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साहित्य

शब्दों के जादू से सुरों के ताल तक, देखें साहित्य आजतक के कई रंग

शब्दों के जादू से सुरों के ताल तक, देखें साहित्य आजतक के कई रंग
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तीन दिन तक चले 'साहित्य आजतक 2018' का समापन रविवार, 18 नवंबर को हो गया. तीन दिन तक दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चले साहित्य के सबसे बड़े आयोजन में एक से बढ़कर एक कई सत्र हुए. इसमें हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के मशहूर लेखक, कवि, कहानीकार, चिंतक, अभिनेता, निर्देशक, नाट्यकर्मी और संगीतकार शामिल हुए.  साहित्य के इस महाकुंभ की शुरुआत प्रमुख मंच दस्तक दरबार में सरस्वती से वंदना हुई.
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स्वागत भाषण में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कहा कि ये जरूरी है कि इस सोशल मीडिया के जमाने में हमारी संस्कृति अनफॉलो न हो जाए. उन्होंने
कहा कि इसी वजह से आप कार्यक्रम से जुड़ी यादों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर शेयर कीजिए. उन्होंने कहा कि खुशी की बात ये है कि अब 'साहित्य  आजतक' का ये कार्यक्रम साल में एक बार नहीं होगा बल्कि हमारी वेबसाइट पर हर वक्त आप इसका लाभ ले सकते है जो आपके लिए हर समय अपडेट रहेगी.
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सूफी गायक जावेद अली ने भी कार्यक्रम में शिरकत की. दस्तक दरबार में इस सत्र का संचालन मीनाक्षी कंडवाल ने किया. इस सत्र के दौरान जावेद अली ने अपनी सूफी गायकी से महफिल में समा बांधने का काम किया. जावेद अली ने मंच पर आकर दर्शकों की फरमाइश पर पहला गाना 'जश्न-ए-बहारा' गाया. इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई मशहूर गाने गाए. 
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साहित्य आजतक 2018 के पहले दिन के आखिरी सत्र में मशहूर कव्वाल 'पद्मश्री' पूरनचंद वडाली ने समां बांधा. उनके साथ उनके बेटे लखविंदर वडाली ने भी कव्वालियां गाईं. .
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‘साहित्य आजतक’ के दूसरे दिन ’कविता आज कल’ के सत्र में वरिष्ठ कवि अशोक वाजपेयी, लीलाधर मंडलोई और कवयित्री अनामिका ने अपने विचार रखे और अपनी चुनींदा कविताएं पेश कीं. इस दौरान आजतक के सवाल पर वरिष्ठ कवि अशोक वाजपेयी ने कहा कि असहिष्णुता के विरोध में कवियों, साहित्यकारों का अवॉर्ड वापसी अभि‍यान अपने लक्ष्य में सफल रहा है.

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साहित्य आजतक के थिएटर प्रेमी दर्शकों ने रंगमंच पर सबसे लंबे समय तक चलने वाले व्यंग्य नाटक 'ग़ालिब इन देल्ही' को भी देखा. 1997 से चले आ रहे इस नाटक के अब तक साढ़े चार सौ से भी अधिक शो हो चुके हैं और हर शो हाउसफुल रहा है.
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मशहूर लेखक चेतन भगत ने 'थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ' नाम के सत्र में #Metoo मुहिम और देश की मौजूदा राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने
साहित्य आजतक की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा लिट फेस्ट बन चुका है.
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प्रसिद्ध गीतकार, लेखक, कथाकार स्वानंद किरकिरे ने सेशन 'बहती हवा सा था वो' में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने अपने करियर को लेकर बात की और कई गाने भी गाए.
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दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित साहित्य आजतक के एक अहम सत्र में गीतकार, अभिनेता पीयूष मिश्रा ने शिरकत की. उन्होंने जहां अपने बारे में कई दिलचस्प बातें जाहिर कीं, वहीं अपने चर्चित गीतों से लोगों का मन मोह लिया.
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साहित्य आजतक के दूसरे दिन पूरा माहौल सूफियाना हो गया. अपने सुर और दमदार आवाज से नूरां सिस्टर्स ने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है. साहित्य आजतक 2018 के दूसरे दिन भी दोनों बहनों ने अपने सूफी गानों से लोगों को चमत्कृत कर दिया.
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साहित्य आजतक के दूसरे दिन दस्तक दरबार में 'बिहार-कोकिला' शारदा सिन्हा पहुंचीं. उन्होंने अपने लोकगीतों से लोगों का मन मोह लिया. 
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साहित्य आजतक के दूसरे दिन के 'किसके लिए साहित्य' सत्र में लेखक अरुण कमल, ऋषिकेश सुलभ और मैत्रेयी पुष्पा ने हिस्सा लिया. इस सत्र के दौरान मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि साहित्य उन पिछड़े वंचितों के लिए है जिनको अपने हालात का भी अहसास नहीं है.
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साहित्य आजतक में स‍ाहित्य के साथ ही कला, संस्कृति के भी सभी रंग मौजूद थे. गालिब पर नाटक के साथ-साथ अरविंद गौड़ के नाट्य समूह की ओर से भी साहित्य आजतक में एक नुक्कड़ नाटक पेश किया गया, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा.
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पटकथा लेखक और गीतकार प्रसून जोशी ने साहित्य आजतक के मंच से सिनेमा की समाज में भूमिका को लेकर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने अपनी कई कविताएं
सुनाईं और सेंसर बोर्ड की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की.
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सिंगर मालिनी अवस्थी ने भी कार्यक्रम में शिरकत की. इस सत्र का संचालन श्वेता सिंह ने किया. इस सत्र की शुरुआत मालिनी अवस्थी ने भगवान राम के लिए भजन से की. लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने लोकगीतों की छटा बिखेरी और अपने गीतों से जादू बिखेर दिया.
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दूसरे दिन की शाम को शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने मंच की रौनक बढ़ाई. अपनी शायरी से नौजवानों के दिलों में अपनी एक खास जगह बनाने वाले इमरान ने हल्ला बोल चौपाल के सत्र 'भारत का इमरान' में शिरकत की.
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साहित्य आजतक 2018 के तीसरे दिन कई जानी-मानी हस्तियों ने अपने विचार साझा किए. शुरुआत मशहूर बॉलीवुड अभिनेता और संगीतकार अन्नू कपूर से हुई. अन्नू कपूर ने 'साहित्य आजतक' के मंच पर अपनी जिंदगी के कई राज साझा किए.
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साहित्य आजतक 2018 में अंतिम दिन सबसे चर्चित सेशन ख्यात गीतकार जावेद अख्तर का रहा. उन्होंने 'साहित्य और हम' सेशन में कई सवालों के दिलचस्प जवाब दिए. उन्होंने शहरों के नाम बदलने से लेकर अयोध्या विवाद तक पर बेबाकी से बात की. इस सेशन को एंकर अंजना ओम कश्यप ने मॉडरेट किया.
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सेशन सुरीली बिटिया में मशहूर बाल गायिका मैथिली ठाकुर ने हिस्सा लिया. इस दौरान लोक गायन गाने के लिए मशहूर मैथिली ने भजनों के साथ फिल्मी गाने भी गाए और उन्होंने अपनी गायकी से समां बांध दिया. मैथिली के साथ उनके दोनों भाई भी मौजूद थे.

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साहित्य आजतक 2018 के तीसरे और आखिरी दिन शाम को देश के बड़े शायरों ने अपनी शायरी से लोगों का दिल जीत लिया. साहित्य आजतक पर हुए इस मुशायरे में मशहूर शायर राहत इंदौरी, वसीम बरेलवी, मंजर भोपाली, आलोक श्रीवास्तव, शीन काफ निजाम, डॉ नवाज देवबंदी, डॉ लियाकत जाफरी, तनवीर गाजी शामिल हुए.