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शिफ्ट में काम करने वालों के लिए बुरी खबर, दिमाग पर हो रहा ऐसा असर

सुबह, शाम और रात की शिफ्ट में बड़ी संख्या में एंप्लॉयी काम करते हैं. ज्यादातर ऑफिस में शिफ्ट हर हफ्ते बदलती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

कई निजी कंपनियों में चौबीसों घंटे काम होता है. टार्गेट पूरा करने के लिए भी कई कंपनियां अब 24 घंटे काम करने पर जोर दे रही हैं. 24 घंटे ऑफिस चलने का मतलब शिफ्ट में काम करना. सुबह, शाम और रात की शिफ्ट में बड़ी संख्या में एंप्लॉयी काम करते हैं.

ज्यादातर ऑफिस में ये शिफ्ट हर हफ्ते बदलती है. पर क्या आप जानते हैं कि हर हफ्ते शिफ्ट में होने वाला बदलाव आपकी बॉडी पर क्या असर डालता है?

सेहत के लिए खतरा

कभी सुबह, कभी शाम तो कभी रात. अगर आप भी इस तरह की शिफ्ट में काम करते हैं तो ये आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. इससे न सिर्फ मोटापा बल्कि डायबिटीज और कई तरह की दिमागी बीमारियां भी हो सकती हैं.

ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी में की गई एक स्टडी में इस बात की जानकारी सामने आई है. ये स्टडी 438 लोगों पर की गई थी. शोधकर्ताओं ने बताया कि शिफ्ट में काम करने वालों में 33 फीसदी ज्यादा तनाव और डिप्रेशन पाया गया. वहीं 9 से 5 बजे वाली शिफ्ट में काम करने वालों या एक फिक्स शिफ्ट में काम करने वालों में बहुत कम तनाव पाया गया.

मानसिक बीमारियों का खतरा

शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में कई तरह की दिमागी बीमारियां भी हो जाती हैं. स्टडी के मुताबिक 438 लोगों में से 28 फीसदी लोग ऐसे थे जो बदलती शिफ्ट में काम करते थे और वो मानसिक बीमारी से पीड़ित थे.

मूड स्विंग

स्टडी करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार शिफ्ट में बदलाव होने से लोगों की सोने और जागने की आदत पर असर पड़ता है. हर हफ्ते होने वाले बदलाव को हमारा शरीर जल्दी एडजस्ट नहीं कर पाता जिससे लोग चिड़चिड़े होने लगते हैं.

कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर का खतरा

जापान में हुए एक शोध में ये बात सामने आई कि ऐसे लोग जो शिफ्ट में काम करते हैं उन्हें मोटापा और पाचन संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं. इसके अलावा लोगों में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी दिक्कतें भी हो जाती हैं.

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