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'सियासत करने वाले दूर रहें, मस्जिद सिर्फ इबादत के लिए'

शहर इमाम आरिफ उल हक के मुताबिक बागपत की 550 मस्जिदों और 143 मदरसों में राजनीतिक दलों की ओर से इमदाद के नाम पर दिए जाने वाले चंदे पर भी रोक लगा दी गई है.

उलेमाओं की बैठक में फैसला उलेमाओं की बैठक में फैसला

चुनावों में मजहब के आधार पर वोटों की बिसात बिछाने से कुछ राजनीतिक दल बाज नहीं आते. सुप्रीम कोर्ट ने बीते हफ्ते एक अहम फैसला भी दिया था कि 'धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगा जाना चुनाव कानून प्रावधान के तहत भ्रष्ट तरीका है. मजहब के आधार पर वोट मांगने वालों के खिलाफ अब बागपत के उलेमाओं ने भी अहम कदम उठाया है. बागपत-बड़ौत के शहर इमाम ने एलान किया है कि मस्जिद में आकर फोटो खिंचाकर मुस्लिमो को अपने पक्ष में करने के दावा करने वालों पर मस्जिद में आने की मनाही रहेगी, अगर मस्जिद में आऩा है तो सिर्फ इबादत के लिए आएं.

शहर इमाम आरिफ उल हक के मुताबिक बागपत की 550 मस्जिदों और 143 मदरसों में राजनीतिक दलों की ओर से इमदाद के नाम पर दिए जाने वाले चंदे पर भी रोक लगा दी गई है. बागपत की फूंस वाली मस्जिद में उलेमाओं की बैठक के बाद शहर इमाम ने ये एलान किए. उलेमाओं का कहना था कि नफरत फैलाने वाले किसी कीमत पर मंजूर नहीं किए जाने चाहिए.

उलेमाओं का ये भी कहना था कि लोगों को वोट देते समय पार्टी को नहीं प्रत्याशी को देखना चाहिए, उसके पुराने इतिहास पर गौर करना चाहिए. जो उम्मीदवार सभी को साथ लेकर चलता हो, वोट उसे ही दिया जाना चाहिए फिर वो चाहे किसी भी दल का क्यों ना हो? बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन मंगलवार से शुरू हो रहे हैं. बागपत में पहले चरण में ही 11 फरवरी को मतदान होना है.

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