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जब भेदभाव से परेशान महिला वैज्ञानिकों ने चेहरे पर लगाई दाढ़ी-मूंछ

इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो समाज में महिलाओं के योगदान को सदैव पुरुषों की तुलना में कम ही आंका गया है. हालांकि इस भेदभाव वाले नजरिए के बावजूद न तो महिलाओं की क्षमता पर सवाल उठाए जा सकते हैं और न ही उनके योगदान का महत्व कम होता है.

यह तस्वीर प्रॉजेक्ट के सोशल मीडिया से ली गई है. यह तस्वीर प्रॉजेक्ट के सोशल मीडिया से ली गई है.

इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो समाज में महिलाओं के योगदान को सदैव पुरुषों की तुलना में कम ही आंका गया है. हालांकि इस भेदभाव वाले नजरिए के बावजूद न तो महिलाओं की क्षमता पर सवाल उठाए जा सकते हैं और न ही उनके योगदान का महत्व कम हो जाता है.

भारतीय इतिहास में आजाद हिन्द सेना की रेजिमेंट कमांडर लक्ष्मी सहगल से लेकर कल्पना चावला तक ने महिलाओं की छवि को लोगों के सामने बदलकर रख दिया है. दुख की बात यह है कि आज भी अपने दम पर तमाम उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलाओं को भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में पुरुषों की तुलना में कई बार भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

समान मेहनत और प्रतिभा के बावजूद किए जाने वाले इस भेदभाव के खिलाफ अमेरिकी महिला वैज्ञानिकों ने अपनी आवाज उठाई है. जी हां यहां महिला वैज्ञानिक भेदभाव के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए अपने कार्यस्थल पर चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ लगाकर पहुंच गई.

वनस्पति विज्ञान की प्रफेसर एलन करेनो ने कार्यस्थल पर महिला वैज्ञानिकों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ इस मुहिम की शुरुआत की है. बता दें, इन सभी महिला वैज्ञानिकों ने भेदभाव के खिलाफ एकसाथ मिलकर बीयर्डेड लेडी प्रॉजेक्ट की शुरुआत की है.

इस प्रॉजेक्ट का मकसद लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करके उन्हें ये बताना है कि महिला वैज्ञानिकों का योगदान भी किसी पुरुष वैज्ञानिक से कम नहीं होता है. इन सभी महिला वैज्ञानिकों का कहना है कि टीवी पर एक्सपर्ट के तौर पर अक्सर पुरुष वैज्ञानिकों को ही बुलाया जाता है.

अगर इस तरह का बर्ताव सिर्फ लैंगिक भेदभाव की सोच है तो हम भी दाढ़ी लगाकर खुद को उनके जैसा बना सकते हैं. समाज में समानता के लिए शुरू की गई महिलाओं की इस मुहिम को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है.

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