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सुप्रीम कोर्ट ने Supertech को दी चेतावनी- 17 जनवरी तक खरीदारों को रुपये लौटाएं, वरना...

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को नोएडा एमराल्ड कोर्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट में ट्विन टावरों को गिराने का काम सौंपा जाने वाली एजेंसी को अंतिम रूप देने के लिए भी कहा. इसने प्राधिकरण को 17 जनवरी को जवाब देने का निर्देश दिया.

सुप्रीम कोर्ट का फाइल फोटो सुप्रीम कोर्ट का फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एमरॉल्ड टॉवर मामले में सुपरटेक को लगाई फटकार
  • नोएडा प्राधिकरण को भी दिया 17 जनवरी तक का वक्त

सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों की जमा रकम लौटाने को लेकर सुपरटेक के प्रबंधन को फटकार लगाई है. बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण से उस एजेंसी का नाम बताने को कहा है जिसे सुपरटेक एमरॉल्ड टॉवर हाउसिंग प्रोजेक्ट के ट्विन टावरों को ध्वस्त करने का काम दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को 17 जनवरी को इस मामले पर जवाब देने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सुपरटेक को अब से पांच दिन यानी 17 जनवरी तक घर खरीदारों को भुगतान करने का निर्देश दिया है. सुपरटेक को चेतावनी देते हुए कोर्ट ने कहा है कि अगर उसने रुपये नहीं लौटाए तो जेल जाने को तैयार रहें. हम जेल भेज देंगे. 

सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुपरटेक से कहा, 'अपने कार्यालय को व्यवस्थागत क्रम में रखें. साथ ही यह हिदायत भी दी कि कंपनी अदालती आदेश का ध्यान रखें और उनका समय से अनुपालन सुनिश्चित करें. वरना हमें आपके निर्देशकों को जेल भेजने में देर नहीं लगेगी. हमें पता है कि कोर्ट के आदेश का पालन न करने के लिए आप तमाम तरह के कारण और बहने ढूंढ रहे हैं. आप सुनिश्चित करें कि भुगतान सोमवार तक कर दिया जाए अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहिएगा.'

कोर्ट ने सुपरटेक के निर्देशकों को चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे आदेशों के पालन में लापरवाही बरतते हुए आप हमारे आदेश और अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि निवेश की वापसी पर ब्याज नहीं काटा जा सकता है.

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त, 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें भवन मानदंडों के उल्लंघन के लिए नोएडा में सुपरटेक लिमिटेड की एमराल्ड कोर्ट परियोजना में 40 मंजिला ट्विन टावरों को गिराने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अपीलकर्ता सुपरटेक द्वारा तीन महीने की अवधि के भीतर नोएडा के अधिकारियों की देखरेख में तोड़फोड़ का काम अपने खर्च पर किया जाना चाहिए.


 

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