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'अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं...कहां लेने जाएं', लखनऊ की एक बेटी का दर्द

लखनऊ में बुधवार को पूरे दिन ऑक्सीजन को लेकर अफरातफरी रही. अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी का नोटिस चिपकाकर अपना पल्ला झाड़ लिया, लेकिन मरीजों और तीमारदारों की सांसें अटक गईं.

सिर्फ यूपी ही नहीं दिल्ली, गुजरात समेत सभी राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत है (प्रतीकात्मक तस्वीर) सिर्फ यूपी ही नहीं दिल्ली, गुजरात समेत सभी राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत है (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • UP के शहरों में ऑक्सीजन की किल्लत
  • मरीजों की टूट रही सांसें, तीमारदार परेशान

कोरोना मरीजों की जान ले रहा या फिर बदइंजामी की मार से लोगों की सांसें उखड़ रही हैं. यूपी के कई शहरों का हाल यही है. राजधानी लखनऊ में कल पूरे दिन ऑक्सीजन को लेकर अफरातफरी रही. अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी का नोटिस चिपकाकर अपना पल्ला झाड़ लिया, लेकिन मरीजों और तीमारदारों की सांसें अटक गईं.

कोविड से तो लड़ भी लेंगे लेकिन सिस्टम में समा चुके वायरस का क्या इलाज है? यूपी की एक बिटिया का सवाल लखनऊ के मेयो अस्पताल के बाहर कल लगाए गए एक नोटिस को लेकर है, जिसमें कहा गया कि अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत है, कृपया अपने मरीजों को कहीं और लेकर जाएं. 

दरअसल, निजी अस्पताल मेयो को यूपी सरकार ने कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया है. इस बेटी के पिता का अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं एक महिला की आंखों के आगे भी अंधेरा छाया है. किडनी के मरीज पति ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं. ऑक्सीजन की किल्लत की खबर मानो उम्मीदों पर वज्रपात की तरह आ गयी.

लखनऊ में अस्पतालों के बाहर दर्द की अनगिनत कहानियां बिखरी हुई हैं. ऑक्सीजन की कमी और अस्पतालों की बदइंतजामी लोगों को बदहवाश कर रही है. एक युवक ने आजतक से बात करते हुए कहा कि दो दिन से कॉल कर रहा हूं, कोई फोन नहीं उठाता, दो बजे डेथ हो गई. अस्पताल की बदइंतजामी से इन्होंने अपना पिता खो दिया. 

आजतक से बात करते हुए एक युवती ने अपना दर्द सुनाया. युवती ने कहा कि ससुर अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन अस्पताल ने ऑक्सीजन की किल्लत पर हाथ खड़े कर दिए हैं, मरीज का ऑक्सीजन लेवल कल 60 तक गिर गया था, अस्पताल कहता है खुद जाओ.

लखनऊ के तमाम अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत से बुरी स्थिति है. मरीजों की अपनी परेशानी है कि वो अचानक मरीज को कहां शिफ्ट करें. दूसरी तरफ अस्पताल की अपनी चिंता कि ऑक्सीजन नहीं है तो वो क्या कहें. लखनऊ की तरह कानपुर के हैलट अस्पताल का हाल भी बुरा है. ऑक्सीजन न मिलने से शहर के सबसे बड़े अस्पताल में पैतीस साल के युवक ने दमतोड़ दिया और अस्पताल की पीआरओ को पता तक नहीं.

जब राजधानी लखनऊ और कानपुर जैसे शहर का ये हाल है तो बाकी शहरों का क्या हाल होगा. शाहजहांपुर के अस्पताल में एक युवक के पिता भर्ती थे. आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मरीज की सेहत को लेकर बेटे को हमेशा में अंधेरे में रखा और अचानक खबर दे दी कि मरीज की मौत हो गई है.

 

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