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कोरोना और लॉकडाउन ने अयोध्या में बदल दीं बरसों पुरानी परंपराएं, अखाड़ों में दिखा सन्नाटा

जब आजतक की टीम निर्मोही अखाड़ा पहुंची तो महंत दिनेन्द्र दास के शिष्यों और सुरक्षा में लगे गनर ने बताया कि कोरोना वायरस के दौरान महाराज जी किसी से नही मिलेंगे. इसके बाद आजतक की टीम उसके नजदीक स्थित दिगंबर अखाड़ा पहुंची तो अखाड़े के भीतर अधिकतर साधु संत अपने कमरों में बंद दिखाई दिए. अखाड़े में पूरी तरह सन्नाटा ही छाया दिखाई दिया.

अयोध्या के अखाड़ों में हो रहा है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अयोध्या के अखाड़ों में हो रहा है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

  • आजतक की टीम ने लिया अयोध्या के अखाड़ों का जायजा
  • अयोध्या के अखाड़ों में भी साफ दिख रहा कोरोना का असर

कोरोना वायरस के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लॉकडाउन की घोषणा के बाद अयोध्या में काफी कुछ बदल गया है. पहले रामनवमी मेला और रामजन्मोत्सव पर अयोध्या के अधिकतर मंदिरों के कपाट बंद रहे और जिन मंदिरों के कपाट खुले वहां भी भक्तों के बिना पुजारी ही पूजा-पाठ करते दिखाई दिए.

अब बात करें अखाड़ों की जहां सामूहिक भोजन और रहने की परंपरा रही है, वहां भी सबकुछ बदल गया है. अयोध्या में मुख्य रूप से निर्मोही अखाड़ा, दिगंबर अखाड़ा और निर्वाणी अनी अखाड़ा है. अधिकतर अखाड़े सूने दिखाई देते हैं. यहां रहने वाले साधु-संत बाहर रहने के बजाय भीतर ही कमरों में एक-दूसरे से दूरी बनाकर रहते हैं. यहां तक कि बाहर से कोई आए तब भी मिलने से अधिकतर परहेज ही करते हैं.

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यही कारण रहा कि जब आजतक की टीम निर्मोही अखाड़ा पहुंची तो महंत दिनेन्द्र दास के शिष्यों और सुरक्षा में लगे गनर ने बताया कि कोरोना वायरस के दौरान महाराज जी किसी से नही मिलेंगे. इसके बाद आजतक की टीम उसके नजदीक स्थित दिगंबर अखाड़ा पहुंची तो अखाड़े के भीतर अधिकतर साधु संत अपने कमरों में बंद दिखाई दिए. अखाड़े में पूरी तरह सन्नाटा ही छाया दिखाई दिया.

आपको बता दें कि यह वही अखाड़ा है जहां अपने अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जाना कभी नहीं भूले. महंत सुरेश दास कहते हैं कि प्रधानमंत्री के लॉकडाउन की घोषणा के बाद अखाड़े में बहुत सी व्यवस्थाएं बदल गई हैं. अखाड़े में सामूहिक रूप से भोजन और रहने की परंपरा रही है लेकिन अब साधु-संत प्रसाद पाने (खाना खाने) के दौरान भी आपस में दूरी बनाकर बैठते हैं और रहते भी दूरी बनाकर हैं, पूजा-पाठ भी एक दूसरे से दूरी बनाकर करते हैं.

उन्होंने कहा कि क्या करें डॉक्टर और प्रधानमंत्री दोनों कह रहे हैं कि आपस में दूरी बनाना है, खुद के साथ देश को बचाना है. इसलिए उनकी कही बातों के अनुसार अखाड़े के व्यवस्था में भी परिवर्तन किया है. यहां तक कि बाहर से आने वाले लोगों का प्रवेश भी बिना हाथ-पैर धोए और सैनिटाइज किए नहीं होता है.

अब बात करें निर्वाणी अनी अखाड़े की तो इस अखाड़े के द्वारा ही अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी का संचालन किया जाता है. इसके अंतर्गत अलग-अलग पट्टियां है जो बारी-बारी सारी व्यवस्था देखती है.

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अखाड़े के महंत धर्मदास कहते हैं कि अखाड़े की व्यवस्था में बहुत कुछ बदल गया है. अखाड़ा मतलब सामूहिक रहन-सहन, खान-पान और पूजा-पाठ. लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब अखाड़े के साधु-संत सभी आपस में दूरी बनाकर रहते हैं, दूर-दूर रहकर प्रसाद पाते हैं. हां पूजा-पाठ पहले से ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि अब कहीं जाना नहीं होता, बाहर से कोई आता नहीं, इसलिए भगवान के पूजा-पाठ में ही अधिकतर समय कट रहा है.

हम इसे यूं भी कह सकते हैं कि कोरोना वायरस ने ना सिर्फ लोगों में डर और बचाव की भावना जागृत की है, बल्कि सदियों से चली आ रही कई व्यवस्थाओं को भी बदल कर रख दिया है. इसी में अयोध्या के मठ-मंदिरों और अखाड़ों की व्यवस्था भी है. जहां न सिर्फ व्यवस्थाओं में कई बदलाव हुए हैं बल्कि यहां के साधु-संत उसी गंभीरता से प्रधानमंत्री और डॉक्टरों के द्वारा बताए गए बचाव के उपायों के अनुपालन में जुटे हैं जितना आम भारतीय, या यूं कहें उससे भी अधिक.

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