scorecardresearch
 

ज्ञानवापी केस में कल फिर सुनवाई, हिंदू पक्ष का दावा- मुस्लिम पक्ष की नहीं, महादेव की है जमीन

मुस्लिम पक्ष की तरफ से लगाई गई याचिका पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि तकनीकी आधार पर की याचिका खारिज हो जाएगी. उन्होंने कहा, वे सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार को रिप्रेजेंट करते हैं. लेकिन यहां हिंदू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि यूपी सरकार की तरफ से उन्होंने वकालतनामा दाखिल नहीं किया.

X
ज्ञानवापी मस्जिद (फाइल फोटो) ज्ञानवापी मस्जिद (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने रखी थीं दलीलें
  • मुस्लिम पक्ष ने विष्णु जैन को हटाने के लिए दायर की याचिका

ज्ञानवापी मस्जिद केस में बुधवार को जिला जज ए.के. विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई की गई्. आज हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं. हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि 1991 का वॉरशिप ऐक्ट किसी भी तरीके से इस मामले में लागू नहीं होता है. मुस्लिम पक्ष जिस जमीन पर अपना दावा कर रहा है वो जमीन आदि विश्वेश्वर महादेव की है. उस पर जबरदस्ती नमाज पढ़ी जा रही है. फिलहाल, कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख नीयत की है. कल एक बार फिर हिंदू पक्ष अपनी दलीलें रखेगा. आज 120 मिनट तक बहस हुई. कोर्ट में वकील कमिश्नर रह चुके विशाल सिंह भी उपस्थित रहे.

हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र किया. जैन ने यह भी कहा कि लंबे समय से वहां मंदिर था. साल 1993 तक पूजा चली, जिसे बाद में रोक दिया गया. हालांकि, किसी को रोकने का हक नहीं है. सरकार ने गलत किया. उन्होंने आगे कहा कि काशी विश्वनाथ की पूरी जमीन एक ही है, जिसमें पूजा का स्थान भी है. पूजन करने का हक हिंदुओं का है, वो उन्हें मिलना चाहिए.

हिंदू पक्ष का कहना था कि जो पूजा 1947 के बाद से 1993 तक वॉरशिप एक्ट के तहत चल रही थी, उसे क्यों रोका गया. यह दावा हमारे पक्ष में है. वकील जैन ने कहा कि आज मैंने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग दिखाई, जिसमें साफ है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर यह कथित मस्जिद बनवाई. खसरा संख्या 9130 पर दोनों पक्ष एक हैं. ऐसे में यह साफ हो जाता है कि यह जगह मंदिर की है. मैं नहीं चाहता हूं कि सुनवाई लंबी चले. पोषणीयता पर जल्द फैसला होना चाहिए. कल भी बहस इस पर जारी रहेगी.

हरिशंकर जैन ने 16वीं शताब्दी का इतिहास बताया. इसके साथ ही काशी का इतिहास, वैभव काशी का हवाला दिया गया. 8 मंडप का जिक्र किया. जैन ने कहा कि सर्वे के दौरान गदा, शंख, चक्र, त्रिशूल, कमल, सूर्य के प्रमाण यह साबित करते हैं कि यह मंदिर ही है. पश्चिम में ध्वंस आराध्य स्थल में हिंदू प्रतीकों की बहुल्यता यह साबित करती है कि यही आदि विश्वेश्वर हैं.

इससे पहले मंगलवार को मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलों को पूरा कर लिया था. इसके बाद हिंदू पक्ष ने दलीलें रखी थीं. उधर, सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने नई याचिका दाखिल की है. इसमें वकील विष्णु जैन को हटाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि विष्णु जैन वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों से केस लड़ रहे हैं.

मुस्लिम पक्ष की तरफ से लगाई गई याचिका पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि तकनीकी आधार पर याचिका खारिज हो जाएगी. उन्होंने कहा, वे सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार को रिप्रेजेंट करते हैं. लेकिन यहां हिंदू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि यूपी सरकार की तरफ से उन्होंने वकालतनामा दाखिल नहीं किया. इतना ही नहीं विष्णु शंकर जैन ने कहा, ऐसे में मामले में यूपी सरकार सिर्फ एक फॉर्मल पार्टी है. अयोध्या मामले में भी ऐसा था, जो तमाम आदेशों के लागू करने को सुनिश्चित करती है. 

'ध्यान भटकाने की है साजिश'

विष्णु जैन ने कहा, उनके ऊपर साजिश के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं. ये बड़ी साजिश है, ताकि मूल मुद्दे से ध्यान भटकाया जाए. लेकिन ये कोर्ट में नहीं चलेगा. तकनीकी आधार पर मुस्लिम पक्ष की याचिका कोर्ट में खड़ी नहीं हो सकती. इस पर वे कल ही यूपी सरकार की एनओसी वह कोर्ट में दाखिल कर चुके हैं. 

आज कोर्ट में फिर सुनवाई हुई

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कल की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष की ओर से 1991 वॉरशिप और 1936 के दीन मोहम्मद केस का हवाला देते हुए उनके वकील अभय यादव ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा था. इसके बाद हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु जैन ने कल अपनी बात कोर्ट में रखी थी. आज फिर 2 बजे से सुनवाई हुई. इस दौरान हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं. 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला कोर्ट में ये सुनवाई चल रही है. मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलों में कहा कि हिंदू पक्ष का मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है और उसे खारिज कर दिया जाए. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि ज्ञानवापी मामले में प्लेसेज ऑफ वॉरशिप एक्ट (स्पेशल प्रॉविजंस), 1991 लागू होता है. मतलब 1947 में आजादी के समय धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है. वहीं, इस पर हिंदू पक्ष ने कहा कि माज पढ़ने से कोई जगह मस्जिद नहीं हो जाती. 


 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें