आपको अगर गंगा नदी पार करना है तो अब करना होगा 40 किलोमीटर का ज्यादा सफर. दरअसल, संगम नगरी प्रयागराज के फाफामऊ इलाके में गंगा नदी पर बना चन्द्र शेखर आजाद सेतु मरम्मत के लिए एक महीने तक बंद रहेगा. इस वजह से अब इस पुल पर मोटर गाड़ियों की आवाजाही नही हो पाएगी.
वहीं अचानक पुल की मरम्मत के फैसले को लेकर इसका विरोध शुरू हो गया है. लोगों ने पहले वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है. ये पुल साल 1988 में बनकर तैयार हुआ था.
चंद्र शेखर आजाद ब्रिज को मरम्मत के लिए एक महीने के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है. इस दौरान इस ब्रिज में आयलिंग, ग्रीसिंग के साथ ही इसके टूटे फुटपाथ का भी निर्माण कार्य कराये जाने की तैयारी है. अब अचानक ब्रिज की मरम्मत को लेकर पीडब्लूडी और सेतु निगम की ओर से लिए गए इस फैसले का विरोध भी शुरु हो गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिज की मरम्मत कराने का फैसला अभी सही नहीं है, विभाग ने इसके लिए जो समय चुना है वो गलत है, क्योंकि इससे आम लोगों की परेशानी काफी बढ़ जायेगी, इस पुल के बन्द होने से लगभग 40 किलोमीटर की ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी और झूंसी जाकर शास्त्री ब्रिज से जाना पड़ेगा.
ये ब्रिज प्रयागराज से रायबरेली और लखनऊ के साथ ही प्रतापगढ़, सुल्तानपुर होते हुए अयोध्या को जोड़ने वाला एक मात्र टू लेन ब्रिज है. इसके एक माह तक बंद होने से वाहनों को शास्त्री ब्रिज से होते हुए अंदावा होकर हाईवे पर जाना होगा. इसका सीधा असर रोडवेज की बसों और प्राइवेट साधनों के किराये पर भी पड़ेगा.
ब्रिज बंद होने से साधारण बसों का किराया 23 रुपये से 36 रुपये तक और एसी बसों का किराया 29 रुपये से लेकर 45 रुपये तक बढ़ जायेगा. इसके साथ ही गंगापार फाफामऊ से आने वाली सब्जियों को भी मंडियों तक पहुंचाने में किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ेगी.
लोगों की मांग है कि गंगा में पान्टून ब्रिज बनाकर बड़े वाहनों का आवागमन सुनिश्चित किया जाये और दोपहिया वाहनों के लिए कर्जन ब्रिज को खोल दिया जाये. हालांकि बारिश के चलते गंगा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए अभी पान्टून ब्रिज बनाना संभव नहीं लग रहा है. ऐसे में लोगों की ये भी मांग है कि ब्रिज की मरम्मत का कार्य कुछ महीनों के लिए टाल दिया जाए.