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यूपी: कोरोना काल में राजनीति हावी, सरकार-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप तेज

कांग्रेस का आरोप है कि 60 से ज्यादा पार्टी पदाधिकारियों को निशाना बनाया गया तो समाजवादी पार्टी का कहना कि सरकार ने उनके खिलाफ 300 से ज्यादा मुकदमे दर्ज कर दिए, जिनका कोई आधार ही नहीं है.

बस चलाने को लेकर भी सरकार और विपक्ष में हो चुकी है तकरार (फाइल फोटो) बस चलाने को लेकर भी सरकार और विपक्ष में हो चुकी है तकरार (फाइल फोटो)

  • प्रवासियों के लिए बस चलाने पर भी हो चुका है विवाद
  • प्रदेश के कई नेताओं पर लॉकडाउन तोड़ने पर मुकदमा

कोरोना संक्रमण के इस दौर में उत्तर प्रदेश में राजनीति भी जोरों पर है. एक तरफ सरकार कोरोना को परास्त करने के लिए दिन रात काम करने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ विरोधी भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि यूपी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार लॉकडाउन के दौरान विरोधियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने का रिकॉर्ड पार कर चुकी है. मुकदमे दर्ज करने से भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि मुकदमे किस आरोप में दर्ज किए गए हैं.

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने ये मुकदमे इसलिए भी दर्ज किए ताकि कोई और पार्टी गरीब, मजदूरों और मजबूर लोगों की मदद न कर सके. इस बहाने बीजेपी सरकार अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने में लगी हुई है. दरअसल, लॉकडाउन के दौरान सरकार की कोशिशों के बीच तमाम समाजसेवी संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया. उसके चलते पूरे प्रदेश में कई जगह विपक्षी पार्टियों के खाना बांटने से लेकर गरीबों की मदद करने के वीडियो सामने आए. इसमें लॉकडाउन के दौरान लगी धारा 144 और महामारी एक्ट के उल्लंघन की बात भी साबित होती है.

इसी के आधार पर सरकार ने पूरे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों समेत जिलाध्यक्षों और नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए. कांग्रेस का आरोप है कि 60 से ज्यादा पार्टी पदाधिकारियों को इस बहाने निशाना बनाया गया तो समाजवादी पार्टी का कहना कि सरकार ने उनके खिलाफ 300 से ज्यादा मुकदमे दर्ज कर दिए, जिनका कोई आधार ही नहीं है.

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बहरहाल सरकार का इसमें अलग पहलू है. सरकार का कहना है कि सिर्फ मीडिया में दिखने और लाइमलाइट के लिए पार्टी के लोग बाहर निकलते हैं और नियमों का उल्लंघन करते हैं. ऐसे में जो हुआ है, कानून के आधार पर हुआ है. हाल के दिनों में तमाम तस्वीरें ऐसी आईं जिसमें बीजेपी के कई नेता और मंत्री नियमों का उल्लंघन करते नजर आए, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. चाहे वे मंत्री मोहसिन रजा के बड़ा मंगल के भंडारे में खाना बांटने का काम हो या फिर बीजेपी सांसद एसपीएस बघेल के नियम विरुद्ध भीड़ जमा करने का मामला हो. लिहाजा विपक्ष इसे सरकार की एकतरफा नीति बताकर आरोप लगा रहा है और सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है.

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