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लॉकडाउन में फूलों की खेती बर्बाद, किसानों को सरकार से राहत की उम्मीद

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में फूलों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. क्योंकि सारे फूल अब खेतों में ही बर्बाद हो रहे हैं. शादी-विवाह, पर्व-त्योहार और मंदिर की शोभा बढ़ाने वाला फूल आजकल खेतों में ही सूख रहा है.

बर्बाद हो गई फूलों की खेती (फोटो-आजतक) बर्बाद हो गई फूलों की खेती (फोटो-आजतक)

  • लॉकडाउन से फूलों की खेती बर्बाद
  • किसानों को जबरदस्त नुकसान

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू है, लेकिन इस वजह से किसानों को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली से सटे गाजियाबाद में फूलों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. क्योंकि सारे फूल अब खेतों में ही बर्बाद हो रहे हैं. शादी-विवाह, पर्व-त्योहार और मंदिर की शोभा बढ़ाने वाला फूल आजकल खेतों में ही सूख रहा है. लॉकडाउन की वजह से सबकुछ बंद है. ऐसे में ना ही कोई खरीदार मिल रहा है और ना ही वो इसे बेचने बाहर ही जा पा रहे हैं.

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फूलों से पटा ये खेत और ये खिले हुए फूल अब खेत में ही मुरझाने लगे है. मंदिरों से लेकर शादी विवाह तक की शोभा बढ़ाने वाले ये फूल आज खेतों में ही दम तोड़ रहे हैं. साथ ही इसकी खेती करने वालों किसानों की जिंदगी भी चौपट हो गई है. गाजियाबाद के रावली गांव समेत अन्य कई गांव में फूलों की खेती होती है. सभी जगह पर इस बार फूलों की खेती चौपट हुई है.

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चंद्रेश शर्मा फूलों की खेती करते हैं. इन्होंने खेती करने के लिए बैंको से किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन भी लिया था. लेकिन कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने उनकी जिंदगी चौपट कर दी है. चंद्रेश शर्मा के ऊपर डेढ़ लाख रुपये के बैंक लोन का बकाया है. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इस हालात में वो बैंक का लोन कैसे चुकाएंगे. चंद्रेश अब सरकार की तरफ टकटकी लगाए देख रहे हैं कि शायद वहीं से उन किसानों को कोई राहत मिल जाए.

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चंद्रेश शर्मा की तरह दूसरे किसान जग मोहन शर्मा की भी वही कहानी है. इन्होंने भी बैंको से किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 60,000 का लोन लिया था. लेकिन लॉकडाउन की वजह से इनकी भी खेती चौपट हो गई है. यहां पूरे इलाके में फूलों की खेती होती है, जो बाद में साहिबाबाद और गाजीपुर फूल मंडी पहुंचता है. लेकिन लगभग एक महीने से लॉकडाउन ने सबकुछ बर्बाद कर दिया है. कईयों ने लोन ले रखा है लेकिन मुश्किल है कि इस बार किसानों का सूद तक नहीं निकल पाया है, लागत तो बहुत दूर की बात है.

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