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कोरोना पर रार! AAP के आरोप पर BJP का दावा- बेड की कमी के चलते दिल्ली से नोएडा आ रहे मरीज

गौतमबुद्धनगर के जेवर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक धीरेंद्र सिंह ने का कहना है कि दिल्ली के अस्पतालों में मुश्किल से बेड उपलब्ध हैं और कई कोविड-19 मरीजों को नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे सैटेलाइट शहरों में भर्ती होना पड़ रहा है.

दिल्ली एनसीआर में कोरोना के मामले बढ़  रहे हैं.(सांकेतिक तस्वीर) दिल्ली एनसीआर में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं.(सांकेतिक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में कोरोना को लेकर AAP-BJP आमने सामने
  • नोएडा में कोरोना को लेकर रैंडम जांच शुरू
  • दिल्ली सरकार ने 411 नए ICU बेड्स तैयार किए

दिल्ली में कोविड-19 केसों की बढ़ी संख्या की वजह से हेल्थकेयर सिस्टम दबाव में है. यहां के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में बेड्स की कमी महसूस की जा रही है. दिल्ली सरकार बेड्स की संख्या बढ़ाने के लिए कोशिश कर रही है. लेकिन इसी बीच, कोविड-19 को लेकर राजनीति बयानबाजी भी पूरे उफान पर है. दिल्ली से सटे यूपी के गौतमबुद्धनगर जिले के एक बीजेपी विधायक ने दावा किया है कि दिल्ली में बेड की कमी की वजह से राष्ट्रीय राजधानी के मरीजों को इलाज के लिए आसपास के शहरों का रुख करना पड़ रहा है.

दरअसल, दिल्ली से आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने हाल में दिल्ली में बढ़ते केसों की संख्या को देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के लिए यूपी और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली में भर्ती मरीजों में आधे से अधिक यूपी और हरियाणा से हैं.

अब गौतमबुद्धनगर के जेवर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक धीरेंद्र सिंह ने पलटवार में कहा है कि दिल्ली के अस्पतालों में मुश्किल से बेड उपलब्ध हैं और कई कोविड-19 मरीजों को नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे सैटेलाइट शहरों में भर्ती होना पड़ रहा है. 

सिंह ने कहा, “दिल्ली के विधायक की ओर से लगाए गए आरोप काल्पनिक हैं. उत्तर प्रदेश में दिल्ली की तुलना में कोविड-19 रोगियों के लिए बेहतर सुविधाएं है. इसीलिए दिल्ली के 70 से अधिक मरीजों को यहां विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.” सिंह के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार की कोशिशों की तारीफ की है.  

सिंह ने दावा किया कि दिल्ली की तुलना में यूपी में यहां आबादी के हिसाब से टेस्टिंग का अनुपात ज्यादा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली की आबादी 2 करोड़ है और हर दिन 72,000 टेस्ट किए जा रहे हैं. वहीं गौतमबुद्धनगर जिले (नोएडा, ग्रेटर नोएडा) की आबादी 20 लाख है और यहां हर दिन प्रशासन की ओर से हर ही 5,000 से अधिक टेस्ट हो रहे हैं. इसके अलावा 2,000 से 3,000 लोगों का टेस्ट प्राइवेट फर्म्स की ओर से हो रहा है. साथ ही गैर कोविड अस्पतालों में भी सैकड़ों लोगों के टेस्ट हो रहे हैं.

सिंह के मुताबिक जिले में प्रशासन की ओर से किए जा रहे 5,000 टेस्ट्स में से, 3,500 एंटीजन टेस्ट हैं जिनका पॉजिटिव रेट 1.5% है. बाकी 1,500 RT-PCR टेस्ट हैं, जिनका पॉजिटिव रेट करीब 10 फीसदी है. हमारे पास, 2,281 बेड्स कोविड मरीजों के लिए आरक्षित हैं जिनमें से 770 ही भरे हुए हैं. लगभग 400 लोग घरों में आइसोलेशन है. शहर का रिकवरी रेट 99.5 प्रतिशत है, जो दिल्ली की तुलना में बेहतर है.

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दिल्ली में कोविड-19 केसों में तेज उछाल के बाद में नोएडा प्रशासन ने दिल्ली-नोएडा सीमा पर यात्रियों का रैंडम टेस्ट कराना भी शुरू कर दिया.इससे पहले, दिल्ली के आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने हाल ही में दावा किया था कि दिल्ली में भर्ती होने वाले कोविड-19 मरीजों में से आधे से अधिक उत्तर प्रदेश और हरियाणा से है. भारद्वाज के मुताबिक दिल्ली ऐसे मरीजों को क्वालिटी हेल्थकेयर देने के लिए तैयार है लेकिन ये उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों की विफलता का प्रमाण है.

इस बीच, दिल्ली में कोरोना के बढ़ते केसों के बीच ICU बेड्स की कमी की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बीते 5 दिन में कोरोना के 411 नए ICU बेड्स तैयार किए हैं.17 नवंबर को 29 बेड, 18 नवंबर को 100 बेड, 19 नवंबर को 76 बेड और 21 नवंबर को 206 ICU बेड जोड़े गए हैं. ये ICU बेड्स केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों के अस्पतालों में जोड़े गए हैं.
 

 

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