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कोयले की कमी और GST की मार, यूपी में एक साल तक बंद रहेंगे ईंट-भट्ठे

उत्तर प्रदेश ब्रिक्स एसोसिएशन ने कोयले की कीमतों में 200 से 300 फीसदी की बढ़ोतरी और जीएसटी बढ़ाए जाने के बाद ईंट भट्ठों को बंद करने का फैसला किया है. उत्तर प्रदेश में अक्तूबर 2022 से सितंबर 2023 तक ईंट भट्ठे बंद रहेंगे. दरअसल, उत्तर प्रदेश को प्रतिवर्ष 12 लाख टन कोयला मिलना था, लेकिन पिछले चार सालों में महज 76 हजार टन कोयला मिला है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इस साल अक्टूबर से बंद हो जाएंगे ईंट भट्ठे
  • कोयले की कीमत और GST बढ़ाए जाने का विरोध

उत्तर प्रदेश में मकान बनवाने वालों के सामने बड़ा संकट खड़ा होने वाला है, क्योंकि प्रदेश के ईंट भट्ठे एक साल के लिए बंद होने वाले हैं. ईंटों पर जीएसटी बढ़ाए जाने से यूपी ब्रिक्स एसोसिएशन नाराज है. एसोसिएशन ने कोयले की कीमतों में 200 से 300 फीसदी की बढ़ोतरी और जीएसटी बढ़ाए जाने के बाद ईंट भट्ठों को बंद करने का फैसला किया है. 

दरअसल, उत्तर प्रदेश को प्रतिवर्ष 12 लाख टन कोयला मिलना था, लेकिन पिछले चार सालों में महज 76 हजार टन कोयला मिला है. विदेश से आने वाला कोयला काफी महंगा हो गया है. इसके साथ ही यूपी ब्रिक्स एसोसिएशन की सरकारी और अर्ध सरकारी निर्माण में लाल ईंट की आंशिक पाबंदी पर भी नाराजगी है. 

यूपी ब्रिक्स एसोसिएशन का कहना है कि कोयला का दाम 350 फीसदी तक बढ़ाया गया है, यहां तक कि श्रमिक संविदा पर 5 फीसदी से 12 फीसदी जीएसटी बढ़ाया गया है, दूसरी ओर थर्मल पावर प्लांट के अवशिष्ट राख से ईंट बनाने के लिए केंद्र सरकार नई तरकीब अपना रही है, जिसके तहत एक ओर जीएसटी कम कर दिया गया.

'दूसरी ओर निर्देशिका जारी कर दिया गया कि 20 हजार वर्ग फुट से अधिक के भवन निर्माण तथा सरकारी निर्माण कार्य में राख की बनी ईंट का प्रयोग अनिवार्य होगा.' यही वजह है कि ब्रिक्स एसोसिएशन ने प्रदेश और देश में एक साल तक ईंट भट्ठे बंद कर हड़ताल का निर्णय लिया है. 

उत्तर प्रदेश में अक्तूबर 2022 से सितंबर 2023 तक ईंट भट्ठे बंद रखने और देश में हड़ताल करने का निर्णय लिया है. प्रदेश में 19 हजार ईंट भट्ठे हैं, जो एक साल तक बंद रहेंगे. इसका सीधा प्रभाव मकान बनवाने वालों पर पड़ेगा. यानी आने वाले समय में ईंट के दामे आसमान छू सकते हैं. 

यूपी ब्रिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारी ने बताया कि ईंट निर्माण में उत्पादन लागत 4 गुना बढ़ गई है, इसके अलावा अब नए-नए नियम-कानून लागू किए जा रहे हैं, इन कारणों से भट्ठा मालिक आर्थिक कर्ज के तले डूब चुके हैं और ईंट निर्माण में उत्पादन लागत इतनी बढ़ गयी है कि मुन्नाफा छोड़िए, लागत मूल्य भी निकालना मुश्किल हो गया है.

 

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