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पालघर केस को लेकर दायर अपील पर 19 सितंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, साधुओं की हुई थी लिंचिंग

महाराष्ट्र के चर्चित पालघर केस को लेकर दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर को सुनवाई होनी थी लेकिन समय की कमी के कारण जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसे 19 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करने को कहा. महाराष्ट्र पुलिस ने पालघर में साधुओं की लिंचिंग के मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज करने की अपील की है. 

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के पालघर में करीब ढाई साल पहले 16 अप्रैल 2020 को भीड़ ने साधुओं की हत्या कर दी थी. इसे लेकर दाखिल अपील पर सुप्रीम कोर्ट में अब 19 सितंबर को सुनवाई होगी. इस मामले में सुनवाई 16 सितंबर को ही होनी थी लेकिन समय की कमी के कारण जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसे सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया.

पालघर में दो साधुओं की हत्या के मामले में महाराष्ट्र पुलिस (Maharashtra Police) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हलफनामा दायर किया है. महाराष्ट्र पुलिस ने सीबीआई (CBI) जांच की मांग का विरोध किया है. पुलिस ने कहा है कि याचिका खारिज करने के साथ याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए.

महाराष्ट्र पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय में ये भी जानकारी दी कि CID पहले ही दो चार्जशीट कोर्ट में दायर कर चुकी है. इन चार्जशीट को भी महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है. अपराध रोकने में, जिम्मेदारी के निर्वहन में जिनकी लापरवाही पाई गई, उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी कराई गई.

महाराष्ट्र पुलिस की ओर से विभागीय जांच में दोषी पाए गए अस्सिटेंट पुलिस इंस्पेक्टर आनंदराव शिवाजी काले को सरकार सर्विस से बर्खास्त भी कर चुकी है. इसके अलावा असिस्टेंट पुलिस सब इंस्पेक्टर रविन्द्र दिनकर सालुंखे और हेडकांस्टेबल नरेश  ढोंडी को कंपल्सरी रिटायरमेंट दिया जा चुका है. इसके अलावा लापरवाही के दोषी 15 पुलिसकर्मियों को दो से तीन साल न्यूनतम वेतन दिए जाने का दंड दिया गया है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मामले की जांच सीबीआई को ट्रांसफर करने की मांग की गई है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई. साथ ही मामले में दाखिल चार्जशीट को अदालत के सामने रखने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था.

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