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EWS के लिए 8 लाख सालाना आय तय करने का आधार बताए सरकार- सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा कि आय के मानदंड को पूरे देश में समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले व्यक्ति की वार्षिक आय की उत्तर प्रदेश के एक दूरस्थ गांव में रहने वाले लोगों के साथ तुलना नहीं की जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ये नहीं कह सकते कि नीति का मामला- कोर्ट
  • 20 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आठ लाख रुपये सालाना आय तय करने का कारण पूछा है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि ये नीति का मामला है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आखिर आय के मानदंड को पूरे देश में समान रूप से कैसे लागू किया जा सकता है? जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे ASG केएम नटराज से पूछा कि आठ लाख रुपये का मानदंड तय करने के लिए आपने क्या अभ्यास किया? या आपने OBC पर लागू होने वाले मानदंड को स्वीकार कर लिया?

पीठ ने कहा कि आय के मानदंड को पूरे देश में समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले व्यक्ति की वार्षिक आय की उत्तर प्रदेश के एक दूरस्थ गांव में रहने वाले लोगों के साथ तुलना नहीं की जा सकती है. भले ही उनकी आय एक समान क्यों न हो. शीर्ष अदालत ने यह सवाल नील ऑरेलियो नून्स और अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उठाए. इनमें देशभर के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में इस शैक्षणिक सत्र से अखिल भारतीय कोटा में OBC और EWS कोटा लागू करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 29 जुलाई को जारी की गई अधिसूचना को चुनौती दी गई है.

NEET  के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों में से मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में 15 फीसदी सीटें और एमएस और एमडी कोर्स में 50 फीसदी सीटें अखिल भारतीय कोटे से भरी जाती हैं. वहीं, एएसजी नटराज ने तर्क दिया कि आरक्षण लागू करना नीति का विषय है. इस पर पीठ ने पूछा कि आठ लाख रुपये के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपने क्या अभ्यास किया या आपने सिर्फ वही किया जो OBC  के लिए लागू था. पीठ ने इंद्रा साहनी (मंडल मामला) के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि जिनकी आय आठ लाख रुपये से कम है वे शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन और आर्थिक पिछड़ेपन के मानदंड को पूरा करते हैं. यहां हम शुद्ध आर्थिक पिछड़ेपन से निपट रहे हैं. हम जानना चाहते हैं कि केंद्र ने क्या अभ्यास किया है?

अधिसूचना में विशेष रूप से आठ लाख रुपये का जिक्र है लेकिन अब आपके पास 17 जनवरी का कार्यालय ज्ञापन है जिसमें संपत्ति के साथ आठ लाख रुपये शामिल हैं. क्या आप संपत्ति सह आय को लागू कर रहे हैं. नटराज ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा. पीठ ने कहा कि जब हम पूछ रहे हैं कि EWS पात्रता के लिए आठ लाख रुपये का आधार क्या है तो आप यह नहीं कह सकते कि यह नीति का मामला है. नटराज ने कहा कि इसके लिए विचार-विमर्श किया गया था लेकिन अदालत ने उनसे डेटा या इसके लिए किए गए अध्ययन को प्रदर्शित करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर  20 अक्टूबर को विचार करेगा.

 

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