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Sarojini Nagar Branded Clothes Truth: 2000 के कपड़े ₹50 में...सरोजनी नगर में क्यों मिलते हैं सस्ते ब्रांडेड कपड़े? थोक व्यापारी ने बताया पूरा खेल

सरोजनी नगर मार्केट (Sarojini Nagar Market) से खरीदे गए ब्रांडेड कपड़ों के पीछे की सच्चाई क्या है? क्या वे वाकई नए होते हैं या फिर विदेशी लोग पहनने के बाद उन्हें बेच देते हैं? एक थोक व्यापारी ने इस बारे में बताया है कि कैसे पुराने कपड़ों पर नकली ब्रांड के टैग लगाकर उन्हें मार्केट में महंगा बेचा जाता है.

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सरोजनी नगर में लोग एक से बढ़कर एक ब्रांडेड कपड़े लेने जाते हैं. (Photo: AI Generated)
सरोजनी नगर में लोग एक से बढ़कर एक ब्रांडेड कपड़े लेने जाते हैं. (Photo: AI Generated)

Sarojini Nagar Branded Clothes: दिल्ली की जब बात आती है तो वहां के फेमस कपड़ा मार्केट की बात न हो, ऐसा संभव ही नहीं. दिल्ली के सबसे फेमस कपड़े मार्केट में सरोजनी नगर मार्केट का नाम सबसे पहले आता है. इस मार्केट का नाम लेते ही दिमाग में कम दाम में बेहतरीन ब्रांडेड कपड़ों की तस्वीर उभर आती है. हर दिन यहां हजारों लोग अपनी पसंद के कपड़े ढूंढते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये कपड़े असल में आते कहां से हैं और ब्रांडेड टैग लगे ये कपड़े सच में ब्रांडेड होते हैं? 

हाल ही में सरोजनी नगर में जब Mo.of.everything की टीम पहुंची तो सरोजनी नगर जैसे कई मार्केट में थोक में कपड़े भेजने वाले व्यापारी ने इस पूरे बिजनेस का ऐसा सच बताया जो किसी को भी हैरान कर सकता है. उन्होंने बताया कि अक्सर सरोजनी मार्केट के जो कपड़े 'ब्रांडेड' समझकर खरीदते हैं, उनकी कहानी विदेशों से शुरू होती है और पानीपत के रास्ते होते हुए हमारी अलमारी तक पहुंचती है.

विदेशों से आता है कपड़ों का 'कंटेनर'

व्यापारी के मुताबिक, सरोजनी नगर में बिकने वाला अधिकांश माल सीधे फैक्ट्री से नहीं, बल्कि विदेशों से आता है. अमेरिका, कनाडा, यूके, जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में जब फैशन पुराना हो जाता है या लोग कपड़ों को डोनेट कर देते हैं तो उन्हें इकट्ठा करके बड़ी-बड़ी बेल (गांठों) में पैक कर दिया जाता है और उन्हें पानीपत भेजा जाता है. पानीपत इन कपड़ों का सबसे बड़ा हब है, जहां से ये पूरे भारत, खासकर दिल्ली की सरोजनी नगर और अन्य बड़ी मार्केटों में सप्लाई किए जाते हैं.

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क्या हर कपड़ा फ्रेश और ब्रांडेड होता है?

चाइना और साउथ कोरिया के कपड़े की क्वालिटी सबसे अच्छी होती है. जैसे वहां फैशन आउट हो गया तो वहां का माल यहां आ जाता है. इसके अलावा वहां 1-2 बार कपड़ा पहनने के बाद लोग धोने की जगह नया कपड़ा खरीदना पसंद करते हैं. 1 बेल में 50 प्रतिशत माल फ्रेश होता है और 50 प्रतिशत माल इस्तेमाल किया हुआ होता है. चाइना से शिप में 25 टन का कंटेनर लोड करते हैं जिसमें करीब 350 बेल होती हैं.

दुकानदार अक्सर अपने फ्रेश स्टॉक के साथ 10-20 फीसदी ऐसा पुराना माल मिलाकर बेचते हैं ताकि मुनाफा बेहतर हो सके. तो अगली बार जब आप सरोजनी में किसी ब्रांड के नाम पर शॉपिंग करें तो याद रखें कि ये महज एक सेकंड हैंड कपड़े की ग्लोबल जर्नी है.

धुले हुए नहीं, सीधे पैक होकर आते हैं

सबसे चौकाने वाली बात ये है कि ये कपड़े इस्तेमाल किए हुए होते हैं. व्यापारी ने स्पष्ट किया कि वहां से आने वाले कपड़े धुलते नहीं हैं. कपड़ों को सुरक्षित रखने के लिए बेल के अंदर केमिकल का छिड़काव किया जाता है ताकि उनमें जर्म्स न पनपें और वे लंबे समय तक फ्रेश दिखें. सरोजनी नगर पहुंचने पर दुकानदार इन पर प्रेस करते हैं और इन्हें नई पैकिंग में ग्राहकों के सामने सजाकर रख देते हैं.

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कैसे लगता है ब्रांड का नकली 'टैग'

मार्केट में आपको जारा, मैक्स, टॉमी जैसे कई नामी ब्रांड के कपड़े दिख जाते हैं. लेकिन सच ये है कि उन पर लगे टैग अक्सर नकली होते हैं. एक लेडी ने बताया कि ये टैग दुकान पर आसानी से मिल जाते हैं और फिर कई बार नकली टैग बनवाकर कपड़ों पर लगाए जाते हैं. यानी सिर्फ 1 रुपये का खर्च करके किसी भी साधारण कपड़े को 'ब्रांडेड' बना दिया जाता है. यदि पॉलीथिन में पैक कराया जाता है तो उसका 1 से डेढ़ रुपये एक्स्ट्रा जाता है.

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