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जेल से बाहर आए Jitendra Narayan Tyagi, भड़काऊ भाषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त जमानत

हरिद्वार जिला जेल में बंद जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को जमानत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने जितेंद्र त्यागी को हेट स्पीच मामले में सशर्त जमानत दी. जेल से बाहर आने पर उनका फूलमालाओं से स्वागत किया गया. मदरसों के लेकर उन्होंने अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा है कि मदरसों को बंद कर देना चाहिए.

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यति नरसिंहानंद सरस्वती के साथ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (फाइल फोटो)
यति नरसिंहानंद सरस्वती के साथ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (फाइल फोटो)

Uttrakhand News: हरिद्वार में दी गई हेट स्पीच (Hate Speech) से सुर्खियों में आए जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी (Jitendra Tyagi Hate Speech) बुधवार को हरिद्वार जेल से जमानत पर रिहा हो गए. सुप्रीम कोर्ट ने जितेंद्र त्यागी को सशर्त जमानत दी है. हरिद्वार जिला कारागार से बाहर आने पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी सहित कई साधु-संतों ने जितेंद्र त्यागी का फूल मालाओं से स्वागत किया.

सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के तहत 2 सितंबर को जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने हरिद्वार जेल में सरेंडर किया था. अब उन्हें फिर से जमानत पर रिहा कर दिया गया है. जेल से बाहर आते ही जितेंद्र त्यागी ने कहा कि वह हिंदू समाज के लिए काम करना चाहते हैं.

जब मदरसों को लेकर सवाल पूछा गया तो जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने साफ कहा, ''मैं पहले भी मदरसों को लेकर बयान दे चुका हूं और आज भी अपने पहले वाले बयान पर कायम हूं कि मदरसों को बंद कर देना चाहिए.''

जनवरी में हुए थे गिरफ्तार

इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने वाले जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी हरिद्वार की धर्म संसद में हेट स्पीच देकर चर्चाओं में आए थे. जितेंद्र नारायण त्यागी पर हरिद्वार में आयोजित हुई धर्म संसद में इस्लाम और पैगंबर के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण देने के आरोप में 13 जनवरी 2022 को गिरफ्तार किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

धर्म संसद में हेट स्पीच के आरोपी जितेन्द्र नारायण त्यागी ने जमानत के लिए पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जितेंद्र नारायण त्यागी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. उत्तराखंड हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद जितेंद्र नारायण त्यागी ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने उस समय उन्हें तीन महीने की शर्त जमानत दे दी थी. अब उन्हें इस मामले में नियमित जमानत दे दी गई है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शर्तें भी रखी हैं.

 

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