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UP: विनय पाठक के मामले में नया खुलासा, किसी और कंपनी को मिला था प्रिंटिंग का ठेका फिर भी...

अजय मिश्रा की प्रिंटिंग प्रेस में 12 घंटे की छापेमारी में UPSTF को  विश्वविद्यालय के कई प्रश्न पत्र मिले. अजय मिश्रा की प्रिंटिंग प्रेस से कानपुर विश्वविद्यालय के अलावा  10 अन्य विश्वविद्यालय के प्रश्न पत्र एसटीएफ को बरामद  हुए हैं.

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विनय कुमार पाठक
विनय कुमार पाठक

उत्तर प्रदेश की आगरा यूनिवर्सिटी में टेंडर के बदले कमीशनखोरी का मामले में फंसे कानपुर की छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी के कुलपति विनय पाठक और उसके गुर्गे अजय मिश्रा की कारगुजारियों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल, खबर है कि कानपुर यूनिवर्सिटी के प्रश्न पत्र प्रिंटिंग का ठेका हरियाणा की कंपनी  Solitaire Printo Tech को दिया गया था लेकिन इसके बावजूद प्रिंटिंग का काम अजय मिश्रा के प्रिंटिंग प्रेस XLICT में हो रहा था. 

इंदिरा नगर थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव में मौजूद अजय मिश्रा की प्रिंटिंग प्रेस में 12 घंटे की छापेमारी में UPSTF को  विश्वविद्यालय के कई प्रश्न पत्र मिले. अजय मिश्रा की प्रिंटिंग प्रेस से कानपुर विश्वविद्यालय के अलावा  10 अन्य विश्वविद्यालय के प्रश्न पत्र एसटीएफ को बरामद  हुए हैं.

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि कानपुर की छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC) विनय कुमार पाठक के खिलाफ सबसे पहले बिल पास करने के नाम पर कमीशन की रकम वसूलने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी. लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में विनय के खिलाफ 15 पर्सेंट कमीशन लेने जैसी शिकायतों पर केस दर्ज हुआ है. ये कमीशन खोरी का मामला उन्हें मिले आगरा की अंबेडकर यूनिवर्सिटी के अतिरिक्त प्रभार के दौरान का है.

यह पूरा मामला आगरा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हुए प्रिंटिंग वर्क में कमीशन से जुड़ा है. इंदिरा नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाने वाले डिजिटल टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डेविड एम डेनिस ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी 2014 से एग्रीमेंट के तहत आगरा विश्वविद्यालय में प्री और पोस्ट एग्जाम का काम करती है. विश्वविद्यालय के एग्जाम पेपर छापना, कॉपी को एग्जाम सेंटर से यूनिवर्सिटी तक पहुंचाने का पूरा काम इसी कंपनी के द्वारा किया जाता रहा है. साल 2019 में एग्रीमेंट खत्म हुआ तो डिजिटेक्स टेक्नोलॉजी ने यूपीएलसी के जरिए आगरा विश्वविद्यालय का काम किया.

साल 2020 से 21 और 21- 22 में कंपनी के द्वारा किए गए काम का करोड़ों रुपये बिल बकाया हो गया था. इसके बाद जनवरी 2022 में  आगरा के अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार विनय कुमार पाठक को मिला तो उन्होंने बिल पास करने के एवज में कमीशन की मांग की. आरोप है कि एफआईआर दर्ज कराने वाले डेविड डेनिस ने फरवरी 2022 में कानपुर स्थित विनय पाठक के सरकारी आवास पर मुलाकात की थी जहां पर उन्होंमे 15 फीसदी कमीशन की डिमांड की थी.

 

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