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लक्षण दिखने से पहले ही इस ब्लड टेस्ट की पकड़ में आ जाएगा कैंसर: रिपोर्ट

शोधकर्ताओं का कहना है कि वे साबित कर चुके हैं कि ब्लड टेस्ट पर आधारित डीएनएन मिथिलेशन के जरिए पारंपरिक निदान के चार साल पहले ही पांच प्रकार के कैंसर को डिटेक्ट किया जा सकता है.

PanSeer नाम का यह ब्लड टेस्ट 95 प्रतिशत लोगों में कैंसर का पता लगा सकता है. PanSeer नाम का यह ब्लड टेस्ट 95 प्रतिशत लोगों में कैंसर का पता लगा सकता है.

  • चार साल पहले ही पांच प्रकार के कैंसर को डिटेक्ट करना संभव
  • यह ब्लड टेस्ट 95 प्रतिशत लोगों में कैंसर का पता लगा सकता है

कैंसर के कारण दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की मौत होती है. इस बीमारी से निपटने के लिए डॉक्टर्स को अब एक नई उम्मीद दिखी है. चीन के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कैंसर के लक्षण दिखने के सालों पहले ही एक ब्लड टेस्ट के जरिए इसे डिटेक्ट किया जा सकता है. अगर ऐसा संभव हुआ तो इस भयंकर बीमारी से इंसान की जान बचाना चिकित्सकों के लिए काफी आसान हो जाएगा.

चीन के शोधकर्ताओं का कहना है कि PanSeer नाम का यह ब्लड टेस्ट 95 प्रतिशत लोगों में कैंसर का पता लगा सकता है, जिनमें पहले कभी इसके लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं. शोधकर्ता कहते हैं, 'हम ये साबित कर चुके हैं कि ब्लड टेस्ट पर आधारित डीएनएन मिथाइलेशन के जरिए पारंपरिक निदान के चार साल पहले ही पांच प्रकार के कैंसर को डिटेक्ट किया जा सकता है.'

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चीनी शोधकर्ताओं का यह अध्ययन 'नेचुरल कम्युनिकेशन' जर्नल में प्रकाशित हुआ है. ब्लड टेस्ट के जरिए कैंसर का जल्द पता लगाने वाली ऐसी रिपोर्ट पहली बार सामने नहीं आई है. टीम ने कहा कि यह रिसर्च काफी दिलचस्प था, क्योंकि इसमें हमने पाया कि रोगियों में लक्षण दिखने से पहले ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है. कुछ स्टडीज में पहले भी ऐसे दावे किए जा चुके हैं.

शोधकर्ताओं ने बताया कि कैसे यह टेस्ट मिथाइल ग्रुप के लिए ब्लड प्लाज्मा में पाए जाने वाले डीएनए की स्क्रीनिंग कर कैंसर का पता लगा सकता है. टीम ने कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल कर उन्हें डीएनए के बहुत छोटे स्तर तक पहुंचने में मदद मिली है. इसके बाद इसकी जड़ तक पहुंचने के लिए उन्होंने मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग किया, यानी एक प्रकार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक.

इस टेस्ट को विकसित करने के लिए चीनी शोधकर्तओं ने 2007 से लेकर 2014 के बीच ब्लड प्लाज्मा सैंपल एकत्रित किए थे. टेस्ट में जिन लोगों का ब्लड प्लाज्मा सैंपल लिया गया था, उनमें से 414 लोग तकरीबन पांच साल तक कैंसर मुक्त रहे. जबकि 191 लोग चार साल के भीतर पेट, कोलेक्ट्रोल, लिवर, फेफड़े और ग्रासनली के कैंसर से पीड़ित पाए गए.

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