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भूमि पूजन: अतिथियों के लिए डायमंड शेप में लगेंगी कुर्सियां, भव्य होगी मंच की सजावट

पूजन समारोह में आने वाले अतिथियों के बैठने के लिए तीन तरह की व्यवस्था की गई है. मुख्य पंडाल में देश भर से आने वाले धर्मगुरुओं के लिए, दूसरा वीवीआईपी के लिए और स्थानीय अतिथियों के अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारी

  • भगवान को हल्दी के साथ निमंत्रण पत्र अर्पित
  • नए पंडाल की सजावट युद्ध स्तर पर जारी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भूमि पूजन का पहला निमंत्रण श्रीरामलला विराजमान के चारों भाइयों और बाल हनुमान को दिया है. रविवार को ट्रस्ट की तरफ से करीब 3 बजे शुभ मूहूर्त में निमंत्रण पत्र को हल्दी के साथ मंदिर में चढ़ा कर भगवान राम के उपस्थित होने और पूरे समारोह को सकुशल संपन्न करने की प्रार्थना की गई. यही निमंत्रण पत्र भूमि पूजन समारोह में आने वाले अतिथियों को अयोध्या पहुंचने पर दिया जाएगा.

जन्मभूमि परिसर में समारोह के लिए लगाए गए पंडाल की सजावट युद्ध स्तर पर जारी है. पूजन समारोह में आने वाले अतिथियों के बैठने के लिए तीन तरह की व्यवस्था की गई है. मुख्य पंडाल में देश भर से आने वाले धर्मगुरुओं के लिए, दूसरा वीवीआईपी के लिए और स्थानीय अतिथियों के अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है. धर्मगुरु जैसे-जैसे परिसर में प्रवेश करेंगे, उन्हें सीटों पर पहुंचाया जाएगा.

जर्मनहैंगर पंडाल जन्मस्थान से पश्चिम दिशा में लगाया गया है. इसमें धर्मगुरु और वीवीआईपी बैठेंगे. स्थानीय अतिथियों के बैठने की व्यवस्था जन्मभूमि स्थल के पूर्व दिशा में की गई है. पंडाल में अतिथियों के लिए डायमंड शेप में कुर्सियां लगाई जा रही हैं, ताकि आतिथियों के बीच दूरी का नियम बना रहे. मंच व पंडाल को फूलों से सजाया जा रहा है.

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी के प्रवासी भारतीयों की भेजी गई ईटें भी पूजी जाएंगी. ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचने पर सबसे पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन करेंगे. यहां से जन्मभूमि परिसर पहुंच कर पहले श्रीरामलला विराजमान का दर्शन करेंगे. उसके बाद भूमि पूजन के लिए जमीन पर कुश की चटाई और गद्दी का आसन लगाया जाएगा. पूजन आसन पर प्रधानमंत्री करीब 15 मिनट रहेंगे. इसके बाद पंडाल में बने मंच पर पहुंचेंगे. यहां वे नींव पूजन में नौ ईटों की पूजा करेंगे जिसमें तीन ईटें अमेरिका, जर्मनी व ऑस्ट्रेलिया के प्रवासी भारतीयों के द्वारा भेजी गई हैं. 6 ईटें देश के विभिन्न हिस्सों से आई हुई हैं. यह ईटें ग्रेनाइट व मार्बल की होंगी.

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