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यात्रियों के टिकट से नहीं निकल रही लागत, रेलवे को 78 हजार करोड़ का घाटा

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान परिचालन लागत से कम यात्री किराया होने के कारण रेलवे को भारी हानि हुई है.

भारतीय रेलवे को यात्रियों के टिकट से लागत नहीं वसूल हो पा रही. (फाइल फोटो-IANS) भारतीय रेलवे को यात्रियों के टिकट से लागत नहीं वसूल हो पा रही. (फाइल फोटो-IANS)

भारतीय रेलवे को पिछले तीन वर्षों में 78 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है. वजह है कि यात्रियों को बेचे टिकट से संचालन की लागत ही नहीं वसूल हुई. रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ओर से लोकसभा में दिए जवाब में यह बात सामने आई है. उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान परिचालन लागत से कम यात्री किराया होने के कारण रेलवे को हानि हुई है. उन्होंने बताया कि 2015-16 में 22,262, 2016-17 में 25,561 और 2017-18 में 31,128 करोड़ रुपये की हानि हुई है.

उन्होंने बताया कि देश का महत्वपूर्ण परिवहन अंग होने के कारण भारतीय रेलवे अपने देशवासियों के प्रति सामाजिक सेवा दायित्व को पूरा करती है. भारतीय रेलवे समाज के गरीब तबके को सस्ती दर पर परिवहन सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है. भारतीय रेलवे आम जनता के हित में लागत से कम कीमत पर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराती है.

रेल मंत्री ने बताया कि घाटे की भरपाई के लिए परंपरा के अनुसार, मालभाड़ा क्षेत्र में अर्जित राजस्व से क्रॉस सब्सिडाइजेशन की प्रक्रिया के जरिए भरपाई होती है. इसके अलावा एक अक्टूबर 2014 से डायनेमिक किराए पर प्रीमियम तत्काल कोटा सिस्टम भी शुरू हुआ है. इससे 2018-19 में करीब 603 करोड़ की रेलवे को आमदनी हुई. दरअसल, 24 जुलाई को लोकसभा में चार सांसदों ने पूछा था कि क्या भारतीय रेलवे यात्रियों और अन्य सेवाओं की लागत को पूरा नहीं कर पा रही है, जिस पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जवाब दिया.

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