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ओडिशा: नहीं मिली एंबुलेंस, बेटे को बाइक पर ले जाना पड़ा पिता का शव

राइघर ब्लॉक कुडुमधरा गांव के बलि साआंत रविवार को झरिगां ब्लॉक के बंशीवंधा गांव में अपने एक रिश्तेदार के घर गए थे. वहां पर अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई थी.

एंबुलेंस के लिए कई बार की थी कॉल एंबुलेंस के लिए कई बार की थी कॉल

  • रिश्तेदार के घर तबियत बिगड़ने के बाद पिता की हुई थी मौत
  • एंबुलेंस सेवा के लिए कई बार किया संपर्क, पर नहीं हो सका

ओडिशा में एक बार फिर ऐसी घटना देखने को मिली है, जो व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. नवरंगपुर जिला के उमरकोट स्थित गोपबंधु चौक पर एक शख्स को अपने पिता का शव बाइक से ले जाते देखा गया है. वो बाइक पर शव लेकर करीब 20 किलोमीटर दूरी तय करने के बाद घर पहुंचा.  

जानकारी के मुताबकि, राइघर ब्लॉक कुडुमधरा गांव के बलि साआंत रविवार को झरिगां ब्लॉक के बंशीवंधा गांव में अपने एक रिश्तेदार के घर गए थे. वहां पर अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई. इस दौरान कई बार एंबुलेंस से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. इस बीच बलि साआंत की मौत हो गई.

उनका बेटा लकी साआंत ने स्थानीय लोगों की मदद से शव को बाइक के पीछे एक लकड़ी के पट्टे में बांधकर अपने गांव कुडुमधरा पहुंचा. करीब 20 किलोमीटर तक लकी अपने पिता के शव को इसी तरह लेकर बाइक चलाता रहा. रात करीब 11 बजे उमरकोट शहर में कुछ लोगों ने उसे शव को अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन वह अपने घर लेकर चला गया. सोमवार को पोस्टमार्टम करने के बाद शव को उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया.

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बता दें कि 2017 अगस्त में पैसे ना होने के कारण दाना मांझी अपनी बेटी के साथ पैदल ही पत्नी अमांग देई का शव लेकर पैदल 10 किलोमीटर चला था. इस तस्वीर के सामने आने के बाद दाना मांझी पूरी दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया था.

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