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साहित्य आजतक Day 3: शुभा मुद्गल के सुरों के साथ हुआ समापन, झूमे लोग

06 नवंबर 2019, 8:25 PM IST

साहित्य आजतक 2019 (Sahitya Aajtak 2019): साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' का समापन रविवार को संगीत के सुरों के बीच हुआ. महाकुंभ के आखिरी दिन कला, साहित्य और संगीत से जुड़ी कई हस्तियों ने शिरकत की. आज के पहले सत्र की शुरुआत भजन सम्राट के सुरों से हुई. शाम में मुशायरे का आयोजन हुआ, जिसमें वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी समेत कई शायरों ने समां बांध दिया. साहित्य आजतक की समाप्ति गायिका शुभा मुद्गल की संगीतमय प्रस्तुति से हुई. बता दें कि 2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी.

 

8:57 PM (एक वर्ष पहले)

शुभा मुद्गल के गीतों पर झूमे लोग

Posted by :- Mansi Mishra
साहित्य आजतक का तीन दिवसीय उत्सव समापन की ओर है. नमी और ठंड समेटे तीन नवंबर की रात को आठ बजे भी लोग पूरे जोशोखरोश के साथ शुभा मुद्गल को सुन रहे थे. इस तरह साहित्य के अनोखे उत्सव का समापन हुआ. साहित्य की दुनिया के नामी चेहरों ने इस उत्सव में हिस्सा लेकर दर्शकों को साहित्य जगत की पुरानी परंपरा से लेकर ताजी हवा तक सराबोर किया.
8:21 PM (एक वर्ष पहले)

वसीम बरेलवी ने पढ़ा, चिराग है बुझने का डर तो रहता है

Posted by :- Mansi Mishra
हवा के सामने सीना सिफर तो रहता है.
मगर चिराग है बुझने का डर तो रहता है.....

ठोकरों को भी नहीं होती हरएक सिर की तलाश
भांप लेती हैं किसे आता है सजदा करना
8:19 PM (एक वर्ष पहले)

मुशायरे में वसीम बरेलवी ने पढ़े ये शेर

Posted by :- Mansi Mishra
बात बढ़ जाती तो खोटा होता दोनों का सफर  
मैं ही पीछे हट गया और उसको रस्ता दे दिया
8:17 PM (एक वर्ष पहले)

राहत इंदौरी ने पढ़ा, तेरी परछाई, मेरे घर से नहीं जाती है

Posted by :- Mansi Mishra
तेरी परछाई, मेरे घर से नहीं जाती है
तू कहीं हो, मेरे अंदर से नहीं जाती है
आसमां मैंने तुझे सर पर उठा रखा है
ये है तोहमत, जो मेरे सर से नहीं जाती है
7:25 PM (एक वर्ष पहले)

राहत इंदौरी ने पढ़े ये शेर, बजीं तालियां

Posted by :- Mansi Mishra
अपना आवारा सर पटकने को तेरी दहलीज देख लेता हूं
फिर, कुछ दिखाई दे के न दे, काम की चीज देख लेता हूं
7:08 PM (एक वर्ष पहले)

जीशान निजामी ने पढ़ा, मुद्दतों खुद से मुलाकात नहीं होती है

Posted by :- Mansi Mishra
मुद्दतों खुद से मुलाकात नहीं होती है....
रात होती है मगर रात नहीं होती है...
शहर में अब कोई दरवेश नहीं है शायद...
अब कहीं कोई करामात नहीं होती है
7:07 PM (एक वर्ष पहले)

रंजीत सिंह ने सुनाया, हम सोचते ही रह गए किरदार

Posted by :- Mansi Mishra
दिल ये तो जानता है कि गुनहगार कौन है
आए जो नाम उसका तो तैयार कौन है
चेहरे बदल बदल के वो बर्बाद कर गया
हम सोचते ही रह गए किरदार कौन है
7:06 PM (एक वर्ष पहले)

कुंवर रंजीत सिंह को मिली वाहवाही

Posted by :- Mansi Mishra
उस दिलनशीं को देखकर हमबस वहीं ठहर गए
ये भी नहीं कि जिंदा हैं, ये भी नहीं कि मर गए
6:56 PM (एक वर्ष पहले)

नवाज देवबंदी ने सुनाई, उसकी बातें फूल हो जैसे

Posted by :- Mansi Mishra
उसकी बातें तो फूल हो जैसे, बाकी बातें बबूल हो जैसे उसका हंसकर नजर झुका लेना, सारी शर्तें कबूल हो जैसे छोटी-छोटी सी उसकी वो आंखें, दो चमेली के फूल हो जैसे
6:54 PM (एक वर्ष पहले)

नवाज देवबंदी ने संभाली मुशायरे की महफिल

Posted by :- Mansi Mishra
जाने माने शायर नवाज देवबंदी ने सुनाया कि अपना न कहा जाए तो बेगाना कहा जाएदीवाना हूं दीवाने को दीवाना कहा जाए मैखाने को मैखाना तो कहती है ये दुनिया, उन झील सी आंखों को भी मैखाना कहा जाए.
6:49 PM (एक वर्ष पहले)

'इश्क पानी की अजामत तो है, पर पानी नहीं'

Posted by :- Mansi Mishra
साहित्य आजतक मुशायरा में कवि अभिषेक शुक्ल ने पढ़ा कि
इश्क पानी की अजामत तो है, पर पानी नहीं. मैंने समझाया बहुत, पर वो मानी नहीं.
6:10 PM (एक वर्ष पहले)

इतिहास बदला नहीं जा सकता: स्वानंद

Posted by :- Mansi Mishra
साहित्य आजतक के सीधी बात मंच पर गीतकार स्वानंद किरकिरे ने कहा कि गांधी पर मेरा मानना ये है कि मेरे गांधी, तुम्हारे गांधी करने से बेहतर होगा कि गांधी को आत्मसात किया जाए. गांधी हम सबमें है. उन्होंने ये भी कहा कि इतिहास हमेशा से बदलने की कोशिश की जाती है, मगर इतिहास को बदला नहीं जा सकता है.
5:57 PM (एक वर्ष पहले)

'हमारे समय में प्यार' पर चर्चा

Posted by :- Mansi Mishra
साहित्य आजतक 2019 के मंच पर 'हमारे समय में प्यार' सेशन में कवियत्री अनामिका और बाबुषा कोहली ने हिस्सा लिया. इस मौके पर बाबुषा कोहली की किताब आईनाबाज का लोकार्पण किया गया.
5:45 PM (एक वर्ष पहले)

पढ़ें- डायरेक्टर इम्तियाज अली ने कैसे दिए इन सवालों के जवाब

Posted by :- Mansi Mishra
एक जवाब में उन्होंने कहा कि ''शाहरुख खान की मूवी माई नेम इज खान दुनिया के लिए थी. किसी भी संप्रदाय में कुछ अच्छे लोग भी होते हैं, कुछ मेरी तरह भी. मुझे नहीं लगता कि कोई इतना बेवकूफ बोता है कि उस कम्यूनिटी के सभी लोगों को गलत या बुरा समझे. मुझे इस देश या शहर में कभी गलत महसूस नहीं हुआ.'' नीचे दी जा रही लिंक में पढ़ें सभी सवालों के जवाब साहित्य आजतक 2019: क्या इम्तियाज अली को देश में खतरा महसूस होता है?
5:41 PM (एक वर्ष पहले)

वो पर्दे पर पर्दा किए जा रहे हैं... झूमे लोग

Posted by :- Mansi Mishra
दस्तक दरबार में सूफियाना शाम ने हंसराज हंस के गीतों ने लोगों को सूफी रंगत से रंग दिया. उन्होंने मजा ए इश्क और जिन्हें देखने के लिए जा रहे हैं, वो पर्दे पर पर्दा किए जा रहे हैं, कव्वाली सुनाई तो पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया.
5:40 PM (एक वर्ष पहले)

सीता ने उसे मारा जिससे भगवान राम खुद हार गए थे: नीलकंठन

Posted by :- Mansi Mishra
मुस्लिम काल से पहले लिखी गई सभी रामायण में सीता बेहद मजबूत कैरेक्टर हैं. राम से भी ज्यादा. रावण को मारने के बाद सहस्त्रमुख रावण आता है. जो राम को हरा देता है. उसे मारने के लिए सीता ने मां काली का रूप धारण किया था. इसका वर्णन तेलुगू भाषा के रामायण में है. सीता से बड़ा फेमिनिज्म का उदाहरण और कहीं नहीं मिलेगा. सीता लवकुश को तैयार करती हैं. ये दोनों बच्चे राम की पूरी सेना को हरा देते हैं. इससे बड़ा उदाहरण सिंगल मदर का कहीं और नहीं मिलेगा.
5:14 PM (एक वर्ष पहले)

इम्तियाज अली बोले, मुझे देश में कोई खतरा नहीं

Posted by :- Mansi Mishra
रोमांटिक फिल्मों के रॉकस्टार इम्तियाज अली ने साहित्य आजतक 2019 के मंच पर गीत संगीत के साथ देश के हालातों पर चर्चा की. क्या उन्हें भी दूसरे एक्टर्स की तरह देश में खतरा महसूस होता है? के सवाल पर इम्तियाज ने कहा कि मैं ये सब नहीं देखना चाहता. बहुत से काम हैं देखने और सोचने के लिए. मुझे अभी तक ऐसा फील नहीं हुआ है. राष्ट्रवाद को लेकर कोई विवाद नहीं हो सकता. पार्टियों को लेकर विवाद हो सकते हैं. मुझे देश में कोई खतरा महसूस नहीं होता.

4:03 PM (एक वर्ष पहले)

राहत इंदौरी ने सुनाई अपनी पसंदीदा कविता

Posted by :- Mansi Mishra
राहत इंदौरी ने संवाद के मंच से अपनी पसंदीदा ये लाइनें सुनाईं. अपने हाकिम की फकीरी पर तरस आता है, जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे है, सारा दिन जेल की दीवार उठाते रहिए, ऐसी आजादी कि हर शख्स रिहाई मांगे है. कविता पर लोगों ने खूब वाहवाही दी.