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मनी बिल पर स्पीकर के अधिकार की सीमा तय करेगी SC की सांविधानिक पीठ

संविधान के अनुच्छेद 110 (1) के तहत मनी बिल वो विधेयक होता है जिसमें केवल धन से जुड़े हुए प्रस्ताव हों. इसके तहत राजस्व और खर्च से जुड़े मामले आते हैं. ऐसे विधेयकों पर राज्य सभा में चर्चा तो हो सकती है लेकिन उस पर कोई वोटिंग नहीं हो सकती.

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो

  • कोई बिल मनी बिल है या नहीं है, इसे स्पीकर तय करते हैं
  • मनी बिल की विस्तृत चर्चा अनुच्छेद 110 (3) में की गई है

किसी भी बिल को मनी बिल तय करने के स्पीकर के विशेषाधिकार की सीमा को सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक बेंच तय करेगी. इससे पहले आधार बिल को मनी बिल के तौर पर तय किए जाने को लेकर सुनवाई हो चुकी है.

इसमें सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों की राय अलग-अलग थी. संविधान के अनुच्छेद 110 (1) के तहत मनी बिल वो विधेयक होता है जिसमें केवल धन से जुड़े हुए प्रस्ताव हों. इसके तहत राजस्व और खर्च से जुड़े हुए मामले आते हैं. ऐसे विधेयकों पर राज्यसभा में चर्चा तो हो सकती है लेकिन उस पर कोई वोटिंग नहीं हो सकती.

अगर यह सवाल उठता है कि कोई बिल मनी बिल है या नहीं है तो इसका फैसला स्पीकर करते हैं. स्पीकर का निर्णय अंतिम होता है. इसकी चर्चा अनुच्छेद 110 (3) में की गई है. मनी बिल पर राज्यसभा सिर्फ सलाह दे सकती है. लोकसभा उनकी सलाहों को मानने और नहीं मानने के लिए स्वतंत्र है. इस पर अंतिम फैसला लोकसभा ही लेगी.

पिछले साल आधार पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि किसी साधारण बिल को मनी बिल घोषित करना राज्यसभा के अधिकारों का हनन है. लिहाजा आधार एक्ट को मनी बिल नहीं कहा जा सकता. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि आधार एक्ट संविधान के अनुच्छेद 110 (1) के अनुरूप नहीं है इसलिए यह एक्ट गैर-संवैधानिक है.

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