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प्रतापगढ़: आजतक की खबर से टूटी प्रशासन की नींद

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एड्स पीड़ित मां-बाप की मौत के बाद परिजनों के तिरस्कार से कब्र के पास रह रहे बच्चों को प्रशासन ने मीडिया में खबर चलने के बाद जो जगह दी थी वो विवादित निकली. विवादित जमीन के मुद्दे को आजतक ने प्रमुखता से दिखाया और इसके बाद प्रशासन की नींद टूटी.

पीडि़त बच्ची पीडि़त बच्ची

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एड्स पीड़ित मां-बाप की मौत के बाद परिजनों के तिरस्कार से कब्र के पास रह रहे बच्चों को प्रशासन ने मीडिया में खबर चलने के बाद जो जगह दी थी वो विवादित निकली. विवादित जमीन के मुद्दे को आजतक ने प्रमुखता से दिखाया और इसके बाद प्रशासन की नींद टूटी. प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच की तो अनाथ बच्चों को दी गयी जमीन पर किसी और का मालिकाना हक निकला और उस पर मुकदमा भी चल रहा था. इसके बाद दूसरी जमीन ढूंढ़कर बच्चों को दी गई.

दरअसल मान्धाता गांव के जमुआ गांव के बच्चे अपने माता-पिता की एड्स से हुई मौत के बाद कब्र के पास एक पन्नी के नीचे गुजर-बसर कर रहे थे. मीडिया में खबर आने के बाद इनकी पीड़ा से बेखबर जिला प्रशासन नींद से तो जागा पर आनन-फानन में इन्हें रहने के लिए वह जमीन पट्टे पर दे दी, जिसका गांव की मुस्लिम महिला के नाम पट्टा था. यही नहीं इस जमीन पर गांव के ही सर्वेश नाम के व्यक्ति ने अदालत में मुकदमा भी दर्ज किया था, जिस पर अदालत ने स्थगन आदेश भी जारी किया है. प्रशासन की इस पहल ने बच्चों की मदद की बजाय उन्हें विवाद में धकेल दिया था. मामले की जांच की गयी तो प्रशाशन की चूक सामने आई और वह जमीन सर्वेश की निकली जिसका कोर्ट में केस विचाराधीन है. इसके बाद दूसरी जमीन देखकर बच्चों को दे दी गयी.

फिलहाल देर से सही लेकिन समय रहते प्रशासन नींद से जागा और अपनी भूल सुधारते हुए बच्चों को एक नया आशियाने के लिए दूसरी जमीन पट्टे पर दे दी गई है. फिलहाल बच्चों को दी गयी विवादित जमीन से एक बात तो साफ है कि प्रशासनिक अधिकारी अपने कार्यों के प्रति कितने उदासीन हैं और मुख्यमंत्री चाहे जितनी कोशिश कर लें लेकिन अधिकारी सुधरने वाले नहीं हैं.

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