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बिकरू कांडः कहां तक पहुंची तफ्तीश, हुआ क्या एक्शन... 2 साल में कितना बदला विकास दुबे का गांव

कानपुर के बिकरू कांड को आज दो साल पूरे हो गए हैं. विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमले में 8 पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी. इस मामले की तफ्तीश कहां तक पहुंची? अब तक इस मामले में क्या-क्या एक्शन हुए? 2 साल में विकास दुबे का गांव कितना बदला?

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 विकास दुबे (फाइल फोटो) विकास दुबे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिकरू में 2 जुलाई 2020 को हुआ था पुलिस पर हमला
  • बिकरू कांड में शहीद हो गए थे सीओ समेत 8 पुलिसकर्मी

तारीख थी 2 जुलाई 2020 और समय था आधी रात के बाद करीब 12 बजकर 15 मिनट. कानपुर जिले के चौबेपुर थाने में अचानक पुलिस की गाड़ियों और वायरलेस सेट पर हलचल बढ़ गई थी. चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में विकास दुबे उर्फ पंडितजी को पकड़ने के लिए दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला हो गया था. इस घटना में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे. बिकरू कांड के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज इस घटना के आज दो साल पूरे हो गए हैं.

दरअसल, हुआ ये था कि बिकरू कांड में तत्कालीन सीओ बिल्लौर देवेंद्र मिश्रा की अगुवाई में गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके गैंग के साथियों ने घेर कर छतों से फायरिंग शुरू कर दी. जब तक पुलिस कंट्रोल रुम को इसकी सूचना मिलती और भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच पाती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. दबिश देने गई पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे सीओ देवेंद्र मिश्रा, एसओ महेश यादव, सब इंस्पेक्टर अनूप सिंह, नेबू लाल और कांस्टेबल जितेंद्र पाल, सुल्तान सिंह, बबलू कुमार और राहुल कुमार शहीद हो चुके थे.

बिकरू कांड में कुल 80 FIR

बिकरू कांड से जुड़ी सभी घटनाओं में कुल 80 एफआईआर दर्ज की गई थी. इनमें से 45 एफआईआर सिर्फ चौबेपुर थाने में ही दर्ज करवाई गई. पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में प्रमुख FIR क्राइम नंबर 192/ 20 थी जिसमें पुलिस ने विकास दुबे और उसके गैंग पर पुलिसकर्मियों की हत्या का मुकदमा दर्ज किया था.

शुरू नहीं हो सका कोर्ट में ट्रायल

बिकरू कांड के अब दो साल पूरे हो चुके हैं. पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में दर्ज किए केस में दो साल बाद भी ट्रायल शुरू नहीं हो सका है. पुलिस ने इस मामले में पांच हिस्सों में चार्जशीट दाखिल की थी. पहली चार्जशीट 35 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई. दूसरी तीसरी और चौथी चार्जशीट में एक-एक आरोपी थे. पांचवीं और अंतिम चार्जशीट में छह आरोपी थे. कोर्ट में अब तक खुशी दुबे को छोड़कर किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप तक तय नहीं हो पाए हैं और जब आरोप तय नहीं हो पाए तो कोर्ट में ट्रायल भी शुरू नहीं हो सका.

पुलिस की ओर से नहीं हो रही गवाही

कोर्ट में आरोप तय नहीं हो पाने को लेकर बचाव पक्ष के वकील शिवाकांत दीक्षित कहते हैं कि हर आरोपी को अपना बचाव करने का अधिकार है. पुलिस ने जो चार्जशीट लगाई है, उनका आधार झूठे दस्तावेज और झूठी कहानी है. उन्होंने दावा किया कि कोई सबूत नहीं है. यही वजह है कि पुलिस की तरफ से लगाए गए आरोप पर ऑब्जेक्शन हो रहे हैं और आरोप तय नहीं हो पा रहे. खुशी दुबे के मामले में ट्रायल चल रहा है लेकिन पुलिस की तरफ से गवाही नहीं हो पा रही. वहीं, कानपुर देहात जेल में बंद खुशी दुबे की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है. खुशी दुबे की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.

हीरू दुबे है विकास दुबे गैंग का नया सरगना

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर से पकड़े गए विकास दुबे को कानपुर लाते समय कथित तौर पर गाड़ी पलटी और पुलिस ने उसे कथित मुठभेड़ में मार भी गिराया. विकास दुबे को ढेर करने के बाद पुलिस ने उसके गैंग को रजिस्टर किया और अब पुलिस के दस्तावेजों में हीरू दुबे को इस गिरोह का नया गैंग लीडर बताया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक विकास दुबे गैंग में 12 मेंबर जिंदा बचे हैं जो जेल में है.

विकास दुबे के फाइनेंसर पर गैंगस्टर एक्ट का केस

पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए आरोपियों को जेल भेजने के साथ-साथ उनके आर्थिक साम्राज्य पर भी शिकंजा कसना शुरू किया. विकास दुबे के फाइनेंसर जय बाजपेयी और उसके तमाम गुर्गों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाया गया. चौबेपुर थाने में दो गैंगस्टर के मुकदमे दर्ज हुए. वहीं, नजीराबाद और बजरिया थाने में भी गैंगस्टर एक्ट के तहत मामले दर्ज हुए थे. गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए विकास दुबे की संपत्ति को तो कुर्क किया ही गया उसके फाइनेंसर जय बाजपेयी की करोड़ों रुपये की गाड़ियां, फ्लैट और संपत्ति भी कुर्क की जा चुकी है. कानपुर पुलिस अब तक जय बाजपेयी की 52 संपत्तियां चिह्नित कर चुकी है.

पुलिस पर दिखावे की कार्रवाई का आरोप

विकास दुबे गैंग के फाइनेंसरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुहिम चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ भदौरिया ने आरोप लगाया कि पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है. कानपुर पुलिस जय बाजपेयी की मदद कर रही है. पुलिस दिखावे के लिए जय बाजपेयी की छह संपत्तियां कुर्क कर रही है लेकिन 52 संपत्तियों का ब्यौरा उसके पास है जिनको लेकर कोई एक्शन नहीं लिया गया.

उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में 31 आरोपी हैं लेकिन संपत्ति सिर्फ 10 आरोपियों की ही सीज की गई. सौरभ भदौरिया ने कहा कि अरविंद त्रिवेदी और गुड्डन प्रशांत शुक्ला समेत कई आरोपियों की संपत्ति अब तक कुर्क नहीं की गई. पुलिस जिन 31 लोगों पर मेहरबान है, उनकी 982 संपत्तियों का ब्यौरा भी उपलब्ध कराया गया था लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया.

2 साल में कितना बदला गांव

दिखावे की कार्रवाई के आरोप पर कानपुर के पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि पुलिस हर पहलू की जांच गहनता से कर रही है. उन्होंने ये भी कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ सबूत के आधार पर कार्रवाई की जा रही है. दूसरी तरफ, बिकरू कांड के 2 साल बीतने के बाद गांव में धीरे-धीरे काफी कुछ बदल गया है. जिस गांव में विकास दुबे की मर्जी के बिना कोई ग्राम प्रधान नहीं बन पाता था, आज उस गांव में मधु चुनाव जीतकर ग्राम प्रधान हैं.

मधु कहती हैं कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ गांव वालों को मिलता ही नहीं था. गांव में राशन एक महीने बंटता था तो दूसरे महीने नहीं. सरकारी योजनाओं की आधी रकम ही लोगों को मिल पाती थी और उसमें भी पक्षपात होता था. गांव के लोग भी ये कह रहे हैं कि विकास दुबे के खात्मे के बाद गांव का विकास हुआ है.

 

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