्वसनीय वक्ता 'The Untrustworthy Speaker' में देखिए-

मेरी बात मत सुनना; क्योंकि मेरा दिल टूट चुका है.
मैं कुछ भी वस्तुनिष्ठ रूप से नहीं देख पाती

मैं खुद को जानती हूं; इसलिए मैंने मनोचिकित्सक की तरह सुनना सीख लिया है.
जब मैं भावुकता में बोलती हूं
तब मैं सबसे कम भरोसेमंद रह जाती हूं.

दरअसल, यह बहुत दुख की बात है, कि जीवन भर, मेरे ज्ञान,
भाषाई ताकत और अंतर्दृष्टि के लिए मुझे सराहना मिली है,
पर अंतत: वे सब व्यर्थ गए...

जीवन और जीविका
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कवयित्री लुईस ग्लिक का जन्म 1943 में न्यूयॉर्क सिटी में हुआ था. लांग आईलैंड पर उनका बचपन बीता. वहीं पली बढ़ीं. उनके पिताजी व्यवसायी व मां गृहिणी थीं. मां रूसी यहूदी थीं, तो उनके पैतृक बाबा हंगरी यहूदी जो उनके पिता के पैदा होने के पहले यूनाइटेड स्टेट्स आ गए थे. वह दो बहनों में बड़ी हैं. उनके मां-पिता उन्हें ग्रीक माइथोलोजी व 'जॉन ऑफ आर्क' की क्लासिक कहानियां सुनाया करते. यही वजह थी कि शुरुआती वय में ही ग्लिक ने कविताएं लिखनी शुरू कर दीं. उन्होंने बचपन में बीमारी झेली जिससे नियमित पढ़ाई बाधित रही. उनकी एक बहन की मृत्यु उनके पैदा होने के पहले ही हो चुकी थी. अपनी बीमारी व उस बहन की मृत्‍यु की छायाएं उनकी कविताओं में आती हैं.

वह पूर्णकालिक विद्यार्थी के रूप में भले ही नहीं पढ़ पाईं, पर कोलंबिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ जनरल स्टडीज की कविता कार्यशाला से जुड़ीं. यह गैरपरंपरागत छात्रों को डिग्री मुहैया कराता है. पर किन्हीं कारणों से उन्हें बिना डिग्री लिए कोलंबिया छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने कुछ दिन सेक्रेटेरियल कार्य किए. 1967 में उनका विवाह चार्ल्स हर्त्ज़ से हुआ. पर शीघ्र ही तलाक हो गया. 1966 में उनका पहला संग्रह 'फर्स्टबोर्न' छपा और बाजार में आते ही चर्चा का विषय बन गया. इस एक किताब से ग्लिक अमेरिका की समकालीन चुनिंदा कवयित्रियों में शुमार की जाने लगीं. 1973 में ग्लिक को एक लेखक मित्र जॉन द्रानोव से एक पुत्र हुआ. दोनों ने बाद में 1977 में शादी की.

तमाम शुरुआती दुश्वारियों के बावजूद अपने शानदार लेखन के साथ-साथ  ग्लिक का एक शानदार अध्यापन कैरियर भी रहा है. वह येल विश्वविद्यालय, न्यू हेवन, कनेक्टिकट में अंग्रेजी की प्रोफेसर बनीं और कविता का अध्यापन उनका विषय रहा है. संप्रति वे कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स में रह रही हैं. उनका दूसरा संग्रह 'द हाउस आफ मार्शलैंड' 1975 में आया, जिसे कविता में एक विशिष्ट आवाज का आविष्कार माना गया. 1980 में ग्लिक का तीसरा संग्रह 'डिसेंडिंग फीगर' प्रकाशित हुआ, पर इसके टोन व विषय के कारण इसकी तनिक आलोचना हुई. 'डूबे हुए बच्चे' कविता के चलते उन पर बच्चों से नफरत करने का आरोप लगा. पर आम लोगों के बीच यह कविता भी लोकप्रिय हुई. संयोग से उसी साल उनका घर आग से नष्ट हो गया. इस घटना की प्रतिक्रिया उनकी कविताओं में हुई. 'द ट्रायम्फ ऑफ अकिलस' संग्रह को जहां आलोचक रोजनबर्ग ने साफ-सुथरा, शुद्ध और तीक्ष्ण बताया, वहीं आलोचक पीटर स्टिट ने ग्लिक को हमारे समय की महत्त्वपूर्ण कवयित्री करार दिया.

कामयाबी और कठिनाइयां
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कहा जाता है कि 1984 में ग्लिक जब मैसाचुसेट्स में विलियम्स कालेज में अंग्रेजी विभाग में वरिष्ठ व्याख्याता हुईं, उसी साल उनके पिता की मृत्यु हो गयी। उसी के बाद उनका विश्वप्रसिद्ध संग्रह 'अरारात' तैयार हुआ. एक अन्य संग्रह द वाइल्ड्स आइरिश 1992 में आया, जिसमें बगीचे के फूलों को केंद्र में रख कर जीवन की प्रकृति के बारे में एक माली और देवता के साथ बातचीत को रखा गया है. इसे सुंदरता का काव्य कह कर सराहा गया. आलोचक एलिजाबेथ लुंड ने इसे मील का पत्थर बताया, जिसे बाद में पुलित्जर पुरस्कार मिला.  
    
1990 जहां ग्लिक के जीवन में सफलता की सौगात लेकर आया, वहीं उनके लिए यह कठिनाइयों भरा वक्त भी साबित हुआ. यह वह समय था जब जॉन द्रानोव से उनकी शादी टूट चुकी थी जिसका प्रभाव उनके व्यावसायिक संबंधों पर भी पड़ा. ग्लिक ने अपने लेखन में इस अनुभव को आयत्त किया. इसके बाद एक के बाद एक बेहतरीन कृतियां प्रकाशित हुईं. प्रूफ्स एंड थियरीज, मीडोलैंड्स, विटा नोवा और द सेवेन एजेज. प्राचीन ग्रीक मिथ उन्होंने 'अक्तूबर' जैसी लंबी कविता में उकेरा जो कि छह भागों में है.

कविता की अंतर्वस्तु
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जहां तक कविता की अंतर्वस्तु का सवाल है, ग्लिक की कविता आघात केंद्रित है क्योंकि उन्होंने जीवन भर मृत्यु, क्षति, अस्वीकार व विफल संबंधों पर लिखा है. ग्लिक आघात को जीवन की सराहना का द्वार कहती हैं, जिसे उन्होंने अपने संग्रह 'द ट्रायम्फ आफ अकीलस' में खंगाला है जहां अकीलस मृत्यु् को स्वीकार करता है, जो उसे एक अधिक पूर्ण अनुभूतिबद्ध इंसान बनाता है. उन्होंने कविताओं में इच्छाओं के भी कई स्वरूप उकेरे हैं. जैसे प्रेम की इच्छा, ध्यानाकर्षण की इच्छा, सच बोलने की योग्यता की इच्छा, जिसे हम महत्त्वाकांक्षा से लैस कह सकते हैं. इसे मारिस, स्टे‍टस, पॉवर, मॉरलिटी, जेंडर, और लैंग्वेज के साथ संबंध की उनकी महत्त्वाकांक्षा से जोड़ कर देखते हैं.

ग्लिक की कविता का एक अन्य स्वभाव प्रकृतिपरकता है. 'द वाइल्ड‍ आइरिस' की कविताएं बगीचे में जन्म लेती हैं, जहां फूलों की एक बौद्धिक इकाई है, भावविह्वल आवाजें हैं. इस तरह की कविता को मारिस प्रकृतिपरक काव्य की रोमानी परंपरा मानते हैं. एलन विलियम्स उनकी कविता सेलेस्टियल म्यूजिक में एक दैवी छवि पाते हैं तथा कहते हैं कि जब आप दुनिया को प्यार करते हैं तो आपको एक दैवी संगीत सुनाई देता है. यही तत्व उन्हें 'द वाइल्ड आइरिश' में भी दिखता है. ग्लिक की कविताएं दुनिया की अनेक भाषाओं में अनूदित हुई हैं, उदाहरणार्थ फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, इतालवी, जापानी, पुर्तगाली आदि में.

कविता में सच्चाई
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ग्लिक के कविता संसार में सच्चाई के प्रति विशिष्ट आग्रह और जुनून दिखता है. बचपन और पारिवारिक जीवन, माता-पिता और भाई-बहनों के साथ करीबी रिश्ता, उनकी कविताओं के केंद्र में रहा है. उनकी कविताओं में उनका आत्म, वह सब सुनता है जो उसके सपनों और विभ्रमों से बाहर है और उनके अलावा कोई अन्य उसके प्रति उतना सख्त हृदय नहीं हो सकता जो आत्म-विभ्रमों का इतनी मजबूती से सामना करे. ग्लिक की कविताओं में आत्मकथात्मक तत्वों की भी भूमिका रही है. पर उन्हें कन्फेशनल कवि के रूप में चिह्नित और वर्गीकृत किया जाना उचित न होगा. स्वीडिश एकेडमी का भी मानना है कि ग्लिक का चिंतन सार्वभौम प्रकृति का रहा है और अपनी कविताओं के रचाव में वे मिथकों व शास्त्रीय मोटिफ्स से प्रेरणा लेती नजर आती हैं. ऐसे मिथकीय और शास्त्रीय रूपांकन उनकी तमाम रचनाओं में परिलक्षित हैं.

उत्तरोत्तर बढ़ती सक्रियता के साथ द ट्रायम्फ ऑफ अकिलीस 1985 और अरारात 1990 जैसे संग्रहों के साथ लुईस ग्लिक को अमेरिका और विदेशों में कविता के पाठकों के मध्य व्यापक लोकप्रियता मिली. 'अरारात' में तीन विशेषताएं खास तौर से लक्ष्य की जा सकती हैं जिसकी एकजुट प्रवृत्तियां उनके लेखन में घटित हुई हैं- पारिवारिक कथ्य, सीधी-सादी बुद्धि; और रचना का एक परिष्कृत अर्थ पा जाना जो उसे समग्र रूप से विशिष्ट  बनाता है. ग्लिक का कहना है कि इन कविताओं के साथ उन्होंने यह प्रयोग किया कि अपने काव्य में कैसे साधारण शैली का निवेश करें. यहां पीड़ादायक पारिवारिक संबंधों के नृशंस बिम्बों से भी हम रूबरू होते हैं. यह खरापन और दोटूक रिश्ता उनकी कविताओं को काव्यात्मक अलंकरणों के अभाव में भी प्रखर और सौंदर्यबोधी बनाता है. इससे उनकी खुद की कविता बहुत कुछ खुलती है, जब वे अपने निबंधों में एलियट के तात्कालिक स्वर, कीट्स की आंतरिकता या जॉर्ज ओपेन के स्वैच्छिक मौन के गुणसूत्र अपनाती हैं. लेकिन विश्वास के सरल सिद्धांतों को स्वीकार न करने की अपनी गंभीरता और अनिच्छा के कारण उनका कवि स्वभाव, एमिली डिकिंसन की रचना शैली से अधिक मेल खाता है.

लुईस ग्लूक न केवल जीवन की समस्याओं और बदलती हुई परिस्थितियों को स्वीकार करती हैं, वह चरम परिवर्तन और पुनर्जन्म की कवयित्री भी कही जाती हैं, जहां उन्होंने नुकसान के जाने-पहचाने साहस के साथ आगे की छलांग लगाई है. उनके सबसे प्रशंसित संग्रहों में से एक 'द वाइल्ड' आइरिस 1992 में आई, जिसके लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था में शामिल अपनी कविता 'स्नोड्रॉक्स' में सर्दियों के बाद जीवन की चमत्कारी वापसी का वर्णन किया है:

मुझे जीवित रहने की उम्मीद नहीं थी,
लगता था, पृथ्वी मुझे दबोच रही है. मुझे आशा नहीं थी
कि फिर से जाग उठूंगी और पृथ्वी में दबी अपनी देह से
यह महसूस कर सकूंगी कि
फिर से अनुक्रियाओं में सक्षम हूं, याद रख सकूंगी
कि इतनी देर बाद फिर से कैसे खुल सकता है
ठंडी रोशनी में शुरुआती वसंत.

डर, हाँ, लेकिन आप सब के बीच फिर से
रोना! जोखिम भी है और आनंद भी
नई दुनिया की कच्ची हवा में.

मिथकों के प्रति आग्रह
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नोबेल समिति के अध्यक्ष का मानना है कि 2006 में प्रकाशित 'एवर्नो' ग्लिक का एक उत्कृष्ट संग्रह है, जो कि मृत्यु के देवता हैड्स की कैद में पर्सेफ़ोन की मिथकीय एवं दूरदर्शी व्याख्या है. यह शीर्षक नेपल्स के क्रेटर पश्चिम से लिया गया है जिसे प्राचीन रोमवासियों द्वारा अंडरवर्ल्ड के प्रवेश द्वार के रूप में माना जाता था. ग्लिक की एक और शानदार उपलब्धि उनका नवीनतम संग्रह, फेथफुल और वर्चुअस नाइट 2014 है, जिसके लिए ग्लिक को नेशनल बुक अवार्ड मिला. वे अपने पाठकों को फिर से अपनी आवाज की उपस्थिति से चमत्कृत करती हैं और मृत्यु के मूल भाव को उल्लेखनीय गरिमा और प्रकाशमयता के साथ पकड़ती हैं. वह स्मृतियों और यात्राओं को अपनी रचनाओं में पिरोती हैं और नई अंतर्दृष्टि और प्रतीतियों के लिए वे प्रतिश्रुत दिखती हैं. ग्लिक में मिथकों के प्रति एक आसक्ति है. ग्रीक माइथोलॉजी के बिम्ब उनकी कविताओं में बहुधा आते हैं जो शायद इस वजह से कि वे अपने में मां पिता से ग्रीक मिथकों की कहानियां सुनते हुए बड़ी हुई हैं.
 
उनकी कुछ कविताओं को पढ़ने से ज्ञात होता है कि उनमें आत्माभिव्यक्ति के स्वर ज्यादा प्रबल हैं. बजाय दुनिया के समकालीन मुद्दों पर रूबरू होने के वे अपने देखे-सुने और भोगे-भुगते जीवन की व्यंजनाएं उकेरने में सुख पाती हैं. उनकी कविता कहें तो कोई शोर नहीं मचाती, वह एक आंतरिक आलाप की तरह घटित होती है. एनिवर्सरी, एवर्नो, डान, डेड एंड, द एग, एल्म्स, एंड आफ विंटर, द इम्पटी ग्लास, ए फेबल, द मैगी, मिड समर, मदर एंड चाइल्ड, पैराबोल्स् ऑफ स्वान, द अनट्रस्टवर्दी स्पीकर, विजिटर फ्रॉम अब्राड, विटा नोवा तथा आफ्टरवर्ड आदि बहुत सी उनकी कविताएं हैं जो ग्लिक के कवित्व का परिचायक हैं.

पुरस्‍कारों से भरा घर
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अपने साहित्यिक अवदान के लिए ग्लिक नोबेल से पहले जिन प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजी उनमें  पुलित्जर पुरस्कार 1993, नेशनल बुक अवार्ड 2014 व बोलिंगन प्राइज़ 2001) प्रमुख हैं. उल्लेखनीय है कि 2003 में ग्लिक 12वीं अमेरिकी पोएट लॉरेट नामित की गयीं थीं. उसी साल वे युवा कवियों की येल श्रृंखला की निर्णायक बनी़ं, जहां वे 2010 तक रहीं. उनके निबंधों की पुस्तक प्रूफ्स एंड थियरीज 1994 को कथेतर गद्य के लिए पीईएन/ मार्था एलब्रांड अवार्ड मिला. पुलित्ज‍र अवार्ड, नेशनल बुक अवार्ड व बोलिंगन प्राइज के अलावा उन्हें और भी बहुतेरे पुरस्कार मिले जिनमें वालेस स्टी्वेंस अवार्ड, अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स का नेशनल ह्यूनिटीज मेडल व कविता के लिए गोल्ड मेडल शामिल है. उन्हें गुगेंहिम एवं राकफेलर फाउंडेशन से फेलोशिप भी मिली व अब 2020 में वे साहित्य की नोबेल पुरस्कार के लिए चुनी गयी हैं.

उनके संग्रह विटा नोवा 1999 को जब येल विश्वविद्यालय का प्रतिष्ठित बोलिंगन पुरस्कार मिला था, तो उसके बारे में हारवर्ड एडवोकेट के ब्रायन फिलिप्स कहा था, 'यह बहुत क्षिप्रता में लगभग एक स्ट्रोक में लिखा गया. एक बार शुरू हुआ तो मैं समझता हूं यदि आप सोने नहीं जा रहे तो ठीक है कि आप सोने नहीं जा रहे हैं, इस भाव के साथ लिखा गया.'इसकी विषयवस्तु में टूटे हुए वैवाहिक संबंधों के चित्र हैं, तो निजी स्व‍प्न और आर्केटाइप शास्त्रीय मिथकों के तत्व भी. इसी तरह उनके संग्रह द सेवेन एजेज़ 2001 में भी ऐसे ही मिथ और निजी तत्व ज्यादा प्रबल हैं जिसकी विषयभूमि में लेखक का जीवन, शुरुआती यादों से लेकर मृत्यु  के भय की आशंकाएं समाई हैं.

# डॉ ओम निश्चल हिंदी के सुपरिचित कवि-आलोचक व भाषाविद हैं. तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित. हिंदी अकादमी दिल्ली, उ.प्र. हिंदी संस्थान के आचार्य रामचंद्र शुक्ल आलोचना पुरस्का‍र, विचारमंच कोलकाता के प्रो. कल्याणमल लोढ़ा साहित्य सम्मान एवं जश्ने अदब के शाने हिंदी खिताब से समादृत हैं. संपर्क: जी-/506 ए, दाल मिल रोड, उत्तम नगर, नई दिल्ली- 110059. मेल: dromnishchal@gmail.com

 

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