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व्यंग्यः कौन चाहता है दिल्ली में सरकार नहीं बने?

दिल्ली वालों ने सोचा था केजरीवाल मुख्यमंत्री बनने के बाद चुनौती का सामना करेंगे, लेकिन दिल्ली वालों को खुद कहां पता कि वो पनौती का सामना करेंगे.

नई दिल्ली नई दिल्ली

दिल्ली वालों ने सोचा था केजरीवाल मुख्यमंत्री बनने के बाद चुनौती का सामना करेंगे, लेकिन दिल्ली वालों को खुद कहां पता कि वो पनौती का सामना करेंगे, बाबा साहिलेश्वर ने दिल्ली के हालात पर क्या खूब कहा है,

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‘आप’ ना आये ‘फूल’ ना बरसे ठुल्लू-ए-बाबा मिला ‘हाथ’ में

पिछले एक साल से दिल्ली में जिस कदर सियाप्पा हो रखा है ऐसा लगता है दिल्ली की पटकथा भी ‘बालाजी’ वालों ने लिखी है.

दिल्ली में सरकार नहीं है, किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, चुनाव नहीं हो रहे, कोर्ट फैसले नहीं दे रही, दिल्ली की किस्मत का रास्ता बिल्ली काट गई लगती है. दुख की बात तो ये कि दिल्ली की हालत की जवाबदेही लेने को भी कोई तैयार नहीं दिखता, पूछो तो कहते हैं, बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, आप को जमाना दुश्मन नजर आता है, और कांग्रेस की दुश्मन खुद कांग्रेस हो गई, लगता है ये सारी शोएब इकबाल की कारस्तानी है.

तो क्या वजह है कि दिल्ली का कुछ हो नहीं रहा? कौन लोग हैं जो रोड़े अटकाते हैं, कौन नहीं चाहता दिल्ली में सरकार बने, Samsung ने क्यों रची है साजिश, कौन हैं दिल्ली के गुनाहगार, हम बताते हैं.

दिल्ली के पहले गुनाहगार हैं अरविन्द केजरीवाल, जो नहीं चाहते दिल्ली में सरकार बने, उन्चास दिन की सरकार चलाने के बाद एक बात उनके पल्ले पड़ गई है कि सरकार चलाना बच्चों का खेल नहीं, सड़क पर सरकार विरोधी नारे नहीं लगाए जा सकते, इल्जाम लगाने के बाद आपको चैन से नहीं बैठने दिया जाता, धरना नहीं दे सकते, जन सुनवाई में लोग आपकी ओर यूं लपकते हैं जैसे जोंटी रोड्स बॉल की तरफ, मफलर ट्विटर पर ट्रेंड होता है, खांसी पर फेसबुक पोस्ट्स बन जाती हैं.

अरविन्द केजरीवाल के सामने एक समस्या और है अन्ना आन्दोलन के समय से उनके गिने-चुने दो-चार जुमले हैं जिनका इस्तेमाल कर-कर वो भी अघा चुके हैं, भाषणों में नया कुछ कहने को उनके पास है नहीं, और उनका भाषण लिखने वाला भी गायब है उसके लौटते ही वो चुनावों के लिए तैयार हो जाएंगे, डर उन्हें इस बात का भी है कि कल को कहीं जनता मजे लेने को उन्हें फिर न जिता दे, ऊपर-ऊपर से भले वो कहें कि बीजेपी चुनावों से बच रही है, हर रात सोने के पहले वो भगवान से विश मानते है कि अब के जनम अब चुनाव न कीजो.

कांग्रेस चुनावों से क्यों बच रही है, इसका कारण सब जानते हैं, हम भी गणित वाले मास्साब की क्लास से ऐसे ही बचना चाहते थे, जाने कब सत्रह का पहाड़ा पूछ देंगे? हमे पहाड़ा नहीं आता था उनकी सीटें नही आती, हमें मुर्गा बनाया जाता था उनका पोपट बन जाता है. रोज-रोज हारकर बेइज्जती करानी किसे सुहाती है?

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग भी एक कारण हैं कि दिल्ली में सरकार नहीं है, कौन जानता था दिल्ली में राज्यपाल नहीं उपराज्यपाल होते हैं, राज्यपालों को वैसे भी शिलान्यास, दीक्षांत और शपथ ग्रहण समारोहों जैसे बड़े कामों के लिए याद किया जाता है नजीब जंग ने कईयों का सामान्य ज्ञान बढ़ा दिया, अब वो चुनावों के बाद भुलाए जाना नहीं चाहते.

बीजेपी के अपने कारण हैं, वो दिल्लीवालों से खुद को पूर्ण बहुमत न देने की खुन्नस निकाल रहे हैं, लेकिन आप दिल्ली में सरकार न बनने की असल वजह जानना चाहते हैं तो जान लीजिये, दिल्ली में सरकार एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी की साजिश के चलते नहीं बन पा रही वो कम्पनी है Samsung. सैमसंग वालों का मानना है कि जब दिल्ली में LG (उप-राज्यपाल) हो सकते हैं तो Samsung क्यों नहीं?

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