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उत्तराखंड के CM त्रिवेंद्र सिंह रावत का पूर्व पीएम राजीव गांधी पर विवादित बयान, बताया बुजदिल

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने राजीव गांधी को बुजदिल तो पीएम मोदी को साहसी बताया है.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Courtesy- PTI) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Courtesy- PTI)

  • राजीव गांधी ने शाहबानो फैसले को पलटकर की तुष्टीकरण की राजनीतिः रावत
  • सीएम रावत बोले- CAA का विरोध करने वाले दल शेर की खाल में छिपे भेड़िए

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने राजीव गांधी को बुजदिल तो पीएम मोदी को साहसी बताया है. उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का यह विवादित बयान उस समय सामने आया है, जब वो शुक्रवार को नैनिताल में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी जोरदार हमला बोला.

बीजेपी नेता और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि शाहबानो द्वारा सुप्रीम कोर्ट से तीन तलाक केस जीतने के बावजूद भी उस समय के कमजोर और बुजदिल प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संविधान में संशोधन कर तुष्टीकरण की राजनीति की थी, लेकिन मोदी सरकार मजबूत इरादों के साथ तीन तलाक बिल लाई और मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया. अब तीन तलाक के खिलाफ कानून बन चुका है.

दरअसल, 23 अप्रैल 1985 को मोहम्मद अहमद खान बनाम शाहबानो बेगम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था. शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला को पति से गुजारा-भत्ता पाने का हक है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मुस्लिम कट्टरपंथियों को रास नहीं आया था. इसके बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित कर दिया था.

शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी दल शेर की खाल में छुपे हुए भेड़िए हैं. ये सभी हर चीज का केवल विरोध ही करते हैं. इन्हें पहचानने की जरूरत है. ये देश में माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं.

आपको बता दें कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन कानून बनाया है. संसद से पास होने के बाद इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है. इसको लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इसको मुस्लिमों के खिलाफ बता रहे हैं. हालांकि मोदी सरकार का कहना है कि इस कानून का हिंदुस्तान के मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं हैं.

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