scorecardresearch
 

महिलाओं की प्रताड़ना से गुस्साए पुरुषों ने राजनीतिक पार्टियों को दी चेतावनी

पति द्वारा पत्‍नी को प्रताड़ित करने की बात तो आपने खूब सुनी होगी, लेकिन क्‍या कभी किसी पति को यह कहते सुना है कि उसकी पत्‍नी उसे प्रताड़ित करती है? या फिर यह कि कोई पुरुष महिला की प्रताड़ना का शिकार है? यूपी में महिलाओं से प्रताड़ित ऐसे ही पुरुषों ने एक संगठन बनाया है, जिसे 'कोलिशन ऑफ मेन' का नाम दिया गया है.

Symbolic Image Symbolic Image

पति द्वारा पत्‍नी को प्रताड़ित करने की बात तो आपने खूब सुनी होगी, लेकिन क्‍या कभी किसी पति को खुलेआम यह कहते हुए सुना है कि उसकी पत्‍नी उसे प्रताड़ित करती है? या फिर यह कि कोई पुरुष महिला की प्रताड़ना का शिकार है? घर के भीतर भले ही बड़ी संख्‍या में पुरुष इसे स्‍वीकार भी कर लें, लेकिन सड़क पर इस बारे में आवाज उठाने की पहल यूपी में हुई है.

हो सकता है यह सब आपको अक्षय कुमार-प्रियंका चोपड़ा की फिल्‍म 'एतराज' की कहानी लग रही हो, लेकिन यह कहानी फिल्‍मी पर्दे से इतर असल जिंदगी की है. उत्तर प्रदेश में अपनी पत्नियों और महिलाओं से प्रताड़ित ऐसे ही पुरुषों ने एक संगठन बनाया है, जिसे 'कोलिशन ऑफ मेन' का नाम दिया गया है.

पुरुषों के इस संगठन की मांग है कि नेशनल कमीशन फोर वुमन की तर्ज पर नेशनल कमीशन फोर मेन का भी गठन किया जाए. और इसके तहत उन पुरुषों के साथ न्‍याय किया जाए जो महिलाओं द्वारा प्रताड़ित हैं. संगठन कमीशन के माध्‍यम से उन लोगों की मदद की मांग भी कर रहा है, जिन्‍हें महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून के तहत गलत केस में फंसाया गया है.

नहीं तो बनाएंगे अपनी पार्टी
दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी की सफलता के बाद पुरुषों के इस संगठन ने प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों को चेतावनी दे दी है. संगठन की मांग है सभी राजनीतिक पार्टियां पुरुषों के लिए कमीशन की मांग को अपने इलेक्‍शन मेनिफेस्‍टो में शामिल करे. संगठन ने इस बाबत पार्टियों को चेतावनी दी है कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो वह खुद अपनी पार्टी बनाएंगे और चुनाव में अपने उम्‍मीदवार खड़ा करेंगे.

खास बात यह है कि अब तक 'कोलिशन ऑफ मेन' नाम के इस संगठन से 50 से अधिक संगठन जुड़ गए हैं, जिनमें कई एनजीओ और सोशल वर्कर शामिल हैं. जाहिर है चुनाव से ठीक पहले यूपी में राजनीतिक दलों के लिए यह एक नई मुसीबत बनकर आई है.

'कोलिशन ऑफ मेन' के सदस्‍य इंदु सुभाष कहते हैं, 'हमने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन से लेकर पब्लिक मीटिंग तक सबकुछ किया, लेकिन हमें कोई लाभ नहीं मिला. ऐसे में अब हमने राजनीतिक पार्टियों की ओर रूख किया है. अगर वे अपने मेनिफेस्‍टो में पुरुषों के लिए कमीशन की मांग शामिल नहीं करते हैं तो मार्च-अप्रैल में हम अपनी पार्टी लॉन्‍च कर देंगे.'

94 फीसद दहेज प्रताड़ना के केस गलत होते हैं
संगठन के जुड़े एक अन्‍य सदस्‍य आरके वर्मा कहते हैं, 'सुप्रीम कोर्ट का भी यह कहना है कि दहेज प्रताड़ना के तहत दर्ज मामलों में से 94 फीसद गलत होते हैं. कानून बनाने वालों को यह समझना चाहिए कि वोट की खातिर हमने जो नियम बनाए हैं वह ठीक नहीं है. ऐसे में राजनीति पार्टियों को हमारी मांग को मानना ही होगा.'

...तो पार्टी को करेंगे सपोर्ट
पुरुषों के इस संगठन का कहना है कि जो भी पार्टी अपने मेनिफेस्‍टो में नेशनल कमीशन की मांग को शामिल करेगी, संगठन और उससे जुड़े सदस्‍यों का उस पार्टी को पूरा समर्थन मिलेगा. संगठन का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जो नियम बनाए गए हैं, वह अपनी जगह ठीक हो सकते हैं. लेकिन इसके कारण समाज में एक तरह का पूर्वाग्रह आ गया है. गलत मामलों में भी यहां पुरुषों को तुरंत गुनहगार मान लिया जाता है फिर चाहे वह निर्दोष ही क्‍यों ना हो.

संगठन का दावा है कि अब तक 1 करोड़ से अधिक पुरुष ऐसे हैं, जिन्‍हें दहेज प्रताड़ना और ऐसे तमाम मामलों में गलत तरीके से फंसाया गया है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें