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टिकटॉक केस पर सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार, कही ये बात

मद्रास हाई कोर्ट ने तीन अप्रैल को टिकटॉक ऐप के जरिए अश्लील और अनुचित सामग्री परोसे जाने का हवाला देते हुए केन्द्र को इस ऐप पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था.

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टिकटॉक ऐप डाउनलोड करने पर प्रतिबंध लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के हाल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. मद्रास हाई कोर्ट ने ऐप पर उपलब्ध अश्लील सामग्री को लेकर उसके डाउनलोड पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि सही समय पर याचिका की सुनवाई की जाएगी.

मद्रास हाई कोर्ट ने तीन अप्रैल को इस ऐप के जरिए अश्लील और अनुचित सामग्री परोसे कराए जाने का हवाला देते हुए केन्द्र को ‘टिकटॉक’ ऐप पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था. अदालत ने उस जनहित याचिका के आधार पर अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस आधार पर टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी कि इसमें कथित रूप से ऐसी सामग्री है जो संस्कृति का अपमान और अश्लील सामग्री को बढ़ावा देती है.

बता दें कि टिक टॉक ऐप के कारण आए दिन हो रहे हादसे और बढ़ते अश्लील वीडियो के खिलाफ तमिलनाडु सरकार इसे बैन करवाने केंद्र सरकार से बात करने का फैसला किया था. इस बारे में तमिलनाडु राज्य के सूचना और प्रसारण मंत्री एम. मणिकंदन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार टिक टॉक ऐप को बैन करने पर विचार कर रही है. क्योंकि इस ऐप से तमिल संस्कृति को नीचा दिखाने की कोशिश हो रही है. राज्य की कई राजनीतिक पार्टियों ने इस बारे में चिंता जताई है. इसलिए ब्लू व्हेल गेम को जिस तरह प्रतिबंधित किया गया है उसी तरह टिक टॉक को भी बैन किया जाए.

क्या है टिक-टॉक ऐप

'टिक-टॉक' चीनी कंपनी 'बाइट डान्स' का एक ऐप है. इसके जरिये 15 सेकेंड तक के वीडियो बनाकर शेयर किए जा सकते हैं. इसे चीन में सितंबर 2016 में लॉन्च किया गया था. साल 2018 में 'टिक-टॉक' की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी. यह अमेरिका में सबसे ज़्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप भी बन गया. भारत में भी इस ऐप का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है.

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