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ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी की पूजा के दौरान दीपदान की तस्वीरें आईं सामने

माता शृंगार गौरी की पूजा पाठ से जुड़ी तस्वीरें सामने आई हैं. काशी सत्संग मंडल द्वारा हर साल माघ के महीने में नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन होता है

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श्रद्धालु पूजा करते हुए
श्रद्धालु पूजा करते हुए

एक तरफ जहां वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित मस्जिद और श्रृंगार गौरी के मामले को लेकर न्यायालय में सुनवाई चल रही है. वहीं दूसरी तरफ माता शृंगार गौरी की पूजा पाठ से जुड़ी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं. ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी की पूजा की अनुमति साल में सिर्फ एक बार शारदीय नवरात्र के चतुर्थी के दिन ही मिलती है. जिस दिन श्रद्धालु पूजा अर्चना और आरती करते हैं. लेकिन इसके अलावा माघ के महीने में भी श्रृंगार गौरी की पूजा की जाती है और इस दौरान माता श्रृंगार गौरी के समक्ष भव्य तरीके से दीपदान भी किया जाता है.

हर साल माघ महीने में राम कथा का आयोजन
दरअसल, ज्ञानवापी परिसर में काशी सत्संग मंडल द्वारा हर साल माघ के महीने में नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन होता है. इस कार्यक्रम के आखरी दिन माता श्रृंगार गौरी की पूजा, आरती और दीपदान का आयोजन किया जाता है. इस कार्यक्रम के लिए रामकथा के इस कार्यक्रम के लिए जिला प्रशासन बाकायदा परमिशन देता है. 

पूजा करते श्रद्धालु
पूजा करते श्रद्धालु


शृंगार गौरी की पूजा होती है
हालांकि श्रृंगार गौरी की पूजा की परमिशन लिखित रूप में नहीं मिलती है. लेकिन रामकथा के दौरान ज्ञानवापी परिसर में जुटे श्रद्धालुओं द्वारा शृंगार गौरी की भी पूजा की जाती है. इस दौरान न सिर्फ श्रृंगार गौरी की पूजा और आरती की जाती है बल्कि उस स्थान पर भव्य तरीके से दीपदान भी किया जाता है. ये तस्वीरें इसी साल के 16 फरवरी की हैं. जब काशी सत्संग मंडल वाराणसी द्वारा राम कथा का आयोजन किया गया था और कार्यक्रम के आखरी दिन माता शृंगार गौरी की पूजा के साथ-साथ दीपदान भी किया गया था.

दीपदान करते श्रद्धालु
दीपदान करते श्रद्धालु

64 सालों से लगातार नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए काशी सत्संग मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि ज्ञानवापी परिसर में काशी सत्संग मंडल द्वारा पिछले 64 सालों से लगातार नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया जाता रहा है. इस नौ दिवसीय आयोजन के दौरान ही 1 दिन माता सिंगार गौरी की भव्य आरती की जाती है साथ ही साथ दीपदान भी किया जाता है.

 

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