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तनातनी के बीच तेलंगाना सरकार ने अब केंद्र से लगाई 1000 करोड़ की मदद की गुहार

रिपोर्ट में तेलंगाना सरकार ने कहा है कि बारिश और बाढ़ के कारण कई सड़कें बाढ़ में बह गईं हैं. इससे 498 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. वहीं, पंचायत राज विभाग को 449 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है.

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तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (File Photo) तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बाढ़-बारिश की वजह से तेलंगावा में हुआ करीब 1400 करोड़ का नुकसान
  • पहले ही कई मुद्दों को लेकर केंद्र को घेरना चाह रहे हैं तेलंगाना के सीएम

पहले से जारी तनातनी के बीच अब तेलंगाना की चंद्रशेखर राव सरकार ने केंद्र सरकार से एक हजार करोड़ रुपए की मदद की गुहार लगाई है. राज्य सरकार ने हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ से राज्य को हुए नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजी है. शुरुआती अनुमान के मुताबिक बाढ़ से अलग-अलग विभागों को करीब 1,400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

अपनी रिपोर्ट में तेलंगाना सरकार ने कहा है कि बारिश और बाढ़ के कारण कई सड़कें बाढ़ में बह गईं हैं. इससे 498 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. वहीं, पंचायत राज विभाग को 449 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. इसके अलावा नगर प्रशासन विभाग को 379 करोड़, सिंचाई विभाग को 33 करोड़ और बिजली विभाग को करीब 7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. तेलंगाना सरकार के मुताबिक मकान ढहने, घरों में पानी भरने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों के पलायन के कारण 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 

बता दें कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव केंद्र की मोदी सरकार के साथ सीधे टकराव के मूड में दिख रहे हैं. इससे पहले मानसून सत्र के लिए मुख्यमंत्री केसीआर ने अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के सांसदों को राज्य से जुड़े मुद्दों की लिस्ट सौंपी थी और इन मुद्दों को सदन में जोरशोर से उठाने के लिए कहा था. तेलंगाना राष्ट्र समिति ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार राज्य से भेदभाव कर रही है. जिन मुद्दों की लिस्ट केसीआर ने सांसदों को सौंपी थी, उनमें फंड ना देने से लेकर बिजली और पानी के मुद्दे शामिल थे.

इन मुद्दों पर जारी है केंद्र से मतभेद

1. ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत धनराशि जारी करना

तेलंगाना ने रोजगार गारंटी योजना शुरू की है और ग्रामीण गरीबों को आजीविका प्रदान कर रहा है. टीआरएस का कहना है कि किसानों के लिए सड़कों के निर्माण, सीसी सड़कों के निर्माण, तालाबों के निर्माण, वन क्षेत्रों में बाड़ के निर्माण और गली के वृक्षारोपण कार्यों पर केंद्र सरकार आपत्ति जता रही है. केंद्र सरकार इनके लिए रोजगार गारंटी राशि जारी करे.

2. अनाज संग्रह में समस्या

केंद्र के साथ समझौते के अनुसार, एफसीआई को सीएमआर (कस्टम मिलिंग चावल) खरीदने का निर्देश देना चाहिए. सीएमआर को चावल पहुंचाने की समय सीमा बढ़ानी चाहिए.

3. केंद्र की अनुमति के बिना तेलंगाना द्वारा लिए गए ऋणों का उधार लेना

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM) में वृद्धि, 15वें वित्त आयोग अनुदान, CSS फंड, तेलंगाना को पुनर्वितरण अधिनियम के अनुसार दिया जाने वाला फंड केंद्र की ओर से दिया जाना चाहिए.

4. केंद्रीय वित्त विभाग की लंबित धनराशि जारी किया जाए

केंद्रीय वित्त विभाग की लंबित 33 हजार 818 करोड़, 31 लाख रुपये की धनराशि जारी की जाए. केंद्र द्वारा अनुमोदित 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्र को तेलंगाना के स्थानीय निकायों को 817.61 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान करनी चाहिए. आंध्र प्रदेश पुनर्वितरण अधिनियम के अनुसार, केंद्र को तेलंगाना के पिछड़े क्षेत्रों के लिए 1,350 करोड़ रुपये आवंटित करने चाहिए. 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पोषण अनुदान 171 करोड़ रुपये जारी की जाए. वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राज्य विशिष्ट अनुदान राशि 3 हजार 024 करोड़ रुपए जारी की जाए. मिशन भगीरथ अनुदान वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित 2 हजार 350 करोड़ रुपये जारी की जाए. नीति आयोग द्वारा अनुशंसित मिशन भगीरथ अनुदान राशि 19 हजार 205 करोड़ रुपये जारी की जाए. नीति आयोग द्वारा अनुशंसित मिशन काकतीय अनुदान 5 हजार करोड़ रिलीज की जाए.

5. आंध्र प्रदेश विभाजन अधिनियम के तहत तेलंगाना को लंबित मुद्दे

तेलंगाना में एक आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए. बयाराम इस्पात उद्योग की स्थापना की जाए. एनटीपीसी के माध्यम से तेलंगाना को 4,000 मेगावाट बिजली प्रदान की जानी चाहिए. काजीपेट में रेलवे कोच फैक्ट्री की स्थापना की जानी चाहिए. तेलंगाना को केंद्रीय योजनाओं में उसका उचित हिस्सा दिया जाना चाहिए. सामान्य संस्थानों की प्रतिपूर्ति, वाणिज्यिक कर निधि. कंपनियों का डीमर्जर 9वीं और 10वीं अनुसूची के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए. केंद्र अतिवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें बनाए.

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