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'मैं जिंदा हूं...' का सबूत लेकर घूम रहे बुजुर्ग की दर्दभरी दास्तां, बहू ने मरा हुआ बताकर बेच दिया करोड़ों का मकान

बुजुर्ग का आरोप है कि उनके छोटे बेटे संदीप की पत्नी अपर्णा ने उन्हें मरा हुआ बताकर घर बेच डाला. बुजुर्ग ने कहा कि मैंने अपने घर को कभी बेचा ही नहीं है. छोटे बेटे को मैंने मकान में सिर्फ नॉमिनी बनाया था.

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अब बुजुर्ग दे रहे जिंदा होने का सबूत अब बुजुर्ग दे रहे जिंदा होने का सबूत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ससुर को मरा हुआ बताकर बहू ने बेच दिया मकान
  • तख्ती लटका कर बुजुर्ग दे रहे जिंदा होने का सबूत

यूपी के कानपुर में 70 साल के बुजुर्ग को अपने जिंदा होने का सबूत खुद देना पड़ रहा है. बुजुर्ग सीने पर 'मैं जिंदा हूं' की पेंटिंग लगाए धरने पर बैठे हुए हैं क्योंकि उन्हें मरा हुआ बताकर उनकी बहू ने मकान बेच दिया, जबकि वो मकान खुद बुजुर्ग ने ही खरीदा था और वो उसी में रह भी रहे हैं.

सबसे बड़ी हैरानी की बात ये है कि पुलिस उल्टे बुजुर्ग के खिलाफ ही मकान कब्जाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर उसे खाली करने के लिए दबाव बना रही है. बुजुर्ग का कहना है कि उन्होंने कभी अपना मकान बेचा ही नहीं है. उनका आरोप है कि बहू मकान बेचकर कन्नौज चली गई है.

गले में 'मैं जिंदा हूं' की तख्ती लटकाए इस बुजुर्ग का नाम शिव कुमार शुक्ला है जो न्याय की गुहार लगाने के लिए पुलिस कमिश्नर ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं. बुजुर्ग  शिव कुमार शुक्ला ने अपने हाथों में, 'फर्जी मुकदमा वापस लो', मुझे न्याय दो की तख्तियां भी ले रखी हैं.

उन्होंने कहा,  2019 में बेटे की मौत हो गई, उसके बाद भी मैं उसी मकान में रहता था. मेरी बहू अपर्णा मुझे मृत दिखाकर करोड़ों रुपये के घर को सिर्फ 50 लाख रुपये में दिनेश बाजपेई नाम के शख्स को बेचकर कन्नौज भाग गई.

बुजुर्ग ने कहा, इसके बाद जब मुझे इसकी जानकारी हुई तो मैंने एसडीएम कोर्ट और नगर निगम में अपील की, जहां दोनों जगह मुझे ज़िंदा माना गया. इस नाते मेरा मकान बिकना ही फर्जीवाड़े का केस बनता है.

उन्होंने आरोप लगाया कि रायपुरवा थाने की पुलिस बहू को पकड़ने की जगह मेरे खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली है और कहा जा रहा है कि मैंने मकान पर कब्जा कर लिया है, जबकि मकान मेरा ही है.

शिव कुमार शुक्ला विक्टोरिया मिल में सेल्स मैनेजर थे और उन्होंने साल 1997 में ये मकान खरीदा था. उनके दो बेटे संदीप और अनूप थे, अनूप अपनी पत्नी के साथ दूसरे मकान में रहते हैं जबकि छोटा बेटा संदीप उन्हीं के साथ रहता था, इसलिए उन्होंने उसे मकान में नॉमिनी भी बनाया था.

शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि साल 2019 में उनके बेटे की मौत हो गई, जिसके बाद बहू मुझे मरा हुआ बताकर चुपचाप मकान बेच कर कन्नौज चली गई.

उन्होंने कहा, संपत्ति में नॉमिनी की हिस्सेदारी तभी मानी जाती है जब उस संपत्ति के असली मालिक की मौत हो जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सभी अधिकारियों से मिला लेकिन कोई उनके मामले की सुनवाई नहीं कर रहा है इसीलिए अब सीने पर ज़िंदा होने का सबूत लटका रखा है.

वहीं बुजुर्ग के धरने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया, पुलिस अधिकारी बुजुर्ग को समझाकर अपने ऑफिस ले गए. इस मामले को लेकर एसीपी त्रिपुरारी पांडे ने कहा कि बुजुर्ग की शिकायत सुनकर अब पूरी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें न्याय दिलाया जाएगा.

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